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  • How Will The Students Study, One Month's Vacation Is Over And The Books Have Not Been Received Yet, Now The Education Department Is Talking About Giving Books By June 18

नया सेशन:कैसे पढ़ेंगे छात्र, एक माह का वैकेशन पूरा हो गया और पुस्तकें अभी तक नहीं मिलीं, अब शिक्षा विभाग 18 जून तक किताबें देने की बात कह रहा

सूरत17 दिन पहले
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  • आज से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र, छात्रों को दिया जाएगा ऑनलाइन एजुकेशन, स्कूल बोले- दो साल से एेसे ही पढ़ रहे
  • टीचिंग-नॉन टीचिंग स्टाफ की 100% उपस्थिति अनिवार्य

आज से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो रहा है। कोरोना की गाइडलाइन को देखते हुए छात्रों को ऑनलाइन एजुकेशन दिया जाएगा। स्कूलों में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की 100 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात तो ये है कि एक माह का वैकेशन खत्म हो गया, पर अभी तक छात्रों को पुस्तकें नहीं मिली हैं।

छात्र पढ़ाई कैसे करेंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है। बता दें, पाठ्यपुस्तक मंडल सरकारी, अर्धसरकारी, अनुदानित माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में छात्रों को पुस्तकें मुफ्त में देती है। आमतौर पर वैकेशन में पुस्तकें स्कूलों में पहुंच जाती हैं। स्कूल खुलने के एक-दो दिन में छात्रों में बांट दी जाती हैं। पिछले तीन साल से स्कूल खुलने के 6 माह बाद भी छात्रों को पुस्तकें नहीं मिल रही हैं।

ऑनलाइन एजुकेशन समझ में न आए तो एप से दोबारा पढ़ सकेंगे

वशिष्ठ विद्यालय के रवि डावरिया ने बताया कि पिछले दो सालों से छात्रों को आॅनलाइन पढ़ा रहे हैं। हालांकि इस दौरान छात्रों की समझ में बहुत कम आ रहा है। हमने एक एप बनाया है। ऑनलाइन एजुकेशन से बच्चों के समझ में न आए तो एप से दोबारा पढ़ सकते हैं।

स्कूल ने कंट्रोल रूम बनाया, शिक्षकों, छात्रों पर रखेंगे नजर

संस्कार भारती विद्यालय के ट्रस्टी जगदीश इटालिया ने बताया कि ऑनलाइन एजुकेशन के दौरान छात्रों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध हो और अनुशासन में रहें, इसलिए हमने कंट्रोल रूम बनाया है। इसमें 10 शिक्षकों की टीम रहेगी, जो उपस्थिति समेत अन्य बातों पर ध्यान देगी। टीम शिक्षकों पर भी नजर रखेगी।

छात्रों को घर बैठे जल्दी पुस्तकें मिल जाएंगी

छात्रों को जल्द ही घर बैठे पुस्तकें मिल जाएंगी। हम लगातार पाठ्यपुस्तक मंडल के संपर्क में हैं। छात्रों को 18 जून तक पुस्तकें मिल जाएंगी। किसी भी छात्र या अभिभावकों को स्कूल में नहीं बुलाया जाएगा। छात्रों को स्कूल में बुलाने की शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। एजुकेशन इंस्पेक्टर समेत टीम स्कूलों की लगातार जांच करेगी।
-एचएच राजगुरु, जिला शिक्षाधिकारी

सरकारी पैसे की बर्बादी, माता-पिता खर्च कर रहे

10वीं, 12वीं बोर्ड समेत अलग-अलग कक्षाओं के छात्र पुस्तकें दुकान से खरीद लेते हैं, तब स्कूल में पहुंचती है। इस स्थिति से सरकारी पैसे की बर्बादी होती है और माता-पिता को भी नुकसान होता है। पाठ्यपुस्तक ने अनुरोध है कि ऐसी व्यवस्था करें, ताकि छात्रों को एक सप्ताह में पुस्तकें मिल जाए।
-उमेश पांचाल, अभिभावक मंडल

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