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कोरोना के साथ तेजी से बढ़ रहा नया खतरा:म्यूकोरमाइकोसिस में आंख, नाक और दांत में हो रहा इंफेक्शन, सीधे दिमाग पर हो रहा असर

अहमदाबाद2 महीने पहलेलेखक: अनिरुद्ध मकवाणा
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म्यूकोरमाइकोसिस से आंखों की रोशनी या जान भी सकती है। तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, इसलिए हम इन्हें स्पष्ट रूप से नहीं दिखा रहे हैं। - Dainik Bhaskar
म्यूकोरमाइकोसिस से आंखों की रोशनी या जान भी सकती है। तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, इसलिए हम इन्हें स्पष्ट रूप से नहीं दिखा रहे हैं।

कोरोना की दूसरी लहर के बीच जहां रोजाना हजारों लोगों की जाने जा रही हैं। वहीं, अब खतरनाक बीमारी म्यूकोरमाइकोसिस के नए मामलों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। अहमदाबाद सिविल अस्पताल में अब तक इसके 80 मामले सामने आ चुकें हैं, जिनमें से 9 की मौत हो चुकी है और 3 मरीजों के आंखों की रोशनी जा चुकी है।

डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा खतरा
अहमदाबाद सिविल डेंटल कॉलेज के डीन गिरीश परमार के बताए अनुसार, म्यूकोरमाइकोसिस जैसे खतरनाक रोग का सबसे ज्यादा खतरा डायबिटीज के उन मरीजों को है, जिन्होंने कोरोना में स्टेरॉइड लिया है। सिविल अस्पताल में उपचार करा रहे 80 में 60 मरीज ऐसे ही हैं।

इसका इंफेक्शन इतना खतरनाक होता है कि मजबूत दांतों को भी कुछ दिनों में कमजोर कर देता है।
इसका इंफेक्शन इतना खतरनाक होता है कि मजबूत दांतों को भी कुछ दिनों में कमजोर कर देता है।

मजबूत दांतो को भी हिला देता है फंगल इंफेक्शन
डॉ़. गिरीश बताते हैं कि इस बीमारी में आंख, कान और दांत में इंफेक्शन होने लगता है। चेहरे पर सूजन आने लगती है। धीरे-धीरे इसका असर मस्तिष्क पर होने लगता है। फंगल इंफेक्शन इतना खतरनाक होता है कि मजबूत दांतों को भी कुछ दिनों में कमजोर कर देता है। इससे चेहरे के रंग लाल हो जाता है। वहीं, आंख और नाक के नीचे सूजन आ जाती है, जिससे तेज दर्द होता है।

कोरोना की दूसरी लहर में बढ़े म्यूकोरमाइकोसिस के मामले
डॉ़. गिरीश बताते हैं कि इसके मामले कोरोना की पहली लहर में भी सामने आए थे, लेकिन तब ऐसे मरीजों की संख्या बहुत कम थी। पिछले साल इसके 5-7 मामले ही सामने आए थे और समय पर इलाज मिलने के चलते सभी स्वस्थ भी हो गए थे। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर बहुत खतरनाक है, जो इंसानों के शरीर को बहुत कमजोर कर रही है। इसके चलते म्यूकोरमाइकोसिस के मामले भी बढ़ गए हैं। इस दौरान 22 मरीज तो डेंटल हॉस्पिटल में ही एडमिट हैं। इनमें से 4-5 की सर्जरी भी करनी पड़ी है।

यह आंख की पुतलियों या आसपास का एरिया पैरालाइज्ड कर सकता है।
यह आंख की पुतलियों या आसपास का एरिया पैरालाइज्ड कर सकता है।

नाक से शुरू होता म्यूकोरमाइकोसिस
डायबिटीज वाले पेशेंट में कोविड की वजह से फंगल इंफेक्शन हो जाता है। अमूमन यह नाक से शुरू होता है और नेजल बोन और आंखों को खराब कर सकता है। यह जबड़ों को भी चपेट में लेता है। ऐसे मरीजों को नाक में सूजन या अधिक दर्द हो आंखों से धुंधला दिखाई दे तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए। यह आंख की पुतलियों या आसपास का एरिया पैरालाइज्ड कर सकता है। ज्यादा दिन बीत जाएं तो दिमाग में इंफेक्शन बढ़ने का खतरा हो जाता है।

किन मरीजों के लिए ज्यादा खतरा
कई राज्यों में कोविड पेशेंट में म्यूकोरमाइकोसिस डिजीज होने के मामले सामने आ चुके हैं। साइनस के कई मरीजों में यह समस्या आती है, लेकिन कोविड पेशेंट के लिए ज्यादा खतरनाक है। खासतौर पर जिन्हें डायबिटीज है या उनकी इम्युनिटी कमजोर है। कोविड होने के बाद ऐसे लोगों को डायबिटीज पूरी तरह कंट्रोल करना जरूरी हो जाता है। इसलिए इम्युनिटी बढ़ाना ही बेहतर विकल्प है। यदि इंफेक्शन होता है तो मेनिनजाइटिस और साइनस में क्लोटिंग का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इसके लक्षण दिखने पर घरेलू उपचार न करें, सीधे डॉक्टर के पास जाएं।

जुकाम व आंख के नीचे सूजन है शुरुआती लक्षण
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल की डॉक्टर बेलाबेन प्रजापति ने बताया कि शुरुआती लक्षणों में मरीज को पहले जुकाम होता है। इसके बाद ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास ही नहीं जाते और घरेलू इलाज शुरू कर देते हैं, जिससे इंफेक्शन फैलता चला जाता है। कुछ समय बाद कफ जम जाता है और फिर नाक के पास गांठ बन जाती है। इस गांठ का सीधा असर आंखों पर होता है, जिसके बाद आंखें चिपकने लगती हैं और सिर में तेज दर्द होने लगता है। इसीलिए आंख, गाल में सूजन और नाक में रुकावट अथवा काली सुखी पपड़ी पड़ने के तुरंत बाद एंटी-फंगल थैरेपी शुरू करा देना चाहिए।

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