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भास्कर इन्वेस्टिगेशन:जामताड़ा का नया जाल; ठगी के पैसे से जमा हो रहा आपका बिजली बिल, गुजरात में 200 शिकार

सूरत14 दिन पहलेलेखक: दुर्गेश तिवारी
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बिजली बिल कलेक्शन सेंटर से मिलती है उपभोक्ताओं की जानकारी। - Dainik Bhaskar
बिजली बिल कलेक्शन सेंटर से मिलती है उपभोक्ताओं की जानकारी।
  • एक ही बिजली कंपनी के ग्राहक निशाने पर, कई ग्राहक सेवा केंद्र भी ठगों के साथ मिले हुए
  • बिजली बिल कलेक्शन सेंटर से मिलती है उपभोक्ताओं की जानकारी

ऑनलाइन ठगी के लिए बदनाम झारखंड के जामताड़ा गांव के निशाने पर गुजरात है। अब ठगी का नया तरीका निकाल लिया है। बिजली का बिल जमा कराने के लिए दी गई नकदी को अपनी जेब में रखकर ठगी के जरिए आए पैसों से वह बिल भरा जा रहा है। ऐसे दो-चार नहीं गुजरात में 200 मामले सामने आ चुके हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि सभी शिकार एक ही बैंक के हैं। केवल सूरत में ही पांच दिन के भीतर ऐसे चार केस सामने आ चुके हैं।

चारों ही केसों में ठगों ने आरबीएल बैंक के ग्राहकों को निशाना बनाया और टोरेंट कम्पनी के बिजली के बिल जमा कराए। पुलिस के राडार पर कलेक्शन सेंटर के वे एजेंट भी है, जो टेलीफोन, बिजली और अन्य यूटीलिटी बिल जमा करते हैं। पुलिस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस ठगी की जड़ें पश्चिम बंगाल और झारखंड से जुड़ी हुई हैं। बिजली बिल जमा कराने वाला यह गिरोह केवल सूरत में नहीं, बल्कि पूरे गुजरात में एक्टिव है।

गिरोह गुजरात, पंजाब और महाराष्ट्र में भी सक्रिय

पुलिस के मुताबिक गिरोह पश्चिम बंगाल और झारखंड में एक्टिव है। 40 से ज्यादा वारदात पंजाब में की है। महाराष्ट्र के नासिक तथा पुणे में भी ऐसी वारदात सामने आई हैं। पुलिस का मानना है कि सूरत में इस प्रकार की ठगी के 50 से अधिक केस हो सकते हैं।

आप फंस सकते हैं ऑनलाइन ठगी के कानूनी शिकंजे में

किसी के खाते से ऑनलाइन ठगी हुई हो तो हो सकता है उस पैसे से आपके बिजली का बिल जमा हुआ हो। ऐसे में ठगी की जांच के समय आप भी कानूनी शिकंजे में फंस सकते हैं।

इसलिए यह तरीका अपनाया

ठगी के इस नए पैटर्न से अपराधियों को लगता है कि वे सेफ रहेंगे, क्योंकि वे अपने अकाउंट में डायरेक्ट कोई ट्रांजेक्शन नहीं करते हैं। जिसका बिजली का बिल जमा होता है, उसे भी पता नहीं होता है। बिजली उपभोक्ता कलेक्शन सेंटर पर बिल और राशि देता है। पुलिस पहले बिजली उपभोक्ता और फिर कलेक्शन सेंटर तक ही पहुंच पाती है। असली अपराधी पहुंच से दूर होता है।

मिलीभगत के बिना ऐसी वारदात संभव नहीं

पुलिस की प्रारम्भिक जांच में पता चला है कि बैंक और बिजली कम्पनी के ग्राहकों की जानकारी लीक हुए बिना यह ठगी नहीं हो सकती है। शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित निजी बिजली कम्पनी के कलेक्शन सेंटर से ग्राहकों की जानकारी लीक होने की पूरी आशंका है। कई ऐसे लोग हैं, जो आज भी खुद बिजली का बिल नहीं भर पाते हैं।

वे लोग कलेक्शन सेंटर पर बिल तथा राशि दे देते हैं। इसके बाद कलेक्शन सेंटर के कर्मचारी उस राशि का उपयोग अपने निजी काम के लिए कर लेते हैं। फिर पश्चिम बंगाल तथा झारखंड में फैले ठग गिरोह की मदद से बैंक कर्मचारी बन कर झांसा देते हैं और बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड एवं ओटीपी कीजानकारी लेकर ठगी करते हैं।

