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कोरोना वारियर्स / रमजान के रोज़े, तापमान 42 डिग्री, उसके बाद भी 12 घंटे से ज्यादा काम कर रहे हैं मेडिकल ऑफिसर

Ramadan fasts, temperature 42 degrees, even after that, medical officers are working more than 12 hours
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Ramadan fasts, temperature 42 degrees, even after that, medical officers are working more than 12 hours

  • इबादत और मानव सेवा दोनों पुण्य काम एक साथ
  • इस काम को करने में खुशी मिलती है
  • रोजे के दौरान ऐसे काम करने में सुकूं मिलता है

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 03:12 PM IST

महुआ. पवित्र रमजान महीने के 27 रोजे हो चुके हैं। अधिकांश लोग लॉकडाउन के कारण अपने घरों में ही कैद हैं। परंतु महुआ तहसील के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत मुस्लिम मेडिकल ऑफिसर और कम्युनिटी हेल्थ आफिसर की अलग ही कहानी है। रोजा रखते हुए वे अपने काम में पूरी तरह से मशगूल हैं।

चिलचिलाती धूप में वे गरीबों की सेवा कर रहे हैं

रोजे के दौरान ये कर्मचारी तेज धूप में गांव-गांव घूमकर गरीबों की सेवा कर रहे हैं। इसके अलावा घंटों तक पीपीई किट पहनकर गर्मी सहन कर रहे हैं। गांव-गांव जाकर वे गरीबों के स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं।

क्या कहते हैं रोजेदार

सभी रोजेदार एक सूर में यही कहते हैं कि इस दौरान प्राकृतिक रूप से सेवा कार्य करने की प्रेरणा मिलती है, साथ ही मानव सेवा करने का सुकूं भी मिलता है। हम पुण्य कर रहे हैं, हमें इसकी खुशी है।  
 
मुश्किलें भी आती हैं
यह सच है कि रमजान में रोजे के बाद इफ्तारी भी करनी होती है। नमाज का समय होता है, तो जहां जगह मिली, वहां नमाज पढ़ लेते हैं। 40 डिग्री टैम्परेचर में पीपीई किट पहनकर काम करते हैं, तो टेम्परेचर वैसे ही बढ़ जाता है। इसके अलावा फील्ड वर्क में काफी मुश्किलें आती हैं। डॉ. गुलसफा शेख, मेडिकल ऑफिसर, पीएचसी वलवाड़ा

पीपीई किट पहनकर 10 घंटे तक ड्यूटी

40 डिग्री गर्मी में पीपीई किट पहनने से रमजान के दौरान काम करना बहुत मुश्किल हो जाता है। हमें  घर से आराम करने के लिए भी कहा जाता है, लेकिन हम 10 से 12 घंटे काम कर रहे हैं, क्योंकि तहसील के लोगों को हमारी जरूरत है। हम रमजान के दौरान रोजा भी रख रहे हैं। हम दुआ करते हैं कि लोग जल्द स्वस्थ हों और उनकी हालत में सुधार हो। - डॉ. निम्बाई मंसूरी, चिकित्सा अधिकारी, पीएचसी करचेलिया

लोगों की सेवा करने का पुण्य मिल रहा है
रमजान में रोजे के साथ काम करना मुश्किल है, लेकिन यह हमारी ड्यूटी है। परिवार के लोग हमें आराम करने की सलाह देते हैं, लेकिन मुझे लोगों की सेवा कर उसका आनंद लेना होगा। रमजान में हमें लोगों को कोरोना से बचाने के पुण्य मिल रहा है।-नागम बानो अंसारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, शेखपुर

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