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ब्लैक फंगस का बढ़ा दायरा:सिविल में पहली बार फेफड़ों में ब्लैक फंगस वाला मरीज आया, डॉक्टर बोले- हमने इसे किताबों में पढ़ा था, आज देख भी लिया

सूरत2 महीने पहले
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सिविल अस्पताल में ब्लैक फंगस के 550 मरीजों का इलाज हो चुका, ऐसा मामला पहली बार सामने आया है। - Dainik Bhaskar
सिविल अस्पताल में ब्लैक फंगस के 550 मरीजों का इलाज हो चुका, ऐसा मामला पहली बार सामने आया है।
  • नंदुरबार के 60 वर्षीय मरीज के फेफड़े में हुआ मिकोर माइकोसिस

ब्लैक फंगस के मामले भले ही कम हो गए हों, लेकिन एक अनोखा केस सामने आया है। पहली बार ब्लैक फंगस का फेफड़ों में इंवॉल्वमेंट पाया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि हमने किताबों में इसके बारे में पढ़ा था कि ब्लैक फंगस यानी मिकोर माइकोसिस फेफड़े तक भी पहुंच सकता है, लेकिन कभी इसका मरीज नहीं देखा था। आमतौर पर यह बीमारी साइनस से होते हुए जबड़े, आंख और उसके बाद ब्रेन को संक्रमित करती है।

सिविल अस्पताल के ईएनटी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आनंद चौधरी ने बताया कि अब तक 550 से अधिक ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज किया जा चुका है, लेकिन यह पहला केस है जब किसी मरीज के फेफड़े में ब्लैक फंगस हो गया है। मरीज का इलाज चल रहा है और वह स्टेबल है। एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन भी दिया जा रहा है। उसे मिकोर माइकोसिस वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।

10 दिन पहले नंदुरबार से इलाज के लिए सूरत आया बुजुर्ग
नंदुरबार निवासी 60 वर्षीय एक बुजुर्ग को सिर दर्द और सांस की समस्या थी। 10 दिन पहले इलाज के लिए वह सूरत के सिविल अस्पताल आए। टीबी एंड चेस्ट विभाग में उनका इलाज शुरू किया गया। जांच में पता चला कि उन्हें टीबी नहीं है। उसके बाद डॉक्टरों ने सीने और ब्रेन का सीटी स्कैन और एमआरआई कराया, जिसमें ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई।

सिविल अस्पताल में अब ब्लैक फंगस के तीन मरीज
डॉ. आनंद चौधरी बताते हैं कि सिविल में अब तक ब्लैक फंगस के 550 से अधिक मरीज आ चुके हैं। केवल 3 मरीज वार्ड में भर्ती हैं। लंबे समय से कोई नया मरीज नहीं आया है। करीब 46 मरीजों की जान जा चुकी है। वहीं 22 से ज्यादा मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं। अब तक अस्पताल में 450 से अधिक मरीजों का ऑपरेशन हुआ है। अब तक साइनस, जबड़े, आंख और ब्रेन में ही ब्लैक फंगस मिलता था, लेकिन यह पहला मामला है।

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