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  • Facility In Three Labs, But Genome Sequencing Is Not Allowed, Only 5 Out Of 62 Samples Sent To Gandhinagar Were Reported In 10 Days.

आशंका:तीन लैब में सुविधा, पर जीनोम सिक्वेंसिंग की अनुमति नहीं 10 दिन में गांधीनगर भेजे 62 में से 5 सैंपल की ही रिपोर्ट आई

सूरतएक महीने पहले
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वीर नर्मद यूनिवर्सिटी में जीनोम सिक्वेंसिंग सेटअप तैयार, पर अनुमति नहीं है। - Dainik Bhaskar
वीर नर्मद यूनिवर्सिटी में जीनोम सिक्वेंसिंग सेटअप तैयार, पर अनुमति नहीं है।
  • कोरोना के मरीज के ठीक होने के बाद आ रही रिपोर्ट, ऐसे में संक्रमण तेजी से फैलने का बढ़ सकता है खतरा
  • अनुमति मिले तो वीर नर्मद यूनिवर्सिटी व दो निजी लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग से लग सकता नए वैरिएंट का पता

शहर ओमिक्राॅन के पहले मामले का पता तब चला जब मरीज ठीक होकर घर चला गया। इसका कारण जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट देरी से आना है। शहर में वीर नर्मद यूनिवर्सिटी के साथ दो निजी लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन उन्हें अनुमति ही नहीं मिली है। इनके पास आरएनए एक्सट्रेक्शन किट भी नहीं है।

मनपा के पास 20 हजार किट हैं, लेकिन सैंपल गांधीनगर भेजकर समय बर्बाद किया जा रहा है। गांधीनगर भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट आने में 5 से 20 दिन लग जाते हैं। इतने समय में मरीज ओमिक्राॅन का कम्युनिटी स्प्रेड भी कर सकता है। पिछले 10 दिन में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए 62 सैंपल गांधीनगर भेजे गए हैं, जिसमें से करीब चार से पांच की रिपोर्ट ही आई है। इनमें एक ओमिक्रॉन का मरीज मिला।

वराछा में आए ओमिक्राॅन के मरीज का सैंपल 8 दिसंबर को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए गांधीनगर भेजा गया था। उसकी रिपोर्ट 13 दिसंबर को आई। हाई रिस्क अन्य देशों से आने वाले लोगों के सैंपल की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके बाद भी इतना समय लग रहा है। वहीं सामान्य कोरोना पॉजिटिव मरीजों के सैंपल की बात करें तो अक्टूबर और नवंबर की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। ओमिक्राॅन का पहला मामला आने के बाद मनपा के स्वास्थ्य अधिकारी बैठकें कर रहे हैं, लेकिन शहर में ही जीनोम सिक्वेंसिंग कराने पर विचार नहीं कर रहे हैं।

रिसर्च के लिए होती है जीनोम सिक्वेंसिंग

शहर में वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यनिवर्सिटी और दो निजी लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा है। माइक्रो बायोलॉजिस्ट के अनुसार जीनोम सिक्वेंसिंग जांच के लिए नहीं, बल्कि रिसर्च के लिए होती है, इसलिए बहुत कम लैब में इसकी मशीन है। मशीन 70 लाख एक करोड़ रुपए तक में आती है। इसके लिए आरएनए एक्सट्रैक्शन किट भी जरूरी होती है।

समय से रिपोर्ट आए तो स्प्रेड को रोका जा सकता है

ओमिक्राॅन डेल्टा वैरिएंट से पांच गुना ज्यादा तेजी से फैलता है। इसकी जांच जितनी जल्दी होगी उतनी ही जल्दी इसका स्प्रेड रोका जा सकता है। मार्च और अप्रैल में पॉजिटिव सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट जुलाई में आई और पता चला कि सभी डेल्टा वैरिएंट है। लेकिन तब तक शहर में स्थिति बेकाबू हो चुकी थी।

