कोरोना में कमाई:अस्पतालों, दवा कंपनियों और डॉक्टरों ने भरा 150 से 300% ज्यादा एडवांस टैक्स

सूरत2 महीने पहलेलेखक: प्रदीप मिश्रा
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एक दवा उत्पादक कंपनी ने पिछले साल 9 करोड़ टैक्स दिया, इस बार 26 करोड़ एडवांस टैक्स भरा। - Dainik Bhaskar
एक दवा उत्पादक कंपनी ने पिछले साल 9 करोड़ टैक्स दिया, इस बार 26 करोड़ एडवांस टैक्स भरा।
  • एडवांस टैक्स देने में दवा उत्पादक-रिसर्च की चार कंपनियां, तीन हॉस्पिटल टॉप-100 में

कोरोना की दूसरी लहर में अस्पताल, दवा बनाने व रिसर्च करने वाली कंपनियां-लैब और डॉक्टरों की खूब कमाई हुई। ऐसे में दवा बनाने वाली एक कंपनी ने पहली लहर की अपेक्षा दूसरी लहर में एडवांड टैक्स के तौर पर 150 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स भरा। जिस डॉक्टर ने कभी एडवांस टैक्स नहीं भरा था उसने 40 लाख एडवांस टैक्स भरा। अस्पताल, डॉक्टर, दवा बनाने वाली कंपनियां व लैब पहली लहर की अपेक्षा दूसरी लहर में 44 प्रतिशत ज्यादा एडवांस टैक्स चुकाया।

एडवांस टैक्स देने वाले टॉप-100 में दवा बनाने वाली और रिसर्च से जुड़ी चार कंपनियां, तीन हॉस्पिटल, एक लैब और एक डॉक्टर शामिल हैं। इन सबने मिलकर 2021-22 के अप्रैल से जून तक की तिमाही में लगभग 198.97 करोड़ रुपए एडवांस टैक्स दिया, जबकि 2020-21 की पहली तिमाही में इन्होंने 131.22 करोड़ रुपए एडवांस टैक्स चुकाया था। वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में 1250 करोड़ रुपए एडवांस टैक्स के रूप में जमा हुए।

आयकर विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार 2020 में अप्रैल से जून की अपेक्षा 2021 में अप्रैल से जून के दौरान वडोदरा की एक दवा बनाने वाली कंपनी ने 150 गुना अधिक टैक्स भरा। कंपनी ने बीते साल की पहली तिमाही में लगभग 9 करो़ड़ रुपए एडवांस टैक्स भरा था जो कि इस साल की पहली तिमाही में 26 करोड़ पहुंच गया।

दवा बनाने वाली कंपनी ने 55 लाख की बजाय 1.70 करोड़ व, रिसर्च इंस्टिट्यूट ने 65 लाख की जगह 1.01 करोड़ टैक्स दिया
आयकर विभाग के अनुसार मेडिकल रिसर्च करने वाली एक लेबोरेटरी ने पिछले साल की पहली तिमाही में लगभग 52 करोड़ एडवांस टैक्स भरा था, लेकिन इस साल की इसी अवधि में 64 करोड़ रुपए एडवांस टैक्स भरा। बीमारी और दवाओं पर रिसर्च करने वाले एक इंस्टिट्यूट का एडवांस टैक्स पिछले साल के 65 लाख से बढ़कर इस साल 1.01 करोड़ हो गया। एक मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल ने पिछले साल अप्रैल से जून तक लगभग 4.25 करोड़ का टैक्स भरा था जो इस साल इसी अवधि में 5 करोड़ पर पहुंच गया।
दवा बनाने वाली सूरत की कंपनी ने बीते साल 55 लाख एडवांस टैक्स भरा था जो इस साल 1.70 करोड़ पर पहुंच गया। खटोदरा के एक हॉस्पिटल ने 25 लाख की अपेक्षा 1.05 करोड़ एडवांस टैक्स भरा। अडाजण के एक हॉस्पिटल ने बीते साल एक रुपए भी एडवांस टैक्स नहीं भरा था, लेकिन इस साल की पहली तिमाही में 60 लाख एडवांस टैक्स चुकाया। शहर के कई क्षेत्रों में स्थित लेबोरेटरी ने बीते साल लगभग 17 लाख एडवांस टैक्स चुकाया था और इस साल 45 लाख चुकाया। इसी तरह से एक डॉक्टर ने बीते साल एडवांस टैक्स के तौर पर कुछ नहीं दिया था, लेकिन इस साल 40 लाख रुपए भरे।

सबके काम धंधे बंद थे, पर मेडिकल इंडस्ट्री की कमाई जारी रही
कोरोनाकाल में बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरियां गंवाई, बहुत से लोगों के काम-धंधे बंद थे, लेकिन मेडिकल इंडस्ट्री ने जमकर कमाई की। मेडकिल इंडस्ट्री में इससे पहले शायद ही कभी ऐसी तेजी दिखी हो। कोरोना की दूसरी लहर में हालात ऐसे हो गए थे कि अस्पतालों में बेड की कमी पड़ गई थी। निजी अस्पताल भी लोगों का जमीन पर इलाज किया जा रहा था। सरकारी अस्पतालों में भी बेड़ कम पड़ गई थी।
कोरोना के मरीजों के इलाज में किसी-किसी अस्पताल ने 2 लाख से 50 लाख तक बिल बना दिया था। कई होस्पिटल ने तो मास्क के 400 रुपए तो पीपीई किट के 3000 रुपए तक वसूल लिए। ऑक्सीमीटर और डॉक्टर्स के विजिट के नाम पर भी ज्यादा चार्ज वसूला गया। सीए बिरजू शाह ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर, पहली लहर की अपेक्षा ज्यादा घातक थी। इसके चलते अस्पतालों में मरीजों का लंबा इलाज चला। ऐसे में अस्पतालों की कमाई खूब हुई तो उन्होंने एडवांस टैक्स भी ज्यादा भरा।

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