महिला शक्ति को नमन:पति की दोनों किडनियां खराब, इलाज कराने के साथ घर भी चला रहीं ज्योति

सूरत9 महीने पहले
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ज्योति पवार - Dainik Bhaskar
ज्योति पवार
  • दो ऐसी महिलाओं के संघर्ष और साहस की कहानियां, जिनके पतियों की दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हो चुकी हैं

मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली ज्योति पवार (38) दो साल पहले अपने पति सचिन पवार (38) के साथ सूरत आई थी। अब वह कैलाश नगर में रहती हैं। सचिन मेहनत मजदूरी कर परिवार चला रहा था। इसी बीच उसे पथरी की समस्या हो गई। इलाज के लिए सिविल अस्पताल गया तो डॉक्टरों ने ऑपरेशन कराने की सलाह दी।

ऑपरेशन हुआ, लेकिन देखभाल के अभाव में इंफेक्शन हो गया। इससे सचिन की एक किडनी खराब हो गई। अहमदाबाद में किडनी निकाल दी गई। छह माह पहले उसकी दूसरी किडनी भी निकाल दी गई। अब सचिन पर डायलिसिस पर जिंदा है।

ज्योति हफ्ते में दो बार पति का डायलिसिस करवा रही हैं...
सचिन का हफ्ते में दो से तीन बार डायलिसिस हो रहा है। मां कार्ड बन गया था, जिससे डायलिसिस तो हो जाता है, लेकिन घर का खर्च चलाना मुश्किल है। ज्योति अपने पति की देखभाल के साथ चार साल की बेटी का भी खयाल रख रही है। उसने हिम्मत नहीं हारी और अब वह लहंगा-चुनरी, दुपट्टा और साड़ियों में कढ़ाई आदि का काम कर घर चला रही है।

पति को इलाज के लिए राजस्थान से ले आईं अरुणा, जाॅब वर्क से चला रहीं घर

मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली 38 वर्षीय अरुणा अपने पति को इलाज के लिए सूरत लेकर चली आई हैं। अब जाॅब वर्क कर पति का डायलिसिस भी करवा रही हैं और दो बेटियों और एक बेटे का खर्च भी उठा रही हैं। अरुणा के पति 42 वर्षीय वागाराम रावल की दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। उन्हें किडनी की समस्या तीन साल पहले शुरू हुई थी।

वह पहले बेंगलुरू में रहते थे और वहीं कारोबार करते थे। स्वास्थ्य खराब हुअा तो वह वापस राजस्थान अपने गांव आ गए। डाॅक्टरों को दिखाया तो पता चला कि दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। चार महीने पहले सेवा अस्पताल से संपर्क हुआ तो अरुणा वागाराम, दो बेटियों और एक बेटे को लेकर सूरत आ गई। वह एक धर्मशाला में रहती हैं। लैस-पट्टी का काम कर पति का इलाज के साथ घर का खर्च भी चला रही हैं।

दोनों महिलाओं की मदद कर रहा अस्पताल
सचिन और वागाराम के इलाज में सेवा अस्पताल मदद कर रहा है। अस्पताल के सुभाष रावल ने बताया कि सिविल और स्मीमेर जैसे सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस कराने के लिए पहले फिस्चुला का ऑपरेशन नहीं होता। निजी अस्पताल इसके लिए 20 से 25 हजार रुपए लेते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने फिस्चुला का ऑपरेशन सस्ती दर पर करते हैं।

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