पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

चक्रवाती तूफान का कहर:'ताऊ-ते' जहां भारत की धरती से टकराया, वहां से भास्कर के रिपोर्टर का आंखों देखा हाल

वेरावल (गुजरात)4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
वेरावल में जगह-जगह गिरे पेड़ों का अंबार। - Dainik Bhaskar
वेरावल में जगह-जगह गिरे पेड़ों का अंबार।

गुजरात से ताऊ-ते तूफान का संकट टल गया है। हालांकि, चक्रवात ने गुजरात में भारी तबाही मचाई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार तूफान ने 45 लोगों की जान ली है, लेकिन भास्कर की पड़ताल में 79 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है। तूफान से 2 लाख से अधिक पेड़ धराशायी हुए हैं, जबकि अभी 112 रास्ते आवागमन के लिए बंद हैं।

प्राथमिक जानकारी के मुताबिक 20 हजार से अधिक कच्चे मकान प्रभावित हुए हैं। दैनिक भास्कर ने गुजरात के उन सभी 16 जिलों में अपने रिपोर्टर तैनात किए थे, जहां तूफान का सबसे ज्यादा असर होने वाला था। पढ़िए भास्कर के रिपोर्टर का आंखों देखा हाल...

उजाड़ हुआ दीव का खूबसूरत बीच नागवा।
उजाड़ हुआ दीव का खूबसूरत बीच नागवा।

पर्यटकों का पसंदीदा दीव का नागवा बीच तबाह हो गया
तूफान सबसे पहले संघ प्रदेश दीव से टकराया था, जहां के कई बीच पूरी तरह तबाह हो गए हैं। इन्हीं में से एक है नागवा बीच, जो पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में से एक है। तूफान के चलते बीच उजाड़ हो गया है। दुकानों से लेकर पर्यटकों के आराम के लिए बनाई गई झोपड़ियां व अन्य स्टैंड की जगह सपाट मैदान है। नारियल के सैकड़ों पेड़ धराशायी होने से बीच की खूबसूरती भी छिन गई है।

खतरे के चलते पोर्ट खाली कराकर बोट और नावें सुरक्षित जगहों पर रख दी गई थीं।
खतरे के चलते पोर्ट खाली कराकर बोट और नावें सुरक्षित जगहों पर रख दी गई थीं।

वेरावल पोर्ट की 8500 नावें थीं बड़ा खतरा
राज्य में सबसे ज्यादा असर सौराष्ट्र में ऊना और वेरावल के तटीय क्षेत्रों में हुआ है। वेरावल में मछुआरों को सबसे ज्यादा चिंता अपनी बोटों की थी। हालांकि, दो दिन पहले ही अलर्ट जारी हो जाने के चलते समय रहते ही 8500 से ज्यादा नावों को पोर्ट के अंदर लाकर एक साथ बांध दिया गया था। तूफान से न सिर्फ नावों के तबाह होने का खतरा था, बल्कि तूफान के लपेटे में अगर नावें आतीं तो इससे जनहानि का भी खतरा बढ़ जाता।

सुरक्षित स्थल पर जाने से पहले पत्थरों की ओट से आशियाना बचाने की कोशिश करता एक ग्रामीण।
सुरक्षित स्थल पर जाने से पहले पत्थरों की ओट से आशियाना बचाने की कोशिश करता एक ग्रामीण।

24 गांवों से 12,000 से अधिक लोगों को निकाल लिया गया था
गिर-सोमनाथ के तटीय क्षेत्रों के 24 गांवों से 12,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया गया था। हालांकि, इसमें भी सबसे बड़ी दिक्कत कोविड मरीजों की थी। इसी के चलते सोमनाथ में ही चार भवनों को अस्पताल में बदल कर 100 बेड की व्यवस्था कर दी गई थी। जिससे इस समस्या से निपटा जा सका।

नावें रस्सी तोड़कर समुद्र में बह गईं।
नावें रस्सी तोड़कर समुद्र में बह गईं।

नवा और सैयादराजपारा पोर्ट पर ज्यादा नुकसान
ऊना तहसील के नवा और सैयादराजपारा पोर्ट पर तूफान ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। यहां समुद्र किनारे बंधी कई नावें रस्सी तोड़कर बह गईं। यहां झोपड़ियों और मिट्टी के घरों को भी काफी नुकसान पहुंचा। बिजली के खंभे गिरने से बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी और मोबाइल टॉवर गिर जाने के चलते कई इलाके संपर्कविहीन हो गए थे। तेज बारिश के चलते अब भी कई गांवों में बिजली की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।

विसावदर के लेरिया गांव में बर्बाद एक घर का मंजर।
विसावदर के लेरिया गांव में बर्बाद एक घर का मंजर।

विसावदर के लेरिया गांव के करीब 50 मकानों की छतें उड़ गईं
राजकोट जिले की विसावदर तहसील में 120 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चली हवा ने जबर्दस्त तरीके से तबाही मचाई। वहीं, लेरिया गांव में तूफान का ऐसा झोंका आया कि एक साथ गांव के करीब 50 कच्चे मकानों को छतें उड़ा ले गया। बिजली गुल होने और तूफान के बाद तेज बारिश ने गांव के लोगों को और मुश्किल में डाल दिया। गांववालों ने किसी तरह रात काटी।

सोमवार की रात ऊना में 150-160 किमी की स्पीड से हवाएं चलीं।
सोमवार की रात ऊना में 150-160 किमी की स्पीड से हवाएं चलीं।

ऊना में 10 किमी तक की सड़क का डामर उखड़ गया
चक्रवाती तूफान ताऊ-ते ने गुजरात में जमकर कहर बरपाया है। राज्य में सबसे ज्यादा असर सौराष्ट्र में ऊना के तटीय क्षेत्रों में हुआ है। ऐसे सैकड़ों परिवार हैं, जो बेघर हो चुके हैं। सोमवार की रात ऊना में 150-160 किमी की स्पीड से हवाएं चलीं, जिससे आसपास के कई गावों में तबाही मच गई। यहां तूफान के कहर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऊना की ओर जाने वाली एक सड़क के करीब 10 किमी हिस्से का डामर तक उखड़ गया।

तालाला में आम के कई बगीचे तहस-नहस हो गए।
तालाला में आम के कई बगीचे तहस-नहस हो गए।

गिर-सोमनाथ में आम की फसल बर्बाद
गिर-सोमनाथ और उसके आसपास के इलाकों में असंख्य आम के बगीचे हैं। इस बार ये भी तूफान की भेंट चढ़ गए हैं। तूफान के चलते पेड़ों से फल झड़ गए हैं और बगीचे कैरियों से भरे नजर आ रहे हैं। एक किसान ने बताया कि इस तूफान से गिर-सोमनाथ की करीब 100 करोड़ रुपए की आम की फसल बर्बाद हो चुकी है। किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फिर चुका है।

खबरें और भी हैं...