मोहभंग / गोंडल के घोघावदर में सरकारी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश के लिए अभिभावकों ने लगाई लाइन

प्राइवेट स्कूलों से बच्चों को निकालकर उन्हें सरकारी स्कूल में प्रवेश के लिए लाइन पर लगे अभिभावक प्राइवेट स्कूलों से बच्चों को निकालकर उन्हें सरकारी स्कूल में प्रवेश के लिए लाइन पर लगे अभिभावक
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प्राइवेट स्कूलों से बच्चों को निकालकर उन्हें सरकारी स्कूल में प्रवेश के लिए लाइन पर लगे अभिभावकप्राइवेट स्कूलों से बच्चों को निकालकर उन्हें सरकारी स्कूल में प्रवेश के लिए लाइन पर लगे अभिभावक

  • प्राइवेट स्कूलों से हुआ मोहभंग
  • 100 साल पुरानी स्कूल में लिया प्रवेश

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 03:37 PM IST

गोंडल. राजकोट जिले के गोंडल तहसील के घोघावदर गाँव में बुधवार को आंखों को राहत देने वाला दृश्य देखा गया। गाँव के एक अन्य निजी स्कूल में पढ़ने वाले 35 बच्चों के माता-पिता ने अपने बच्चों को एक सरकारी स्कूल में जाने के लिए तैयार किया और स्वयं प्रवेश के लिए लाइन पर लग गए। 

इस स्कूल के शिक्षक बच्चों पर बहुत मेहनत करते हैं

100 साल पुराना सरकारी स्कूल
गोंडल के महाराज श्री भागवत सिंहजी के हाथों वर्ष 1920 में स्थापित, गोंडल तहसील के घोघावदर कुमार स्कूल ने उपलब्धि प्राप्त की है। आसपास की अन्य निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 35 बच्चों ने इस सरकारी स्कूल में प्रवेश लिया। इसका श्रेय स्कूल के 11 शिक्षकों पर जाता है, जिन्होंने स्कूल में पूरे समर्पण के साथ बच्चों को पढ़ाते हैं।


पहली से आठवीं तक की कक्षाएं लगती हैं
इस स्कूल में हर साल प्रवेशोत्सव का आयोजन होता है। इस साल कोरोना महामारी के कारण यह कार्यक्रम नहीं हो पाया है। इसके बाद भी अनलॉक-1 के अंतिम दिन घोघावदर की कुमार शाला में 35 उन बच्चों ने प्रवेश लिया, जो अब तक निजी शालाओं में पढ़ रहे थे। गांव के बुजुर्गों ने इन बच्चों को शैक्षणिक किट देकर उनका स्वागत किया। जिससे बच्चे खुश हो गए।

इस स्कूल में पढ़ने वाले आज उच्च पदों पर हैं

यहां की शिक्षा उच्च दर्जे की है
अपने बच्चों को इस स्कूल में प्रवेश कराने के बाद अभिभावकों ने कहा कि यहां के शिक्षक उच्च शैक्षणिक योग्यता के हैं। जो उन्हें निजी स्कूलों से एकदम अलग करता है। बच्चों के लिए शिक्षक काफी मेहनत करते हैं। इसे देखकर हमने निर्णय लिया कि अपने बच्चों को यहीं पढ़ाएंगे।


सरकारी स्कूलों में पढ़कर लोग काफी ऊपर तक पहुंचे हैं
पिछले तीन महीनों में शाला के शिक्षकों ने आसपास के क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों से मिलकर उन्हें सरकारी स्कूल का महत्व बताया था। उनकी मेहनत रंग लाई। उन्हीं के प्रयासों से अभिभावक अपने बच्चों को इस स्कूल में प्रवेश कराने के लिए लालायित हुए। 


छोटे से गांव की बड़ी उपलब्धि
घोघावदर गांव की आबादी केवल 3500 है। अभी तक इस गांव से 3 चार्टर्ड एकाउंटेंट, 3 पीएचडी, 9 डॉक्टर, 10 इंजीनियर, एक पीएसआई, एक सांसद तथा 7 वायरलेस पुलिस इंस्पेक्टर बने हैं। सभी इसी स्कूल से निकले हैं। इससे साबित हो जाता है कि गांव वाले शिक्षा को कितना महत्व देते हैं।

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