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जंगल में खो गए 40 बच्चे:एसडी जैन कॉलेज के 382 छात्रों का ग्रुप उमरपाड़ा ट्रेकिंग के लिए गया था, 4 घंटे बाद मिले

सूरत15 दिन पहले
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पेरेंट्स ने सीएमओ में शिकायत की तो वन विभाग ने ढूंढा। - Dainik Bhaskar
पेरेंट्स ने सीएमओ में शिकायत की तो वन विभाग ने ढूंढा।

सूरत। स्टूडेंट्स को ट्रेकिंग टूर पर ले गए शहर के एक कॉलेज की बड़ी लापरवाही सामने आई है। टूर के दौरान कॉलेज के 40 बच्चे ग्रुप से भटक कर जंगल में खो गए। जंगल में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से बच्चे टीचर्स से सम्पर्क नहीं कर पाए। जब पेरेंट्स को इसकी जानकारी मिली तो उनकी जान सांसत में आ गई। चार घंटे तक पेरेंट्स की सांस ऊपर-नीचे होती रही। आखिरकार एक छात्र के पेरेंट्स ने मुख्यमंत्री कार्यालय को सूचना दी। सीएमओ के निर्देश पर वन विभाग सक्रिय हो हुआ और लापता बच्चों को ढूंढ निकाला।

मामला एसडी जैन इंटरनेशनल कॉलेज का है। कोरोना का प्रभाव कम होने के बाद दो साल बाद कॉलेज प्रबंधन ने बच्चों के लिए उमरपाड़ा के जंगल में ट्रेकिंग टूर आयोजित किया। इस टूर में कॉलेज के 382 स्टूडेंट्स और टीचर, कोच एवं अन्य स्टाफ शामिल था। पेरेंट्स के मुताबिक स्टूडेंट्स को ग्रुप जब ट्रेकिंग कर रहा था तो 40 छात्र-छात्राएं आगे निकल गए और ग्रुप पीछे छूट गया। स्कूल स्टाफ ने इस बात का ध्यान नहीं रखा कि सभी स्टूडेंट्स साथ-साथ चलें। सभी 40 स्टूडेंट्स आगे जाकर जंगल में रास्ता भटक गए।

घना जंगल होने के कारण वहां मोबाइल नेटवर्क नहीं था, जिससे वे टीचर और पेरेंट्स से सम्पर्क नहीं कर पाए। सभी बच्चों को शाम को पांच बजे कैम्प पर लौटना था। जब शाम 5 बजे ग्रुप की हाजिरी ली गई तो पता चला कि 40 बच्चे लापता है। स्कूल प्रबंधन ने तत्काल बच्चों के पेरेंट्स से सम्पर्क किया और बच्चों को अल्टरनेट मोबाइल नम्बर मांगा। इसी दौरान एक बच्चे का मोबाइल कनेक्ट हो गया और उसने पेरेंट्स को अपनी लोकेशन बता दी। पेरेंट्स ने सीएमओ को इसकी जानकारी दी। सीएमओ के निर्देश पर तत्काल वन विभाग सक्रिय हुआ और वन्य अधिकारियों ने बच्चों को ढूंढ कर कैम्प तक पहुंचाया।

स्कूल-कॉलेज के टूर प्रोग्राम के लिए राज्य सरकार की गाइड लाइन है। जिसके अनुसार स्कूल या कॉलेज प्रबंधन को टूर पर जाने से पहले जिला शिक्षा अधिकारी एवं स्थानीय थाना पुलिस को सूचना देनी होती है। लेकिन इस केस में स्कूल प्रबंधन ने जिला शिक्षा अधिकारी को कोई जानकारी नहीं दी। कॉलेज की इस थोड़ी सी लापरवाही की वजह से 40 बच्चों के माता-पिता और परिजन काफी परेशान हुए। जब तक उन्हें अपने बच्चों के सलामत होने की जानकारी नहीं मिली तब तक उनकी सांस अटकी रही है। पेरेंट्स बार-बार पुलिस एवं स्कूल प्रबंधन को फोन करते रहे।

