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सूरत महानगर पालिका का निर्णय:सड़कें बनाने में प्लास्टिक वेस्ट का ज्यादा उपयोग करेगी मनपा, रोड मजबूत बनेगी और कचरे का निस्तारण भी आसान होगा

सूरतएक महीने पहले
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डूमस में प्लास्टिक वेस्ट से बनाई गई सड़क। - Dainik Bhaskar
डूमस में प्लास्टिक वेस्ट से बनाई गई सड़क।
  • मजूरा फायर स्टेशन से नवजीवन चार रास्ते तक की सड़क की कार्पेटिंग-रिकार्पेटिंग प्लास्टिक वेस्ट से होगी

शहर ही नहीं पूरे देश के लिए प्लास्टिक वेस्ट बड़ी समस्या है। ऐसे में सूरत महानगर पालिका ने प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग सड़कें बनाने में करने का निर्णय लिया है। इससे प्लास्टिक वेस्ट का निस्तारण होगा और सड़कें भी टिकाऊ होंगी। प्लास्टिक वेस्ट को डामर के साथ मिला कर सड़कें बनाई जाएंगी। इस प्रस्ताव को लोक निर्माण समिति ने पारित कर दिया है। अठवा जोन में मजूरा फायर स्टेशन से कपाड़िया हेल्थ क्लब होते हुए नवजीवन चार रास्ते तक की सड़क की कार्पेटिंग और रि-कार्पेटिंग प्लास्टिक वेस्ट से ही की जाएगी। टोटल मटेरियल में 6 से 8 फीसदी प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग होगा।

2016 में ट्रायल के बाद 2017 में एयरपोर्ट से लंगर तक बनाई थी सड़क, जो अन्य सड़कों से बेहतर हालत में है
वर्ष 2016 में प्लास्टिक वेस्ट को डामर के साथ उपयोग करने का ट्रायल किया गया था। उसके बाद 2017 में डूमस एरपोर्ट के पास से लंगर तक की सड़क प्लास्टिक वेस्ट के मिश्रण से बनाई गई थी। इस सड़क की स्थिति अन्य सड़कों से बेहतर है। हालांकि इसे लेकर कोई सर्वे नही किया गया। पिछले 3 साल में 21 किलोमीटर सड़कों में 104 टन प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग किया गया है। इससे सड़कें जल्दी खराब नहीं होतीं। डूमस रोड, भेस्तान-नवसारी ब्रिज के नीचे, गीतांजलि के पास की सड़क सहित करीब 21 किलोमीटर की सड़क बनाई गई है।

सरकार सालाना देती है 2 करोड़ की ग्रांट
प्लास्टिक वेस्ट का खर्च डामर से अधिक होता है। हालांकि वह अधिक खर्च सरकार की ग्रांट से मिल जाता है। मनपा को अधिक खर्च नहीं करना पड़ेगा। केंद्र सरकार प्लास्टिक वेस्ट के लिए सालाना 2 करोड रुपए ग्रांट देती है।

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