हुनर-हाट:महिला सशक्तिकरण की कई तस्वीरें प्रत्येक में जिंदगी-खुशहाली के कई रंग

सूरतएक महीने पहले
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  • केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से वनिता विश्राम ग्राउंड में आयोजन

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से गरीबों के हुनर को नया आयाम देने के लिए रिंग रोड पर स्थित वनिता विश्राम ग्राउंड में हुनर-हाट का आयोजन किया गया है। जिसमें शहरवासी भारी संख्या में उमड़ रहे हैं। ग्रामीणों के हाथों से बनाए गए कलात्मक सामानों की खरीदी भी कर रहे हैं। इससे गांवों में रहने वाले गरीबों को भी रोजगार मिल रहा है।

सूरत के हुनर-हाट में महिला सशक्तिकरण की कई तस्वीरें हैं और हर तस्वीर में जिंदगी और खुशहाली के कई रंग हैं। बता दें, वनिता विश्राम में 34वां हुनर-हाट लगा हुआ है। इसका आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी की निगरानी में हो रहा है। हुनर-हाट में देश के कोने-कोने से आए क्राफ्ट और क्यूजीन के 300 स्टॉल लगाए गए हैं।

इसके अलावा रोजाना सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। सर्कस का हैरतअंगेज़ खास शो भी होता है। “आत्मनिर्भर भारत” और “वोकल फॉर लोकल” अभियान को बढ़ावा देने में हुनर-हाट की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इसके तहत दस्तकारों और शिल्पकारों की कला को सम्मान और कलाकारों को पहचान देने की कोशिश की जा रही है। इसका मकसद उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थित को बेहतर बनाना है।

झारखंड की अहिल्या देवी खेतों में मजदूरी करती थीं, अब अपना सामान बेच रही हैं

केस-1 झारखंड के छोटे से गांव पतरातू की रहने वाली अहिल्या देवी 100 की दिहाड़ी पर खेतों में मजदूरी करती थी। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय ने हुनर-हाट में स्टॉल दिया तो उन्होंने ने 2 ही दिन में 50 हजार रुपए की कमाई की। सूरत में लगे हुनर-हाट में 70 नंबर का स्टॉल अहिल्या देवी का है। यहां उनका सामान खत्म होने लगा है। वे बांस से बेंत का सामान बनाकर लाई थी। उनकी भाभी संगीता देवी उनका हाथ बंटाती हैं। अहिल्या देवी के पति गांव में ही लगने वाली बाजार में दुकान लगाते हैं। घर में बुजुर्ग सास-ससुर और दो बच्चे हैं। कठिन हालात में जीवन बसर करने वाली अहिल्या देवी अब प्रधानमंत्री मोदी का बार-बार आभार जता रही हैं।

महाराष्ट्र के ठाणे की शालिनी साहू कागज और क्ले से सामान बनाती हैं

केस-2 महाराष्ट्र के ठाणे निवासी शालिनी हुनर-हाट में कागज और क्ले से बने छोटे-छोटे आइटम बेच रही हैं। वह दैनिक इस्तेमाल से लेकर साज-सज्जा के उत्पादों को बनाने का काम पिछले 5 साल से कर रही हैं। शालिनी 5 कारीगरों के साथ सामान बनाती हैं और उनके पति इसे बाजार में बेचते हैं। उन्हें पहली बार हुनर-हाट में मौका दिया गया है। सूरत में अच्छी आमदनी होने से शालिनी साहू बहुत खुश और उत्साहित हैं।

कर्नाटक की एच. बीबी जान 40 सालों से लकड़ी के खिलाैने बेच रहीं

केस-3 कर्नाटक के चानापट्टना से आईं एच.बीबी जान पिछले 40 सालों से अपने परिवार के साथ लकड़ी के खिलौने बनाने का काम करती हैं। उन्हें तीसरी बार हुनर-हाट में स्टॉल मिला है। स्टॉल नं. 60 पर बेटे के. तबारकुल्लाह के साथ खिलौने बेच रही हैं। हुनर-हाट में मौके देने के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि सरकार ने उन पर बहुत उपकार किया है।

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