एक हफ्ते में दोनों डोज ले चुके 43 पाॅजिटिव, पर कोई अस्पताल नहीं गया, घर पर इलाज

ओमिक्राॅन को लेकर कहा जा रहा है कि इस पर वैक्सीन बेअसर है। एक्सपर्ट डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीन लेने वालों को भी कोरोना हो सकता है, लेकिन वे बिना अस्पताल गए जल्द ठीक हो जाते हैं। ऐसे में वैक्सीन लेना जरूरी है। पिछले एक हफ्ते में वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके 43 लोग संक्रमित हुए, लेकिन किसी को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ी। सभी घर पर ही ठीक हो गए। डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीन लेने के बाद फेफड़ों और ब्लड पर कोरोना के अटैक का असर बहुत कम हो जाता है। यही कारण है कि अभी 48 एक्टिव मरीजों में से सिर्फ 8 ही अस्पताल में भर्ती हैं। इन सभी की हालत स्थिर है।

चार नए पाॅजिटिव मिले, इनमें तीन रांदेर, एक भटार का, तीन वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके

मंगलवार को शहर में कोरोना के चार नए संक्रमित मिले। ग्रामीण में मंगलवार को कोई केस नहीं आया। अब तक शहर और ग्रामीण में कुल 144146 पाॅजिटिव आ चुके हैं। 6 मरीज डिस्चार्ज किए गए। अब तक 141981 मरीज ठीक हो चुके हैं। मंगलवार को कोई मौत नहीं हुई। अब तक 2117 मरीजों की जान गई है। 48 एक्टिव मरीजों का इलाज चल रहा है। नए मिले केस में तीन रांदेर जोन के हैं। इनमें 43 वर्षीय महिला, भावनगर से आया 57 वर्षीय हीरा व्यापारी और 41 वर्षीय युवक शामिल हैं। इसके अलावा भटार में एक 21 वर्षीय छात्र पाॅजिटिव आया है। चार में से तीन लोगों ने वैक्सीन के दोनों डोज लिए हैं।

कोरोना वैरिएंट का पता जल्द चलने से संक्रमण रोकने में मदद मिलेगी

वैरिएंट की जांच से इलाज में कोई फर्क नहीं पड़ता। इलाज सिम्टम्स के आधार पर होता है। हालांकि वैरिएंट का पता जल्द चलने से सतर्कता बढ़ा सकते हैं। समय रहते ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जा सकती है। वहीं क्वाॅरेंटाइन भी किया जा सकता है, जिससे वैरिएंट का संक्रमण और अधिक न फैले। जांच में देरी होने से वैरिएंट के स्प्रेड होने का खतरा ज्यादा होता है। -डॉ. फ्रेनिल मुनीम, माइक्रो बायोलॉजिस्ट

सूरत की 3 लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग की परमिशन नहीं, ये सुविधा चुनिंदा लैब में ही

पहले सिविल और स्मीमेर अस्पताल से जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल भेजे जाते थे। पिछले दिनों से हम भी जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेज रहे हैं। हमने पिछले 10 दिनों में 62 सैंपल गांधीनगर भेजे, जिनमें कुछ की रिपोर्ट निगेटिव आई है, जबकि एक ओमिक्रॉन का मरीज मिला है। सूरत में जो लैब हैं उनमें जीनोम सिक्वेंसिंग की अभी परमिशन नहीं मिली है। अभी देशभर में इंसाकॉक ग्रुप के 37 लैब हैं, जिनमें इस तरह की जांच हो रही है। इसकी एक ब्रांच गांधीनगर में भी है, इसलिए सब पॉजिटिव सैंपल वहां भेज रहे हैं। परमिशन मिलते ही सूरत की लैब में भी जीनोम सिक्वेसिंग शुरू कर देंगे। -डॉ. रिकिता पटेल, मेडिकल ऑफिसर, स्वास्थ्य विभाग, महानगर पालिका

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