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भास्कर original:एक लाख छा­त्रों के साथ खिलवाड़; पेपर छापने वाली कंपनी से करा दी ऑनलाइन परीक्षा, नतीजा- 3000 शिकायतें

सूरत3 महीने पहलेलेखक: अनूप मिश्रा
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बिना टेंडर के परीक्षा की जिम्मेदारी दी, दोनों मॉक टेस्ट में भी फेल रही, फिर भी काम दिया। - Dainik Bhaskar
बिना टेंडर के परीक्षा की जिम्मेदारी दी, दोनों मॉक टेस्ट में भी फेल रही, फिर भी काम दिया।
  • तीन साल पहले जिसे दोषी मानकर काम छीना, उसी को दे दिया काम

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने के लिए एक ऐसी कम्पनी को ठेका दे दिया, जिसे उसने खुद अनियमितता का दोषी माना था। यह कम्पनी पहले प्रश्न पत्र और डिग्री छापने का काम करती थी और बिना टेंडर प्रक्रिया के उसे ऑनलाइन परीक्षा कराने का काम दे दिया। यह भी पता नहीं लगाया कि कम्पनी को ऑनलाइन परीक्षा कराने का अनुभव है या नहीं।

वाइस चांसलर किशोर चंवड़ा ने ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने के लिए सूर्या ऑफसेट कम्पनी को ठेका दिया। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं की गई। सिंडिकेट ने ऑनलाइन परीक्षा का निर्णय लेने के लिए वीसी को अिधकृत किया था। वीसी ने अधिकार का प्रयोग करते हुए एक विवादित कंपनी को काम दे दिया।

ठेके के बारे में सिंडिकेट को भी अंधेरे में रखा गया। न तो सिंडिकेट की अनुमति ली गई और न ही जानकारी दी गई। आनन-फानन में सूर्या ऑफसेट को काम दे दिया गया। कंपनी ने ऑनलाइन परीक्षा का दो बार मॉक टेस्ट किया। ये दोनों ही टेस्ट फेल रहे।

परिक्षार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद कंपनी को परीक्षा का जिम्मा दे दिया। कम्पनी ने परीक्षा आयोजित की तो तीन हजार से अधिक परिक्षार्थियों को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। जिनका अभी तक कोई निराकरण नहीं किया गया।

पेपर एवं डिग्री छापने का काम करती थी सूर्या ऑफसेट, यूनिवर्सिटी ने शिकायत मिलने पर काम छीन लिया था

  • 100,000 स्टूडेंट्स रजिस्टर्ड हैं, ऑनलाइन परीक्षा में।
  • 300 कॉलेज(प्राइवेट एवं ग्रांटेड) सम्बद्ध हैं, नर्मद यूनिवर्सिटी से।
  • 07 जिलों के कॉलेज हैं, यूनिवर्सिटी अधिकार क्षेत्र में।
  • 18 रुपए प्रति पेपर प्रति स्टूडेंट के हिसाब से कम्पनी को मिलेगा पेमेंट।
  • 3000 शिकायतें ऑनलाइन परीक्षा की खामियों की प्राप्त हुई।

परीक्षा का लाखों रुपए का पेमेंट करेगी यूनिवर्सिटी

कंपनी को बिना किसी टेंडर के सीधे ही लाखों रुपए का काम दे दिया गया। सूत्रों के मुताबिक यूनिवर्सिटी कंपनी को प्रति छात्र प्रति परीक्षा 18 रुपए का भुगतान करेगी। अब तक सम्पन्न हो चुकी परीक्षाओं में करीब 65 हजार छात्र शामिल हो चुके हैं। सभी परीक्षाएं सम्पन्न होने के बाद असली आंकड़ा सामने आएगा।

कंपनी ने कहा-उसे कितना अनुभव है बता नहीं सकते

सूर्या ऑफसेट कंपनी का पक्ष जानने के लिए भास्कर ने उसके एडमिन मुद्रेश पुरोहित से बात की। पुरोहित ने बताया कि हमारी कंपनी को पेपर छापने का बहुत अनुभव है। ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने का अनुभव किस-किस कंपनी या किस-किस यूनिवर्सिटी के साथ है, यह जानकरी नहीं दे सकते, क्योंकि यह उनके प्रोटोकॉल के खिलाफ है।

