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गाइडलाइन बनी समस्या:सीए, सीएस और सीएमए जैसे प्रोफेशनल कोर्स में पीएचडी तो करा रहे, लेकिन प्रोफेसर के लिए मान्य नहीं कर रहे

सूरत13 दिन पहले
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  • प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी तो अनिवार्य, लेकिन संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन होना भी जरूरी

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी से संलग्न कॉलेजों में यूजीसी के नियम के मुताबिक किए गए परिवर्तन के बाद सीए, सीएस और सीएमए जैसे प्रोफेशनल कोर्स में छात्रों को पीएचडी तो करवाई जा रही है, लेकिन उन्हें प्रोफेसर पद के लिए मान्य नहीं किया जा रहा है। इस वजह से छात्रों की समस्या बढ़ गई है।

छात्रों ने इसके लिए यूजीसीसी से शिकायत की, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। हर वर्ष सीए में 200 से ज्यादा छात्र पढ़ाई करते हैं। पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद यदि छात्र यूजीसी के गाइडलाइन के मुताबिक पीएचडी कर लेता है तो वह डॉक्टरेट के लिए मान्य होता है, प्रोफेसर के लिए नहीं। छात्रों ने नियम बदलने की मांग की है।

कई प्रोफेशनल कोर्सेस में सीधे पीएचडी करने से छात्रों को फायदा
यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार सीए, सीएस, सीएमए करने वाले छात्र भी पीएचडी कर सकते हैं। कॉलेजों के लिए जो गाइडलाइन बनाई गई है, उसके अनुसार प्रोफेसर के लिए पीएचडी तो जरूरी है, लेकिन छात्रों को संबंधित विषय से पीजी करना भी अनिवार्य है। सीए, सीएस और सीएमए जैसे प्रोफेशनल कोर्स के बाद सीधे पीएचडी कर सकते हैं, लेकिन बिना पीजी के प्रोफेसर के लिए मान्य नहीं किए जाएंगे।

कई तरह की समस्याएं, छात्रों को पता नहीं
छात्र विश्वनाथ बोरसे ने बताया कि समस्या यह भी है कि यदि कोई छात्र एमकॉम कर रहा है, लेकिन उसने स्टैटिक्स लिया है पर स्टैटिक से पीएचडी नहीं की तो प्रोफेसर के लिए मान्य नहीं होगा। ऐसी अनेक समस्याएं सामने आ रही हैं। ज्यादातर छात्रों को ये टेक्निकल बातें नहीं पता।

सीए में मात्र नाम के लिए पीएचडी है: छात्र
सीए कर चुके छात्र वैभव मातलीवाला ने बताया कि उन्होंने सीए के बाद पीएचडी की। इस बात की जानकारी नहीं थी कि प्रोफेसर के पद के लिए वह एलिजिबल नहीं हैं। अब उन्हें पोस्ट ग्रेजुएशन करना पड़ेगा।

यूजीसी को नियम में बदलाव करना चाहिए
कोई भी छात्र प्रोफेशनल कोर्सेज करने के बाद पीएचडी तो कर सकता है, लेकिन वह प्रोफेसर पद के लिए एलिजिबल नहीं माना जाएगा। इससे पूरे दक्षिण गुजरात के हजारों छात्र परेशान हैं। यूजीसी को इस नियम में बदलाव करना चाहिए, ताकि छात्रों को रोजगार मिल सके। -विजय जोशी, पूर्व डीन, कॉमर्स

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