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  • Only 39% Of The Students Passed In The 4th And 5th Semester Of Commerce, The Result Of Science Was Also 7% Less.

ऑनलाइन पढ़ाई का असर:कॉमर्स के 4 व 5 सेमेस्टर में सिर्फ 39% छात्र ही पास हुए, साइंस का परिणाम भी 7% कम रहा

सूरतएक महीने पहले
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  • परिणाम }सीनेट सदस्य कापड़िया ने यूिनवर्सिटी काे पत्र लिखकर दोबारा उत्तरपुस्तिका जांचने की मांग की है

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉमर्स कॉलेजों का परिणाम जारी किया गया हैं, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र फेल हो गए हैं। जिसकी वजह से छात्रों के साथ ही प्रोफेसरों की भी चिंता बढ़ी हुई हैं। परिणाम आने के बाद जब प्रोफेसरों ने इसका एनालिसिस किया तो उन्हें प्राथमिक तौर पर यह पता चला कि यह सब कुछ ऑनलाइन एजुकेशन की वजह से पढ़ाई पर असर पड़ा हैं।

वहीं दूसरी तरफ परिणाम आने के बाद छात्रों की चिंता भी बढ़ गई हैं। ऑनलाइन एजुकेशन की वजह से छात्रों पर असर पड़ा है, यहीं कारण है कि इस बार बड़ी संख्या में छात्र फेल हो गए हैं। परिणाम आने के बाद सीनेट मेंबर मनीष कापड़िया ने यूनिवर्सिटी की काॅपी जांचने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करते हुए फिर से कॉपी जांच कर परिणाम जारी करने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने यूनिवर्सिटी को पत्र भी लिखा है।

39% ही रहा परिणाम

कॉमर्स कॉलेजों में बीकॉम के सेमेस्टर 4-5 का परिणाम जारी किया गया हैं। जारी परिणाम में केवल 39 प्रतिशत छात्र ही पास हो सके हैं और 61 प्रतिशत छात्र फेल हो गए हैं। कॉमर्स विभाग के डीन प्रो. विजय जोशी बताते है कि हर वर्ष लगभग 54 प्रतिशत से ज्यादा होता था।

पूरक परीक्षा का 11%

कॉमर्स के अलग-अलग सेमेस्टर के पूरक परीक्षा का परिणाम जारी हुआ हैं जो कि पिछले वर्ष से 4 प्रतिशत कम है। हर वर्ष पूरक परीक्षा का परिणाम 15 प्रतिशत हुआ करता था लेकिन इस वर्ष परीक्षा का परिणाम 11 प्रतिशत ही आया है। जो छात्र फेल हो गए है उन्हें दोबारा से परीक्षा देना होगा।

साइंस में 41.42% रिजल्ट

वहीं बीएससी सेमेस्टर 5 का परिणाम इस बार लगभग 7 प्रतिशत कम रहा। इस बार बीएससी का परिणाम 41.42 प्रतिशत रहा। जो कि हर वर्ष लगभग 48 प्रतिशत हुआ करता था, लेकिन साइंस के छात्रों में ज्यादा फेरबदल देखने को नहीं मिला है।

कॉलेज में पढ़ने का मौका नहीं मिला

कॉमर्स के डीन प्रो. विजय जोशी के मुताबिक इस वर्ष लगातार सिर्फ ऑनलाइन एजुकेशन के माध्यम से ही करवाया गया। किसी भी छात्र को कॉलेज में पढ़ने का मौका ही नहीं मिला। जिसकी वजह से छात्रों के परिणाम में असर देखने को मिला हैं।

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