सात बसों में 382 स्टूडेंट्स गए थे
वेसू स्थित एस डी जैन इंटरनेशनल कॉलेज के बीबीए, बीसीए, बीकॉम के दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों को एक अक्टूबर को ट्रेकिंग के लिए उमरपाडा जंगल में ले जाया गया था। इसमें 7 बसों में 382 छात्र शामिल थे। पिछले 2 वर्ष से कोरोना की वजह से बच्चों को कहीं टूर पर नही ले जाया गया था, इसलिए कॉलेज प्रबंधन कॉलेज खुलने के बाद ट्रेकिंग का प्रोग्राम प्लान किया था। कॉलेज के स्पोर्ट्स कोच जयदीप राठौर ने टूर प्लान किया था।

गाइड और कॉलेज स्टाफ साथ था
कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों को ले जाने के लिए बसें हायर की थीं। एक बस में करीब 55 छात्र थे। इन छात्रों को देखरेख और संभालने के लिए एक बस में 2 प्रोफेसर(1 पुरुष-एक महिला) थे। इसके अलावा जहां छात्रों को ट्रेकिंग के लिए ले जाया गया था, वहां से कुल 22 लोकल गाइड भी लिए गए थे। स्टूडेंट्स की 7 टीमें बना कर प्रत्येक टीम के साथ दो गाइड लगाए गए थे।

रास्ता भटक गए तो फंस गए
कॉलेज की तरफ से एक लाइन में छात्रों को जाना था जिसमे छात्रों को जिस लेग में ले जाया जा रहा था उसी लेग में से सब छात्र एक दूसरे के पीछे चल रहे थे लेकिन बीच में किसी ग्रुप के बीच ज्यादा डिस्टेंस हो जाने की वजह से 40 छात्र रास्ता भटक गए और गलत दिशा में मुड गए। इस वजह से छात्र जंगल में ही खो गए। कुछ छात्र अकेले थे तो कुछ छात्र अपने दोस्तों के साथ थे।

शाम को हाजिरी ली तो पता चला
कोच जयदीप भाई ने बताया की शाम 5 बजे छात्रों को इकट्ठा होना था, उसी बीच छात्रों की हाजिरी ली गई। इस दौरान 40 छात्र अनुपस्थित मिले। थोड़ी देर उनकी राह देखी गई, लेकिन जब वापिस नही आए तो उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया, लेकिन फोन नहीं लगा। फिर लोकल गाइड को सर्च पर लगाया गया। जिसके बाद लगभग 2 से 3 घंटे तक का समय गुजर गया था और बच्चे लगभग 7.30 बजे मिले और उन्हें वापिस कैम्प में लाया गया।

मोबाइल पर संपर्क नहीं कर पाए
रास्ता भटक जाने के बाद छात्रों ने फोन से कॉलेज प्रबंधन और अभिभावकों से सम्पर्क करने की कोशिश की, लेकिन नेटवर्क नहीं होने की वजह से सम्पर्क नहीं हुआ। किसी एक छात्र के फोन से सम्पर्क हुआ तो उसने अपने अभिभावक को जानकारी दी और अभिभावक ने आनन-फानन में इसकी शिकायत सीएमओ में की और वहां से भी छात्रों के लिए जांच की कार्रवाई शुरू करवाई गई। फारेस्ट विभाग, पुलिस, लोकल गाइड बच्चों को ढूंढने में लगेे।

सरकार की गाइडलाइन की पालना नहीं की गई
सरकार ने स्कूल एवं कॉलेज के टूर को लेकर गाइड लाइन जारी कर रखी है। जिसके तहत जब भी कोई स्कूल या कॉलेज किसी प्रवास के लिए बच्चों को बाहर ले जाता है तो उसे इसकी जानकारी नजदीकी थाने में देनी होती है। टूर बस और सम्बंधित वाहन में जीपीएस ट्रेकिंग होना अनिवार्य है। किस उम्र के बच्चों को कहां ले जाना चाहिए। इसका ध्यान रखना चाहिए। टूर पर जोन से पहले शिक्षा विभाग को पूरी जानकारी देनी होती है। कॉलेज प्रबंधन इस गाइड लाइन की पालना नहीं की।

ट्रेकिंग टूर के दौरान कहीं भी लापरवाही नहीं बरती गई। बच्चो का ग्रुप पीछे रह गया था, जिससे ऐसी घटना हुई। इससे हमें सीख मिली है और भविष्य में इस प्रकार की घटना ना हो, इसका हम विशेष ध्यान रखेंगे। -जयदीप राठौर, कोच एवं टूर आयोजक, एसडी जैन कॉलेज

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