यूनिवर्सिटी ने कंपनी के अनुभव की भी जांच नहीं की

भास्कर ने ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने का ठेका देने को लेकर पड़ताल की तो सामने आया कि अहमदाबाद की सूर्या ऑफसेट कंपनी काफी समय से यूनिवर्सिटी के सम्पर्क में है। वीसी ने सिंडिकेट से मिले अधिकारों का दुरुपयोग कर इसका ठेका दे दिया। यही कंपनी ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने के बाद परिणाम भी जारी करेगी।

यह कंपनी पहले पीएचडी एंट्रेस की ऑनलाइन परीक्षा भी आयोजित कर चुकी है। ऑनलाइन परीक्षा का काम देने से पहले यूनिवर्सिटी ने कंपनी से अनुभव सम्बंधित प्रमाण पत्र भी नहीं मांगा। कंपनी की वेबसाइट पर चेक करने के बाद भी यह प्रमाण नहीं मिला कि कंपनी के पास ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने का कोई अनुभव है।

यूनिवर्सिटी का डाटा भी कंपनी को मिल रहा

परीक्षा के लिए यूनिवर्सिटी कंपनी को छात्रों का डेटा देगी। यह डेटा सुरक्षित रहेगा, इस पर शिक्षक-छात्रों को संदेह है। सिंडिकेट सदस्य भावेश रबारी का कहना है कि सिंडिकेट की बैठक में वीसी को गोपनीयता की वजह से पावर दी गई थी कि वह परीक्षा से संबंधित कंपनियों का चुनाव खुद कर सकते हैं। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया करना जरूरी था। सीधे एक कंपनी को काम देना नियमों के खिलाफ है।

वीसी बोले-परीक्षा कॉन्फिडेंशियल मामला

नर्मद यूनिवर्सिटी के कुलपति किशोर चावड़ा से इस मामले में ज्यादा बात करने से इनकार कर दिया। चवड़ा ने केवल इतना कहा कि यह परीक्षा एक कॉन्फिडेंशियल मामला है। इसलिए इसके बारे में ज्यादा कुछ जानकारी नहीं दी जा सकती। उधर, सिंडिकेट मेम्बर, इंचार्ज रजिस्ट्रार, परीक्षा नियामक, यूनिवर्सिटी स्टाफ और टेक्नीशियन ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली कंपनी को लेकर खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं।

जांच में दोषी पाई गई थी सूर्या ऑफसेट

पूर्व कुलपति शिवेंद्र गुप्ता के कार्यकाल में प्रश्न पत्र और डिग्री छापने का कार्य कर रही इस कंपनी की गड़बड़ी सामने आई थी। गुप्ता ने 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी। कमेटी सदस्य अश्विन पटेल का कहना है कि जांच में पाया था कि कंपनी ने यूनिवर्सिटी को मार्केट भाव से कई गुना ज्यादा दाम पर 3 वर्षों तक प्रश्न पत्र और डिग्री छापी है। जिसके बाद इस कंपनी को हटा कर मुंबई की एक कंपनी को काम दिया गया था।

करोड़ों का है यह खेल

यूनिवर्सिटी और उससे सम्बद्ध कॉलेजों में ढाई लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। फिलहाल सूर्या ऑफसेट को पूरक परीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। सूत्रों के मुताबिक कंपनी को और परीक्षा का काम भी दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक यूनिवर्सिटी रेगुलर छात्रों की भी ऑनलाइन परीक्षा कराने की तैयारी कर रही है। यह काम भी इसी कंपनी को मिलेगा। यदि सभी छात्रों की परीक्षा ऑनलाइन ली गई तो यूनिवर्सिटी कंपनी को करोड़ों रुपए का भुगतान करेगी।

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