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  • Even in the dream, we did not think that we will get such a good treatment of corona in a private hospital

अनुभव / सपने में भी नहीं सोचा था कि कोरोना का इतना अच्छा इलाज हमें निजी अस्पताल में मिलेगा

तस्वीर में बाएं से कांता बेन दंताणी और हेल्थ वर्कर इला बेन तस्वीर में बाएं से कांता बेन दंताणी और हेल्थ वर्कर इला बेन
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तस्वीर में बाएं से कांता बेन दंताणी और हेल्थ वर्कर इला बेनतस्वीर में बाएं से कांता बेन दंताणी और हेल्थ वर्कर इला बेन

  • कार्पोरेशन संचालित अस्पतालों की कार्यशैली की प्रशंसा की
  • यहां घर से भी अच्छा खाना मिलता है
  • मेरा पूरा परिवार इंफेक्शन से बच गया

दैनिक भास्कर

Jun 01, 2020, 04:01 PM IST

अहमदाबाद. यहां म्युनिसिपल कार्पोरेशन की कार्यशैली पर हमेशा सवाल उठते रहते हैं। ऐसे में इसके द्वारा किए गए कामों की कोई प्रशंसा करे, तो कुछ अजीब-सा लगता है। पर यह सच है कि कोरोना की इस महामारी के बीच कूछ कोरोना मरीजों ने अपने जो अनुभव सुनाए हैं, उससे म्युनिसिपल कार्पोरेशन की साख भी बढ़ोत्तरी होती है।

45 निजी और कार्पोरेट हॉस्पिटल को हस्तगत किया
कोरोना की महामारी को देखते हुए कार्पोरेशन ने शहर की 45 निजी और कार्पोरेट अस्पतालों को अपने अधीन किया। इन सभी में 1700 बेड की व्यवस्था है। इन अस्पतालों में बिना किसी भेदभाव के कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। कुछ महिलाओं ने बताया कि हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि कार्पोरेशन द्वारा संचालित इन अस्पतालों में हमें इतना अच्छा इलाज मिलेगा। ये महिलाएं सामान्य परिवार से हैं।


मरीजों को हर तरह की सुविधाएं
कार्पोरेशन ने इन अस्पतालों में यह व्यवस्था की है कि यहां हर तरह के मरीजों का बिना किसी भेदभाव के बेहतर से बेहतर इलाज हो। उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। कार्पोरेशन ने जिन अस्पतालों को अपने अधीनस्थ किया है, उनके नाम इस प्रकार हे। शेल्बी हॉस्पिटल, सिम्स हॉस्पिटल, सेवियर हॉस्पिटल, तपन हॉस्पिटल, एसजीवीपी हॉस्पिटल, स्टॉर हॉस्पिटल आदि।


मरीजों की चिंता करना सरकार की प्राथमिकता
सीनियर आईएएस अधिकारी डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि मरीजों की चिंता करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। देश के किसी एक शहर में एपिडेमिक एक्ट के तहत निजी हॉस्पिटल के 1700 बेड अपने अधिनस्थ किया है, ऐसा करके कार्पोरेशन ने एक मिसाल कायम की है।


अपने साथ 5 रुपए लाई थी, अभी तक रखे हैं
65 वर्षीय कांताबेन दंताणी ने बताया कि सेवियर एनेक्सी हॉस्पिटल में भर्ती हुईं, तब उनके पास केवल 5 रुपए थे। उसे अभी तक खर्च करने की नौबत नहीं आई है। यहां घर जैसा खाना मिल रहा है। किसी तरह की कोई तकलीफ भी नहीं है। डॉक्टर्स समय पर दवाएं देते रहते हैँ।


घर जैसा वातावरण मिला है
34 साल की हेल्थ वर्कर इला बेन ने बताया कि ऑन ड्यूटी थी, तब कोरोना के पॉजीटिव मरीज आए थे। मुझे सपने में भी यह खयाल नहीं आया था कि मेरा इलाज सिम्स में होगा। यहां घर जैसा ही वातावरण है।


मुझे और मेरे परिवार को बचाया
38 वर्षीय पुलिस कर्मचारी युनूस भाई ने बताया कि कार्पोरेशन ने निजी हॉस्पिटल में इलाज की व्यवस्था की है। इस कारण मेरा परिवार इंफेक्शन से बच गया। मैं पूरे स्टॉफ का आभारी हूं।

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