वीएनएसजीयू ने अफगानी छात्रों की मदद को बढ़ाया हाथ:कहा- हॉस्टल फ्री, फीस भी माफ, स्थिति सामान्य होने तक रखेंगे ध्यान

सूरत2 महीने पहले
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कुलपति ने छात्रों से मिलकर जानी समस्याएं। - Dainik Bhaskar
कुलपति ने छात्रों से मिलकर जानी समस्याएं।
  • अफगानिस्तान के 7 छात्र वीएनएसजीयू में कर रहे हैं पढ़ाई, सभी परिजनों को लेकर चिंतित

अफगानिस्तान में चरमपंथी संगठन तालिबान के कब्जे के बाद वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी सूरत में पढ़ने वाले अफगानी छात्रों की चिंताएं बढ़ गई हैं। उनको डर है कि उनकी आगे की पढ़ाई कैसे पूरी होगी। साथ ही उन्हें इस बात की भी चिंता है कि अफगानिस्तान में उनके परिजन कैसे हाेंगे। उनकी इन्हीं मुश्किलों का हल ढूंढने के लिए वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों से बात की है और उन्हें आश्वस्त किया है कि उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी, ताकि उनकी पढ़ाई पर कोई असर न पड़े।

बता दें कि वीएनएसजीयू की विभिन्न कॉलेजों में अफगानिस्तान के 7 छात्र पढ़ रहे हैं। छात्रों की मुश्किल यह है कि उनके देश के जो हालात हैं उसको देखते हुए आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक दिक्कत आ सकती है। क्योंकि उनके परिजनों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। कुलपति किशोर चावड़ा का कहना है कि उन्होंने सांसद सीआर पाटिल से बात की है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि कई दानदाता को छात्रों की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा और कितना खर्च इन छात्रों पर होगा इसकी पूरी लिस्ट बनाई जाएगी।

उसके आधार पर सिंडिकेट में मुद्दा रखकर उसे पास करवाया जाएगा। चावड़ा ने कहा कि यूनिवर्सिटी इन छात्रों का पूरा खर्च उठाएगी, जब तक कि अफगानिस्तान से संबंधित उनकी समस्या का समाधान नहीं हो जाता। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह भी कहा है कि जिन छात्रों को सीधे उनके माता-पिता या परिवार के लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है या फिर उन्हें कोई भी समस्या है वो विदेश मंत्रालय से संपर्क करके उनके परिवार वालों से बात करवाने का भी प्रयास कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यहां पर रहने वाले छात्रों के परिवार में सभी सुरक्षित हैं।

छात्र बाेले- अफगानिस्तान से हमारे परिजनों को भी भारत आने दिया जाए
अफगानी छात्रों ने बताया कि यूनिवर्सिटी की तरफ से कहा गया है कि अफगानिस्तान के हालात को देखते हुए उन्हें किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें पूरी मदद करने का आश्वासन दिया है। लेकिन, देश में जो हालात हैं उसको देखते हुए अब पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है। इसलिए जल्द से जल्द अपने परिवार से मिलना चाहते हैं, लेकिन वहां उन्हें खतरा है। इसलिए वह चाहते हैं कि उनके परिवार के लोग यहां पर आ जाएं, इसके लिए भी उन्होंने भारत सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन से बात की है।

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