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कपड़ा व्यापार:तमिलनाडु और कर्नाटक में लॉकडाउन से आड़ी के सीजन पर भी संकट, 500 करोड़ का कारोबार ठप

सूरतएक महीने पहले
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  • एक के बाद एक सीजन ठप होने से व्यापारियों काे हजारों करोड़ का नुकसान
  • दक्षिण के प्रदेशों में अभी भी लॉकडाउन, छूट न होने से वहां के बाजार बंद हैं

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण लगे लॉकडाउन ने एक बार फिर से कपड़ा कारोबार पर गहरा असर डाला है। बीते अप्रैल व मई महीने में शादियों व रमजान जैसे खरीदारी के सीजन के दौरान लॉकडाउन होने के कारण कपड़ा व्यापारियों को बड़ा नुकसान हुआ है। व्यापारियों को उम्मीद थी जून व जुलाई में आने वाले सीजन में उनका व्यापार दोबारा से शुरू होगा।

अप्रैल से जून तक कई सीजन कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन की भेट चढ़ गया है। जिसके कारण सूरत के कपड़ा उद्योग को हजारों करोड़ का नुकसान हो चुका है। सूरत में कपड़ा व्यापारियों के लिए अप्रैल से अब तक का महीना काफी महत्वपूर्ण था। कपड़ा कारोबार में एक के बाद एक कई सीजन चौपट हो रहे है। 500 करोड़ के रमजान के सीजन में मुश्किल से 100 करोड़ का कारोबार हुआ था।

उसके बाद दक्षिण के प्रदेशों में आड़ी के सीजन में भी व्यापारियों को निराश किया है। साउथ में आड़ी का सीजन जून से जुलाई तक दो महीने तक चलता है। जिसका कपड़ा सूरत से 15 जून तक जाता है। पर इस बार इन दक्षिण के प्रदेशों में 21 जून तक लंबा लॉकडाउन होने के कारण 500 करोड़ के इस सीजन ने भी दम तोड़ दिया।

आड़ी (सेल) का सीजन तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में होती है। तमिलनाडु और कर्नाटक में लॉकडाउन होने के कारण वहां की मंडी बंद है। सूरत का बाजार खुलने के चार सप्ताह के बाद भी कारोबार करने में व्यापारियों को काफी परेशानी हो रही है।

अप्रैल से ही व्यापार बंद हो गया था, शादियों और रमजान का सीजन भी फीका रहा

आंशिक लॉकडाउन खुलने के बाद व्यापारियों को साड़ी और ड्रेस मटेरियल दोनों ही सेग्मेंट में तमाम राज्यों से अच्छा व्यापार होने की उम्मीद थी। लेकिन कई राज्यों में लंबा लॉकडाउन होने के कारण वहां के बाजार बंद अब भी बंद है, पे- ऑर्डर कैंसल हो रहे है।

अप्रैल में तो सूरत का भी व्यापार बंद हो गया है, जिन लोगों ने शादियों और रमजान के चलते करोड़ों रुपए के ऑर्डर दे रखे थे, उन्होंने भी अपने ऑर्डर रद्द करा दिए। ऐसे में सूरत के व्यापारी जिन्होंने सीजन को देखते हुए बड़े पैमाने व्यापार होने की उम्मीद थी उनको झटका लगा है।

2 साल से कोरोना के कारण आड़ी का पूरा सीजन फेल

कपड़ा व्यापारी रंगनाथ शारडा ने बताया कि साउथ के अधिकतर व्यापारी आड़ी सीजन का माल खरीदने सूरत आते है। हालांकि जीएसटी लागू होने के बाद से लगातार आड़ी की सीजन चौपट होते जा रही है। पिछले 2 साल से तो कोरोना के कारण पूरा सीजन फेल होता जा रहा है।

ओणम, रक्षाबंधन का सीजन भी फीका रहने की आशंका

कपड़ा व्यापारी दिनेश कटारिया ने बताया कि ओणम की सीजन भी खास नहीं है। उसके बाद रक्षाबंधन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर लगता है कि रक्षाबंधन की सीजन भी डाउन रहेगा। ऐसे में अब व्यापारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

अब नए डिजाइन के कपड़े तैयार करने पर व्यापारियों की नजर

विशेषज्ञ जुलाई माह से अच्छे कारोबार की उम्मीद बता रहे है। कुछ व्यापारी सीजन को लेकर नए डिजाइन व क्रिएशन पर ध्यान दे रहे है। वर्तमान में सभी व्यापारी परेशान है। छोटे व्यापारी सुस्त कारोबार को लेकर चिंतित है।

सस्ती साड़ियों की डिमांड अधिक

साउथ में आड़ी का मतलब सेल होता है। जून जुलाई सेल का सीजन होता है। आड़ी के सेल में 200 से लेकर 350 की साड़ी अधिक बिकती है। इसके अलावा डिफेक्टिव, पुराने फैशन की साड़ी भी आड़ी में बिक जाती है। सूरत में इस तरह की साड़ी का बड़ा जत्था रहता है। जो जून जुलाई में क्लियर हो जाता है।

पेमेंट की समस्या बनी हुई है

इन दिनों पुराने पेमेंट को लेकर व्यापारी चिंतित है। विशेष तौर पर साउथ की मंडी से जुड़े व्यापारी परेशान है, क्योंकि यहां की मंडी अभी तक पूरी तरह से नहीं खुल पाई है। काफी व्यापारी के 6 माह पुराना पेमेंट भी नहीं मिल पाया हैं। बाजार खुलने के चार सप्ताह के बाद भी कारोबार करने में काफी परेशानी हो रही है।

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