पुलिस की कार्रवाई से तरीका बदला

ऑनलाइन ठगी प्रकरण में पुलिस केस दर्ज करने के साथ ही आरोपी का बैंक अकाउंट फ्रीज करवा देती है। बैंक अकाउंट में जमा राशि और अकाउंट होल्डर की पहचान के बाद ही अकाउंट फिर से एक्टिव किया जाता है। यही कारण है कि ठगों ने यह नया तरीका अपनाया है। इसमें आरोपी और उसके बैंक अकाउंट की जानकारी नहीं होती है।

वह थर्ड पार्टी को बिल जमा कराता है, जिससे पुलिस सबसे पहले उसके पास ही पहुंचती है। सूरत में ठगी के केस आने के साथ ही पुलिस सक्रिय हो गई और अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। लेकिन पुलिस अभी तक गिरोह तक नहीं पहुंच पाई है। पुलिस अब गिरोह चला रहे बड़े अपराधियों को पकड़ने की कोशिश कर रही है।

ये हैं मामले: बैंक कर्मचारी बनकर फोन किया और ओटीपी मांगा

22 मई कतारगाम में अक्षरधाम अपार्टमेंट निवासी प्रियंका भट्टाचार्य को 16 अप्रैल को आरबीएल बैंक कस्टमर केयर से फोन आया और क्रेडिट कार्ड डिस्पेच करने की बात कह कर ओटीपी भेजा। प्रियंका ने कॉलर की बात पर विश्वास कर ओटीपी नंबर बता दिया। बाद में पता चला कि उसके क्रेडिट कार्ड से टोरेंट पावर और डीजीवीसीएल कम्पनी के दो बिलों का 21,873 रुपए का भुगतान कर दिया गया।

26 मई अमरोली स्थित माधव पार्क सोसायटी के हीरा श्रमिक दीपक धनश्यामभाई भलांई के मोबाइल पर 21 अ0प्रैल को दोपहर 1 बजे अज्ञात नंबर से फोन आया और कॉलर ने खुद को आरबीएल बैंक के क्रेडिट कार्ड डिपार्टमेंट का कर्मचारी बताया। फिर झांसा देकर उससे ओटीपी प्राप्त कर लिया। बाद में पता चला कि दीपक के क्रेडिट कार्ड से टोरेन्ट पावर बिल का 43550 रुपये का बिल जमा किया गया।

26 मई अडाजण स्थित शांतिसागर सोसायटी में जिगर रमेशचंद्र मिस्त्री के मोबाइल पर 5 मई की दोपहर अज्ञात व्यक्ति का फोन आया और उसने अपनी पहचान आरबीएल बैंक के क्रेडिट कार्ड डिपार्टमेंट के कर्मचारी वरुण दीक्षित के तौर पर दी। उसके बाद ठग में जिगर को अपने जाल में फांस कर ओटीपी प्राप्त कर उसके क्रेडिट कार्ड से टोरेन्ट पावर में ऑनलाइन 40 हजार 550 रुपए ट्रांसफर कर दिए।

26 मई डुमस-पिपलोद रोड स्थित मनपा आवास निवासी तुलसीदास कलाकार मिंज को 30 मार्च को अज्ञात महिला का फोन आया और उसने पहचान आरबीएल बैंक के क्रेडिट कार्ड डिपार्टमेंट के कर्मचारी के तौर पर दी। उसके बाद ठग महिला ने पीड़ित को आरबीएल बैंक के क्रेडिट कार्ड में चालु बीमा बंद करने का झांसा देकर ओटीपी प्राप्त किया और टोरेंट पावर का 44590 रुपए का बिल जमा करा दिया।

पिछले दिनों ठगी के जिस प्रकार के मामले सामने आए हैं, वह ठगी का नया तरीका है। इस प्रकार ठगी करने के तरीरके से आरोपी खुद को सेफ मानता है। उसे लगता है कि वह पकड़ में नहीं आ सकता है। वह एक तरफ से बिजली के बिल का कैश पेमेंट लेता है और फथ्र किसी दूसरे व्यक्ति से ऑनलाइन ठगी कर किसी तीसरे व्यक्ति को बिल का बिल जमा करा देता है।

स्नेहल वकीलना, साइबर लॉ एक्सपर्ट

ऑनलाइन फ्रॉड करके बिजली के बिल जमा कराने के मामले की प्रारम्भिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों की जड़ें पश्चिम बंगाल और झारखंड तक फैली हुई है। गिरोह सूरत में अपने लोगों की मदद से बाहर बैठ कर वारदात अंजाम दे रहा है। हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं। जल्द ही इस मामले में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लेंगे।

-बीडी गोहिल,पुलिस इंस्पेक्टर, कतारगाम थाना

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