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लापरवाही नहीं इलाज:कोरोना से रिकवर करने के बाद लापरवाही पड़ेगी भारी, सूरत में 15 दिन में खोई 10 मरीजों ने आंखें

सूरत3 महीने पहलेलेखक: सूर्यप्रकाश तिवारी
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डॉक्टरों ने मिकोर माइकोसिस से पीडि़त एक मरीज का ऑपरेशन करके आंख निकाली। - Dainik Bhaskar
डॉक्टरों ने मिकोर माइकोसिस से पीडि़त एक मरीज का ऑपरेशन करके आंख निकाली।
  • मिकोर माइकोसिस बीमारी के अब तक 60 से ज्यादा केस
  • लक्षण दिखने पर मरीज को तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाना चाहिए
  • इलाज में देरी जानलेवा साबित हो रही है

आप कोरोना से रिकवर हो गए हैं, तब भी विशेष सावधानी बरतने की जरुरत है। क्योंकि पोस्ट-कोरोना कॉप्लिकेशन्स और दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण मरीजों को निगेटिव होने के बाद भी काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सही समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज को आंख गंवानी पड़ सकती है और जान भी जा सकती है।

कोरोना पॉजिटव और निगेटिव मरीजों में ऐसी ही एक बीमारी मिकोर माइकोसिस के केस बढ़ रहे हैं। सूरत में 15 दिन के भीतर ऐसे 60 से अधिक केस सामने आए हैं, जिनमें 10 मरीजों की आंखें निकालनी पड़ी हैं। मिकोर माइकोसिस एक प्रकार का फंगल इंफेक्शन है, जो नाक और आंख से होता हुआ ब्रेन तक पहुंच जाता है और मरीज की मौत हो जाती है।

वैसे तो इस बीमारी के केस बहुत कम होते हैं, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में इसके केस अधिक सामने आ रहे हैं। कोरोना से संक्रमित होने के बाद मरीज आंख दर्द, सिर दर्द आदि को इग्नोर करता है। यह लापरवाही मरीज को भारी पड़ती है। ईएनटी रोग विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना उपचार के दौरान मरीजों को दवाएं-स्टेरॉयड दिए जाते हैं। इनके साइड इफेक्ट और कोरोना संक्रमण के कारण मिकोर माइकोसिस के केस बढ़ रहे हैं।

केस तो पहले भी आते थे, पर दूसरी लहर जानलेवा
ईएनटी सर्जन डॉ. विशाल अरोरा ने बताया कि कोविड की पहली लहर में भी यह बीमारी थी, लेकिन तब 2-3 केस आते थे। दूसरी लहर में जिस तरह से केस बढ़ रहे हैं वह चिंता का विषय है। आमतौर पर कोरोना के बाद अनकंट्रोल्ड डायबिटीज वाले मरीजों में इस बीमारी के होने की संभावना सबसे अधिक होती है।

लेकिन यह जरूरी नहीं कि सिर्फ डायबिटीज का मरीज ही इसका शिकार हो। डायबिटीज मरीजों में 80% और अन्य में 20% इसके चांस होते हैं। कोरोना ठीक होने के तुरंत बाद या 2-3 दिन के भीतर इसके लक्षण नजर आते हैं। सिर, नाक व आंख में दर्द, आंखें लाल होना, पानी आना व सूनापन इसके प्रमुख लक्षण हैं।

24 घंटे के भीतर आंख से ब्रेन में पहुंच जाता है यह इंफेक्शन

ईएनटी ईएनटी सर्जन डॉ. संदीप पटेल ने बताया कि कोरोना ठीक होने के बाद यह फंगल इंफेक्शन पहले साइनस में होता है और 2 से 4 दिन में आंख तक पहुंच जाता है। इसके 24 घंटे के भीतर यह ब्रेन तक पहुंच जाता है। इसलिए हमें आंख निकलनी पड़ती है। साइनस और आंख के बीच हड्डी होती है, इसलिए आंख तक पहुंचने में दो से ज्यादा दिन लगते हैं। आंख से ब्रेन के बीच कोई हड्डी नहीं होने से यह सीधा ब्रेन में पहुंच जाता है और आंख निकालने में देरी होने पर मरीज की मौत हो जाती है।

डायबिटीज मरीज और कमजोर इम्युनिटी वालों को ज्यादा खतरा

ईएनटी सर्जन डॉ. संकेत गांधी ने बताया कि फंगल इंफेक्शन सबसे पहले कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों पर अटैक करता है। कोरोना में इम्युनिटी बहुत कमजोर हो जाती है। इलाज के दौरान दी गई दवाई से भी बॉडी पर बुरा असर पड़ता है।

ऐसे में अगर मरीज डायबिटीज वाला है तो उसे यह बीमारी होने के चांस सबसे अधिक होता है। सर में असहनीय दर्द, आंख लाल होना, तेज दर्द होना और पानी गिरना, आंख का मूवमेंट नहीं होना जैसे लक्षण मिलें तो तुरंत इलाज लेने की जरूरत है।

हर दिन 4 से 5 मरीज आ रहे

मिकोर माइकोसिस बीमारी केवल कोरोना ठीक होने के बाद ही होगी, यह जरूरी नहीं है। कोरोना इलाज के दौरान भी हो सकती है। इस बीमारी के रोजाना 4-5 मरीज आ रहे हैं। महज 15 दिन में 60 मरीज देखे गए, जिसमें 10 मरीजों की आंखें निकाली जा चुकी हैं। आमतौर पर यह एक आंख में ही होता है, पर दोनों में भी हो सकता है।

संक्रमण को ब्रेन से बढ़ने से रोकने और मरीज की जान बचाने के लिए आंख निकालना ही विकल्प है। बीमारी का पता लगने के 24 घंटे में इलाज मिले तो बेहतर होता है। समय से इलाज शुरू होने पर मरीज को बचाया जा सकता है। मरीज को ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाना चाहिए, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके।

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