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मच्छू ब्रिज हादसा:हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार से मांगा जवाब, राज्य मानवाधिकार आयोग को भी नोटिस

मोरबी3 महीने पहले
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गुजरात के मोरबी हादसे पर गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। गुजरात सरकार को 14 नवंबर तक जवाब देने को कहा गया है। मोरबी नगर पालिका को भी नोटिस जारी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य मानवाधिकार आयोग को भी नोटिस जारी किया है।

मामले में अगली सुनवाई 14 नवंबर को होनी है। आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने मोरबी हादसे का स्वत: संज्ञान लिया था। बीते 30 अक्टूबर की शाम को हुए इस हादसे में 135 लोगों की मौत हुई, जिसमें 50 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं।

मोरबी हादसा 3 पॉइंट्स में...

1. पुल हादसा: क्षमता से ज्यादा लोग जमा हुए
हादसा रविवार (30 अक्टूबर, 2022) शाम 6.30 बजे तब हुआ, जब 765 फीट लंबा और महज 4.5 फीट चौड़ा केबल सस्पेंशन ब्रिज टूट गया। इसकी क्षमता महज 100 लोगों की थी। यहां 500 से ज्यादा लोग जमा हो गए थे। चश्मदीदों ने तो बताया कि वहां पर हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। 26 अक्टूबर को खोले जाने के 5 दिन बाद ही यह हादसा हुआ।

2. एक्शन: 9 गिरफ्तारियां, 50 लोगों की टीम जांच कर रही
ब्रिज के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ओरेवा ग्रुप के पास है। इस ग्रुप ने मार्च 2022 से मार्च 2037 यानी 15 साल के लिए मोरबी नगर पालिका के साथ एक समझौता किया है। गुजरात पुलिस ने कहा कि 50 लोगों की टीम पुल हादसे की जांच में जुटी है। जिम्मेदारों पर धारा 304, 308 और 114 के तहत केस दर्ज किया गया है। IG ने कहा- अभी तक जिनकी भूमिका सामने आई, उन्हें गिरफ्तार किया गया। जैसे-जैसे नाम सामने आते जाएंगे और गिरफ्तारियां होती जाएंगी। अब तक 9 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें ओरेवा कंपनी के अफसर भी शामिल हैं। इसी कंपनी को ब्रिज की जिम्मेदारी दी गई है।

3. इन्वेस्टिगेशन: फोरेंसिक एक्सपर्ट ने बताई वजह
मोरबी का केबल सस्पेंशन ब्रिज 20 फरवरी 1879 को शुरू किया गया था। 143 साल पुराना होने से इसकी कई बार मरम्मत हो चुकी है। हाल ही में 2 करोड़ रुपए की लागत से 6 महीने तक ब्रिज का रेनोवेशन हुआ था। गुजराती नव वर्ष यानी 26 अक्टूबर को ही यह दोबारा खुला था, लेकिन बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के इसे खोला गया। फोरेंस‍िक सूत्र के अनुसार, ब्रिज का पुराना केबल भारी दबाव के कारण टूटा।

एफआईआर में कंपनी का नाम ही नहीं
पुलिस की FIR में न तो पुल को ऑपरेट करके पैसे कमाने वाली ओरेवा कंपनी का जिक्र है, न रेनोवेशन का काम करने वाली देवप्रकाश सॉल्युशन का। पुल की निगरानी के लिए जिम्मेदार मोरबी नगर पालिका के इंजीनियरों का भी नाम इसमें नहीं है। यानी केवल छोटे कर्मचारियों को हादसे का जिम्मेदार ठहराकर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है।