कोरोना के साथ नई परेशानी:कोरोना संक्रमित डायबिटीज के मरीजों को म्यूकोरमाइकोसिस का खतरा, नाक-कान-गले में हो रहा जानलेवा इंफेक्शन

अहमदाबाद5 महीने पहले
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कोरोना महामारी के बीच अनकंट्रोल्ड डायबिटीज, किडनी, हायपरटेंशन और मोटापे की समस्या से जूझ रहे लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसी मल्टीपल बीमारियों वाले लोग अब एक नई परेशानी से जूझ रहे हैं। अहमदाबाद में अब तक ऐसे 60 मरीजों की पहचान की गई है, जो अब म्यूकोरमाइकोसिस (फंगल इंफेक्शन) नाम की घातक बीमारी की चपेट में आ गए हैं। इनमें से 9 लोगों की मौत भी हो चुकी है और तीन की आंखों की रोशनी जा चुकी है। ऐसे 30 से ज्यादा मरीज सिविल अस्पताल में भर्ती हैं।

म्यूकोरमाइकोसिस से आंखों की रोशनी या जान भी सकती है। तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, इसलिए हम इन्हें स्पष्ट रूप से नहीं दिखा रहे हैं।
म्यूकोरमाइकोसिस से आंखों की रोशनी या जान भी सकती है। तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, इसलिए हम इन्हें स्पष्ट रूप से नहीं दिखा रहे हैं।

रोजाना 3-4 मरीज आ रहे
सिविल अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार मल्टीपल बीमारियों वाले लोगों के लिए कोरोना एक बड़ी आफत बन रहा है। ऐसे मरीजों खून का थक्का जमने की शिकायत हो रही है। खून का थक्का जमने से उनका शुगर लेवल काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा नाक-कान में इन्फेक्शन होने के बाद फंगस हो जाता है। इससे पूरे चेहरे पर सूजन आ जाती है।

इसका सबसे ज्यादा असर आंखों पर पड़ता है और इलाज सही समय पर न होने के चलते आंखों की रोशनी जा सकती है। चिंता की बात यह है कि रोजाना ऐसे 3-4 मरीज सिविल अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।

लापरवाही न बरतें
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल की डॉक्टर बेलाबेन प्रजापति ने बताया कि शुरुआती लक्षणों में मरीज को पहले जुकाम होता है। इसके बाद ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास ही नहीं जाते और घरेलू इलाज शुरू कर देते हैं, जिससे इंफेक्शन फैलता चला जाता है। कुछ समय बाद कफ जम जाता है और फिर नाक के पास गांठ बन जाती है। इस गांठ का सीधा असर आंखों पर होता है, जिसके बाद आंखें चिपकने लगती हैं और सिर में तेज दर्द होने लगता है। इसीलिए आंख, गाल में सूजन और नाक में रुकावट अथवा काली सुखी पपड़ी पड़ने के तुरंत बाद एंटी-फंगल थैरेपी शुरू करा देना चाहिए।

क्या है म्यूकोरमाइकोसिस?
डायबिटीज वाले पेशेंट में कोविड की वजह से फंगल इंफेक्शन हो जाता है। अमूमन यह नाक से शुरू होता है और नेजल बोन और आंखों को खराब कर सकता है। यह जबड़ों को भी चपेट में लेता है। ऐसे मरीजों को नाक में सूजन या अधिक दर्द हो आंखों से धुंधला दिखाई दे तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए। यह आंख की पुतलियों या आसपास का एरिया पैरालाइज्ड हो सकता है। ज्यादा दिन बीत जाएं तो दिमाग में इंफेक्शन बढ़ने का खतरा हो जाता है।

किनके लिए खतरा
कई राज्यों में कोविड पेशेंट में म्यूकोरमाइकोसिस डिजीज होने के मामले सामने आ चुके हैं। साइनस के कई मरीजों में यह समस्या आती है, लेकिन कोविड पेशेंट के लिए ज्यादा खतरनाक है। खासतौर पर जिन्हें डायबिटीज है या उनकी इम्युनिटी कमजोर है। कोविड होने के बाद ऐसे लोगों को डायबिटीज पूरी तरह कंट्रोल करना जरूरी हो जाता है। इसलिए इम्युनिटी बढ़ाना ही बेहतर विकल्प है। यदि इंफेक्शन होता है तो मेनिनजाइटिस और साइनस में क्लोटिंग का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इसके लक्षण दिखने पर घरेलू उपचार न करें, सीधे डॉक्टर के पास जाएं।

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