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महामहिम मंगूभाई:रत्न कलाकार से राज्यपाल तक का मंगूभाई पटेल का सफर रहा बेदाग, पद की घोषणा होते ही छलक पड़े खुशी के आंसू

नवसारी3 महीने पहले
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने मंगूभाई पटेल। - Dainik Bhaskar
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने मंगूभाई पटेल।

नवसारी जिला भाजपा के शुरुआत के कार्यकर्ताओं में से एक और पूर्व वन मंत्री मंगूभाई पटेल को मध्यप्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। इससे मंगूभाई के परिवार समेत गुजरात के नवसारी शहर में खुशी की लहर है। मंगूभाई एक साधारण परिवार से हैं और जवानी के दिनों में रत्न कलाकार थे। इसी दौरान वे भाजपा से जुड़े और अपने 27 साल के लंबे राजनीतिक करियर के बीच हमेशा बेदाग रहे।

मंगूभाई पटेल ने 1990 में विधायक का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी।
मंगूभाई पटेल ने 1990 में विधायक का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी।

जिंदगी का पहला चुनाव हारे, फिर मुड़कर नहीं देखा
मंगूभाई की पढ़ाई सिर्फ 8वीं क्लास तक ही हुई। इसके बाद परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्होंने पढ़ाई छोड़कर रत्न कलाकार के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। इसके बाद भाजपा पार्टी से जुड़े और उन्होंने पार्षद का चुनाव लड़ा। हालांकि, वे चुनाव हार गए थे, लेकिन इसके बाद भी वे राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय रहे।

इसके बाद उन्होंने भाजपा के टिकट पर
नवसारी नगर पालिका के सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले मंगूभाई पटेल ने 1990 में विधायक का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 1995, 1995 से 1997, 1998 से 2002, 2002 से 2007, 2002 से 2012 और 2012 से 2017 तक विधायक चुने गए। वे नवसारी से 5 बार और गणदेवी से एक बार विधायक रहे।

2002 से 2012 तक नरेंद्र मोदी सरकार में वन और पर्यावरण मंत्री रहे।
2002 से 2012 तक नरेंद्र मोदी सरकार में वन और पर्यावरण मंत्री रहे।

उम्र ज्यादा होने के चलते भाजपा ने 2017 में टिकट नहीं दिया था
केशुभाई सरकार के दौरान मंगूभाई पटेल 1998 से 2002 तक राज्य मंत्री भी रहे। इसके बाद 2002 से 2012 तक नरेंद्र मोदी सरकार में वन और पर्यावरण मंत्री रहे। लगातार 10 वर्षों तक वन और पर्यावरण मंत्री रहने के बाद, उन्हें 2013 में गुजरात विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद आनंदीबहन पटेल की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।

हालांकि, 2016 में जब रूपाणी मुख्यमंत्री बने तब उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया था। वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट भी नहीं दिया गया था। जबकि वे मोदी के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में वे लगातार दो बार यानी 10 साल तक मंत्री रह चुके हैं। अधिक उम्र होने के चलते 2017 में उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया था। तबसे वे नवसारी स्थित अपने घर पर ही रह रहे थे।

मंगूभाई ने राज्य सरकार में 18 वर्षों तक मंत्री के रूप में कार्य किया, पहले राज्य मंत्री के रूप में और फिर कैबिनेट मंत्री के रूप में। गुजरात उनके करियर को हमेशा याद रखेगा, खासकर एक आदिवासी नेता और गुजरात के पूर्व वन मंत्री के रूप में।

वनमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ किया
मंगूभाई ने वनमंत्री के रूप में वनबंधु कल्याण योजना और सिकल सेल-एनीमिया के उन्मूलन के लिए सराहनीय काम किया। वनबंधु योजना, जो गुजरात मॉडल में आदिवासियों के उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण योजना साबित हुई, मंगूभाई के दिमाग की उपज थी। आदिवासियों के लिए एक लाभकारी योजना साबित हुई है। इसके अलावा उन्होंने एनीमिया को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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