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धोखाधड़ी का मामला:1800 किराये पर 254 गाड़ियां कंपनी में लगवाईं, सभी को गिरवी रख करोड़ों उठा लिए

सूरत8 दिन पहले
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  • 400 गाड़ियां गिरवी रखने की बात आ रही सामने, आरोपी बोटाद से गिरफ्तार

झघडिया की टीजी सोलर कंपनी में किराए पर गाड़ी देने के का लालच देकर शहर के ट्रैवल एजेंट ने 400 से ज्यादा गाड़ियों को गिरवी रखकर करोड़ों रुपए की ठगी कर ली। इस मामले में सूरत में 254 गाड़ियों को गिरवी रखने का मामला ही दर्ज हुआ है। मामले में मुख्य आरोपी केतुल परमार को बोटाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

पकड़े गए आरोपी ने बोटाद में भी 20 से 30 गाड़ियों का इसी तरह से घोटाला किया था। आरोपी शुरुआती 6 महीनों तक गाड़ी के मालिकों को हर 15 दिन पर किराया चुकाता था। जिसके कारण सभी लोगों ने उस पर भरोसा कर अपनी गाड़ियां उसको किराए पर लगाने के लिए दे दी थी।

आरोपी एजेंट सूरत के ट्रैवल एजेंटों को एक गाड़ी पर रोजाना 200 रुपए का कमिशन देता था। एफआईआर में दर्ज कराए कुल 254 गाड़ियों में से दो गाड़ी में राजकोट और जामनगर ट्रांसफर कर दिया है। केतूल प्रवीण परमार कामरेज के शुभम रो हाउस का रहने वाला है और उसने इन सभी गाड़ियों का फर्जी दस्तावेज बनाकर उन्हें दूसरे के पास गिरवी रख दिया हैं।

इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता सूरत के भाठेना अंबिका चौक के पास रहने वाले ट्रैवल एजेंट अमर वीरा पटेल ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज करवाई है। जिसके आधार पर पुलिस ने एजेंट केतुल परमार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपी के अलावा इस मामले में उसके साथी कालू, भूरा, बुद्धा सहित कुल 4 लोगों को गिरफ्तार करने की कार्रवाई शुरू की गई है।

मनीष वीरा पटेल के माध्यम से सबसे ज्यादा 93 गाड़ियां ली

सूरत के टूर्स एंड ट्रैवल्स के अमर पटेल और उसके पार्टनर तथा दोस्त और रिश्तेदारों ने मिलाकर 9 गाड़ियों को 11 महीने की नोटरी करके केतुल परमार को दिया था। इसके अलावा प्रदीप वीरा पटेल की 63 और उसके साढू भाई कौशिक पटेल की 26, बुआ के बेटे हितेंद्र पटेल की 9 तथा उसके दोस्त स्वप्न पाटिल के माध्यम से 24 गाड़ियां एजेंट केतुल परमार को दी थी।

इन गाड़ी के मालिकों के अलावा आरोपी एजेंट ने शिकायतकर्ता के साढू कौशिक पटेल की गाड़ी राजकोट के परवेज खान के नाम और साली दृष्टि पटेल की गाड़ी जामनगर की कोमल रावणीया के नाम ट्रांसफर कर दी। आरोपी ने मनीष वीरा पटेल के माध्यम से 93 गािड़यां ली थी।

केतुल परमार 6 महीने तक लगातार गाड़ियों का किराया देता था। लेकिन 30 मार्च 2021 के बाद उसने गाड़ी मालिकों को किराए देना बंद कर दिया। लोगों ने जब उससे किराए के बारे में पूछा तो उसने लॉकडाउन के कारण परिस्थिति खराब होने की बात कहकर 10 दिन तो, कभी 15 दिन या पूरा महीने कहकर बात टालने लगा।

उसके बाद अपना मोबाइल बंद कर दिया था। सभी गाड़ी मालिकों ने इकट्ठा होकर उसे खोजने का प्रयास किया था। लेकिन किसी को उसके घर का पता मालूम नहीं था। इसके बाद झघडिया केक कंपनी में जाकर जांच की तो पता चला कि इस तरह की कोई कंपनी ही नहीं थी।

दोस्ती: चुनाव के दौरान हुई थी आरोपी से जान पहचान

ट्रैवल एजेंट मनीष वीरा पटेल की साल 2018-19 को चुनाव के बंदोबस्त के दौरान अपनी गाड़ी लेकर गया था। तब उसकी पहचान के केतुल परमार के साथ हुई थी। तब केतूल ने उसे कहा था कि एक कंपनी में काम मिला है, जिसके लिए गाड़ी किराए पर चाहिए। शुरुआत में एजेंट 1 दिन की गाड़ी का किराया 1800 देने की बात कहीं थी।

इसके लिए एजेंट ने अपनी गाड़ी पहले ही 10 दिन के लिए किराए पर दे दी और उसके साथ ओरिजिनल आरसी बुक, पीयूसी और बीमा की कॉपी भी दे दी। केतुल परमार समय पर किराया चुकाया दिया जाता था, जिसकी वजह से मनीष ने उस पर भरोसा कर लिया था।

बाहर से भी ली गाड़ियां

आरोपी केतुल ने बोटाद, बारडोली, नवसारी, नंदुरबार, नवापुर, भावनगर और सूरत के छोटे ट्रैवल एजेंट्स के पास से गाड़ियां किराए पर ली थी। शुरुआती छह महीनों तक वह किराया समय पर चुकाता रहा लेकिन फिर आरोपी उनकी गाड़ियों को गिरवी रख कर करोड़ों रुपए ऐंठ लिए।

जीपीएस हटा देता था

आरोपी एजेंट मालिकों के पास से गाड़ी कंपनी में किराए पर चलाने के लिए लेता था। उन गाड़ियों पर केतुल अपना ही ड्राइवर रखता था। सूरत में गाड़ी लेने के बाद कामरेज से आगे जाते ही उनमें से जीपीएस सिस्टम निकाल देता था। जिसके बाद मालिकों को अपनी गाड़ियों के लोकेशन का पता नहीं चलता था।

पुलिस की भी गाड़ी गिरवी

अभी तक एफआईआर में 254 गाड़ियों के गिरवी रखने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के जांच करने पर 400 से ज्यादा गाड़िया केवल सूरत शहर की ही गिरवी रखी गई है। इस मामले में कामरेज के एक पुलिसकर्मी की भी गाड़ी गिरवी रखी गई थी, लेकिन उसने अपने रसूख से गाड़ी छुड़वा ली।

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