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प्रदर्शन / बिल देख भड़के लोग, बोले- मीटर की रीडिंग किए बिना तिगुना रकम चढ़ा दी

People were agitated after seeing the bill, they said - without paying the meter, they gave triple the amount
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People were agitated after seeing the bill, they said - without paying the meter, they gave triple the amount

  • उधना के बाद कतारगाम, एके रोड, फूलपाड़ा में भी बिजली बिल का विरोध
  • अधिकारी बोले: लॉकडाउन और गर्मी में बिजली की खपत बढ़ी है

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 07:30 AM IST

सूरत. लाॅकडाउन के दाैरान का बिजली बिल लाेगाें काे भेजा रहा है। बिल की रकम देखकर लाेगाें की हालत खराब है। दक्षिण गुजरात विद्युत कंपनी और शहर में कार्यरत अन्य बिजली कंपनियां मीटर की रीडिंग किए बगैर ही बिल दे रही हैं। इसे औसतन बिल बताया जा रहा है, पर पिछले दो महीने से जो घर, उद्योग, कारखाने बंद हैं उनके यहां भी बिल पहुंचाया जा रहा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि बिजली कंपनी के अधिकारी लोगों की बात सुनने को तैयार नहीं हैं। बिजली कंपनियों का दावा है कि लोगों को लॉकडाउन के दौरान औसतन बिल भेजा गया है।

राज्य सरकार से निवेदन करने के बाद भी बिजली के बिल में कोई राहत नहीं दी गई है। पिछले दिनों उधना में लाेगों ने बिजली बिल का विरोध किया था। सोमवार को वराछा में अश्विनी कुमार रोड, फूलपाड़ा और कतारगाम में बिजली बिल का विरोध किया गया। लोग विद्युत कंपनी द्वारा ज्यादा बिल भेजने का आरोप लगा रहे हैं। लाेगों का कहना है कि लॉकडाउन में सब कुछ बंद होने के बावजूद तीन गुना अधिक बिल आया है। उधर, बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है। लोग बिजली का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। लंबे समय के बाद बिल भेजा गया है इसलिए अधिक लग रहा है।

ये है मामला: सामान्य दिनों में 500 से 1000 रुपए बिल आता था, अब बढ़ गया है 
मार्च में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन किया गया था। लाॅकडाउन होते ही कारखाने, मिल, दुकान सब कुछ बंद हो गए थे। इतना ही नहीं बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने मार्च महीने में मीटर की रीडिंग भी नहीं की थी। अप्रैल महीने में बिजली कंपनी ने मोबाइल पर मैसेज करके बिजली का बिल भेज दिया था। इसके बाद कंपनी द्वारा बिल जमा करने के लिए मोबाइल पर रिमांडर भी भेजा गया था। लॉकडाउन के दौरान जो लोग घर छोड़कर अपने गांव या दूसरी जगह चले गए उन्हें भी औसतन बिल भेजा गया है। सामान्य दिनों में 500 से 1000 रुपए बिल आता था, अब इसका तीगुना बिल भेजा गया है।

डीजीवीसीएल: मीटर रीडिंग करके 2 महीने का बिल भेजेंगे 
डीजीवीएल के यूनियन संगठन के सचिव बाविसिया ने बताया कि लाेगों को औसतन बिल भेजा गया है। जमा करते हैं तो ठीक नहीं तो अब दो महीने की रीडिंग करके एक साथ बिल भेजा जाएगा। यदि किसी ने जमा कर दिया है तो उतनी रकम उसके बिल से कट जाएगी। लोगों को ज्यादा परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। लॉकडाउन में कर्मचारी घर-घर नहीं जा सकते थे, इसलिए यह तरीका अपनाया गया था।

मीटर में कैपेसिटर लगने से भी कुछ फर्क नहीं, उद्योग बंद रहने के बावजूद बिजली की खपत दिखा रहा है

मार्च, अप्रैल और मई समेत महीने के बिजली बिल भरने की अंतिम तारीख 31 मई होने से उद्योगपतियों की परेशानी और बढ़ गई है। मीटर में कैपेसिटर लगाने के बावजूद कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। मीटर में बिजली का इस्तेमाल दिखा रहा है। उद्यमियों ने कैपेसिटर में खराबी होने के कारण बिल माफ करने की मांग की है। सचिन इंडस्ट्रियल सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष मयूर गोलवाला ने बताया कि 22 मार्च को बंद हुए उद्योग-धंधे अभी तक चालू नहीं हुए हैं।

इसके बावजूद बिल भेजा जा रहा है। अभी तक जिन उद्योगपतियों को बिल मिला है उनके मीटर में कैपेसिटर लगाया गया है। इसके बावजूद बिजली कंट्रोल नहीं हो रही है। कैपेसिटर लगे होने के बाद बिल आने से ऐसा लगता है कि इसमें गड़बड़ी हो रही है। इसके लिए उद्योगपति जिम्मेदार नहीं हैं। उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री रूपाणी और ऊर्जामंत्री सौरभ पटेल से इस बिल को रद्द करने की मांग की है।

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