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कोरोना क्राइसिस:महाराष्ट्र से सूरत पर कोविड अटैक, सिविल में ही महाराष्ट्र के 300 कोरोना मरीज भर्ती; 24 घंटे में 150 और आए

सूरत16 दिन पहले
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सिविल के कोविड अस्पताल में भी हालात बेकाबू हो रहे हैं। यहां स्टाफ की कमी का सामना करना पड़ रहा है। - Dainik Bhaskar
सिविल के कोविड अस्पताल में भी हालात बेकाबू हो रहे हैं। यहां स्टाफ की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
  • सभी 560 वेंटिलेटर फुल }रेमडेसिवीर खत्म }स्मीमेर-निजी अस्पताल गंभीर मरीजों से फुल
  • चिंता: अस्पतालों में 2000 से अधिक गंभीर मरीज भर्ती

देश में सबसे ज्यादा कोरोना मरीजों वाले महाराष्ट्र ने सूरत की सेहत भी बिगाड़ दी है। महाराष्ट्र के नंदुरबार, धुलिया जैसे जिलों से रोज कोरोना के 20 से 50 मरीज सूरत आ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में महाराष्ट्र से 150 से अधिक गंभीर मरीज सूरत के अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। सिविल अस्पताल में भर्ती 900 मरीजों में 300 से अधिक महाराष्ट्र से आए हुए मरीज हैं।

कोरोना के बढ़ते गंभीर मरीजों की वजह से अस्पतालों में वेंटिलेटर, स्टाफ, दवाइयों की कमी हो गई है। अब रोज 700 मरीज आ रहे हैं। इनमें 200 से 300 गंभीर मरीज आ रहे हैं। सूरत में हर न 50 गंभीर मरीज को एडमिट का इलाज लेने का इंतजाम हो सकता है पर इतने मरीज आने से हालात बिगड़ गए हैं। शहर में सभी 560 वेंटिलेटर फूल हो गए हैं।

अभी शहर के अस्पतालों में 2000 से अधिक गंभीर मरीज हैं। सिविल में 665 और 549 गंभीर मरीजों का इलाज चल रहा है। ये सभी गंभीर मरीज ऑक्सीजन, बाइपेप और वेंटिलेटर वाले हैं। सिविल अस्पताल में 140 वेंटिलेटर की मांग की गई है। इसमें 40 स्मीमेर अस्पताल से आ गए हैं। पर उनके कुछ पार्ट अभी आने बाकी हैं। उनके आ जाने के बाद ही वेंटिलेटर शुरू हो पाएंगे। इसके अलावा 100 वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई है, जिसे किडनी अस्पताल में रखा जाएगा।

सिविल अस्पताल में महज एक या दो दिन के भीतर किडनी अस्पताल में 200 बेड शुरू कर दिए जाएंगे। इनमें 100 वेंटिलेटर होंगे। इसके अलावा पुरानी इमारत में 500 बेड का इंतजाम हो चुका है, जिन पर ऑक्सीजन की सुविधा होगी। यहां पर भी करीब 40 वेंटिलेटर का इंतजाम हो गया है।

किडनी अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए 13 हजार लीटर का नया ऑक्सीजन टैंक लगाया जाएगा। अभी सिविल अस्पताल में 23.4 हजार लीटर ऑक्सीजन की खपत हो रही है। जबकि कोविड अस्पताल में 260 वेंटिलेटर का इस्तेमाल हो रहा है। अस्पताल में कुल 306 वेंटिलेटर हैं। 100 की मांग की है।

अभाव: खत्म हुआ रेमडेसिवीर इंजेक्शन

गंभीर हालत में अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को तुरंत रेमडेसिवीर का डोज से देने से स्वास्थ्य में सुधार होता है। मरीजों की संख्या बढ़ने से रेमडेसिवीर की खपत बढ़ गई है। ऐसे में पूरे शहर में रेमडेसिवीर की कमी हो गई है। सिविल और स्मीमेर अस्पताल ने निजी अस्पतालों को यह इंजेक्शन देने से मना कर दिया है। अकेले सिविल अस्पताल में हर दिन रेमडेसिवीर के 600 डोज की खपत हो रही है।

जरूरत: सिविल में 1000 स्टाफ चाहिए

अस्पतालों में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, आईसीयू, स्टाफ की कमी हो गई है। निजी अस्पतालों में कोरोना के गंभीर मरीजों को भर्ती करने की क्षमता खत्म हो गई है। क्षमता से 4 गुना अधिक गंभीर मरीज हो गए हैं। सिविल अस्पताल में शुरू होने वाले अन्य 700 बेड के लिए और स्टाफ की जरूरत है। इसमें 50 डेटा ऑपरेटर, 6 बाओ मेडिकल इंजीनियर, 10 टेक्निकल सुपर वाइजर, 12 ऑक्सीजन ऑपरेटर, 18 लैब टेक्नीशियन, 540 वर्ग चार के कर्मचारी, 12 एसीजी टेक्नीशियन, 10 फार्मासिस्ट, 240 नर्स और 5 ड्राइवर आदि की जरूरत है।

नंदुरबार: सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं, तो यहां आ गए

64 वर्षीय डोंगर रूपचंद्र तावड़े नंदुरबार के रहने वाले हैं। वह 10 दिन से सिविल में भर्ती हैं। उनके परिजनों ने बताया कि नंदुरबार के सरकारी अस्पतालों की हालत खराब है। वहां मरीज बाहर ही पड़े हैं। निजी अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया था। हमें कोई रास्ता नहीं सूझा तो सूरत आ गए। तावड़े के बेटे ने बताया कि यहां डॉक्टर तुरंत इलाज दे रहे हैं। महाराष्ट्र से रोज 50 मरीज आ रहे हैं।

जलगांव: हालत खराब थी परिजन ने सूरत बुला लिया

जलगांव निवासी 47 वर्षीय सोभाबेन अशोक भाई चौहान बीमार होने के बाद जलगांव के निजी अस्पताल में तीन दिन तक वेंटिलेटर पर रहे। इस बीच एक लाख रुपए का बिल बन गया आर्थिक परिस्थिति काफी कमजोर होने के कारण उन्हें सरकारी अस्पताल ले गए, लेकिन वहां जगह नहीं थी। तब सूरत में रह रहे अपने परिजन की सलाह पर वह यहां आ गए। अब सूरत के सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है।

नंदुरबार: वहां बेड ही खाली नहीं था तो यहां लेकर चले आए

नंदुरबार निवासी 66 वर्षीय आशाराम माली 24 मार्च से सिविल अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी हालत नाजुक है। परिजनों ने बताया कि निजी अस्पताल में एक ही दिन में 80 हजार रुपए का बिल बन गया था। पैसे नहीं होने पर आगे का इलाज करने से मना कर दिया। सरकारी अस्पताल ले गए तो दो घंटे लाइन में खड़े रहे। बाद में बताया गया कि बेड खाली नहीं है। उसके बाद आशा को सूरत लेकर चले आए।

धुलिया: कोरोना के मरीजों को तो देख तक नहीं रहे

धुलिया निवासी 61 वर्षीय रविंद्र बदाने पिछले 18 दिन से सिविल अस्पताल में भर्ती हैं। परिवार के कुछ लोग सूरत में रहते हैं। धुलिया के अस्पतालों की हालत खराब है। परिजनों ने उन्हें सूरत बुला लिया और सिविल में भर्ती कर दिया। परिजनों का कहना है कि यहां अपने परिवार के सदस्य भी हैं और अस्पताल में अच्छा इलाज भी मिल रहा है हमारे यहां मरीजों को देख तक नहीं रहे।

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