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भास्कर एक्सक्लूसिव:प्लांट, जहां होता है सांस का उत्पादन, कोरोना के दौर में देश के 800 कोविड-अस्पतालों में यहीं से भेजी गई थी ऑक्सीजन

वडोदरा18 दिन पहलेलेखक: मृगांक पटेल
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गुजरात के हालोल शहर के पास स्थित आइनॉक्स प्लांट। - Dainik Bhaskar
गुजरात के हालोल शहर के पास स्थित आइनॉक्स प्लांट।
  • स्वस्थ व्यक्ति प्रति मिनट 18 बार सांस लेने में करीब 400 से 600 एमएल ऑक्सीजन लेता है
  • वहीं, कोरोना से संक्रमित मरीज को एक सांस में लगभग 150 से 300 एमएल ऑक्सीजन लेने की जरूरत होती है

ऑक्सीजन हमारी सांसों के लिए कितना महत्व रखती है ये कौन नहीं जानता। वैसे तो हमारे जीवन के लिए कुदरत ने हमें यह चीज मुफ्त में दे रखी है, लेकिन कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जब हमें कृत्रिम ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। कुछ ऐसा ही कोरोना काल में भी हुआ, जब अस्पताल मरीजों से भरे पड़े थे और मरीजों को इसकी सख्त जरूरत थी।

इसी सिलसिले में आज हम आपको गुजरात के हालोल शहर में स्थित ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाली आइनॉक्स कंपनी के प्लांट के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां से कोरोना काल में गुजरात ही नहीं, बल्कि देश के 800 से ज्यादा बड़े अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई की गई। लाखों मरीजों की जान बचाने वाले कोरोना वॉरियर्स में प्लांट के ये कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्होंने देश में ऑक्सीजन की कमी न होने देने के लिए रात-दिन एक कर दिए थे।

रोजाना 3300 टन ऑक्सीजन का उत्पादन किया
कोरोना काल में देश भर के कोविड अस्पतालों के खपत की 60% ऑक्सीजन आइनॉक्स प्लांट से ही सप्लाई की गई। इसके लिए कंपनी के देश भर में स्थित 44 ऑपरेटिंग लोकेशन के 1200 से अधिक कर्मचारियों ने दिन-रात एक कर रोजाना 3300 टन ऑक्सीजन का उत्पादन किया और देश भर के 800 से ज्यादा कोविड-अस्पतालों को सप्लाई की। ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए 500 ट्रांसपोर्ट टेंकर्स की मदद ली गई। देश के इतिहास में यह पहला ही मौका था, जब 100 से अधिक जंबो टैंक बनाकर देश के बड़े शहरों के अस्पतालों तक ऑक्सीजन पहुंचाई गई।

कंप्रेशर, जो हवा से प्रति घंटे 215 घन मीटन ऑक्सीजन खींचता है।
कंप्रेशर, जो हवा से प्रति घंटे 215 घन मीटन ऑक्सीजन खींचता है।

हवा से कुदरती ऑक्सीजन लेकर कृत्रिम ऑक्सीजन तैयार करती हैं यूनिट
ऑक्सीजन प्लांट के 4 मुख्य कंपोनेंट होते हैं। सबसे पहले कंप्रेशर यूनिट हवा में से ऑक्सीजन खींचता है और इसके बाद प्यूरीफिकेशन यूनिट हवा में से ली गई ऑक्सीजन को शुद्ध करती है। यह शुद्ध ऑक्सीजन
सेपरेशन कॉलम में एकत्रित की जाती है और इसके बाद हवा के रूप में भरने के लिए इसे रिफिलिंग सेक्शन में ले जाया जाता है, जहां से ऑक्सीजन सिलेंडरों में भरी जाती है।

कंप्रेशर हवा से प्रति घंटे 215 घन मीटर ऑक्सीजन खींचता है
यूनिट एक घंटे में हवा से 215 घन मीटर ऑक्सीजन खींचती है। इस यूनिट की लंबाई लगभग 50 फीट है। यूनिट के मुख्य हिस्से मोटर और पिस्टन होते हैं, जो लगातार धड़कते रहते हैं और हवा से लगातार
ऑक्सीजन खींचते रहते हैं।

प्यूरिफिकेशन यूनिट, जिसमें हवा से खींची गई ऑक्सीजन शुद्ध की जाती है।
प्यूरिफिकेशन यूनिट, जिसमें हवा से खींची गई ऑक्सीजन शुद्ध की जाती है।

प्यूरिफिकेशन का काम
प्यूरिफिकेशन यूनिट में हवा से खींची गई ऑक्सीजन को शुद्ध किया जाता है। इससे माइक्रो लेवल पर धूल व अन्य अशुद्धियां दूर की जाती हैं। प्यूरिफिकेशन यूनिट के पिछले हिस्से में ड्रेन पाइप होता है, जिसके द्वारा अशुद्ध हवा बाहर निकाल दी जाती है।

रिफिलिंग सेक्शन, जहां से ऑक्सीजन सिलेंडरों में भरी जाती है।
रिफिलिंग सेक्शन, जहां से ऑक्सीजन सिलेंडरों में भरी जाती है।

30 फुट के टैंक में संग्रहित की जाती है ऑक्सीजन तैयार तरल ऑक्सीजन 30 फीट ऊंचे टैंक में एकत्रित की जाती है, जिसे बीकर में निकाला जाता है। इसके बाद इसे रिफिलिंग सेक्शन में ले जाता है और फिर ऑक्सीजन 25 किलो के सिलेंडरों में भरी जाती है।

एक्सपर्ट व्यू - नरेंद्र रावल, सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट
एक स्वस्थ व्यक्ति प्रति मिनट 18 बार सांस लेता है। यानी की एक सांस में लगभग 400 से 600 एमएल ऑक्सीजन लेता है। वहीं, कोरोना मरीज एक सांस में लगभग 150 से 300 एमएल ऑक्सीजन लेता है।जब हम सांस लेते हैं तो इसमें से 20 फीसदी ऑक्सीजन सीधे फेफड़ों में जाती है और जब हम सांस छोड़ते हैं तो इसमें 15 प्रतिशत ऑक्सीजन और 5 प्रतिशन कार्बन-डाइऑक्साइड बाहर निकलती है।

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