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गुजरात चुनाव की तैयारी:दो दिवसीय यात्रा पर गुजरात पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, संघ, भाजपा, विहिप, बजरंग दल सहित अन्‍य कई हिंदुवादी संगठनों के नेताओ से करेंगे मुलाकात

सूरतएक महीने पहले
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RSS प्रमुख  मोहन भागवत ट्रेन से सूरत पहुंचे। - Dainik Bhaskar
RSS प्रमुख मोहन भागवत ट्रेन से सूरत पहुंचे।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अपनी दो दिवसीय गुजरात यात्रा पर आज सूरत पहुंच गए। भागवत 28 अगस्‍त को सूरत और 29 अगस्‍त को अहमदाबाद में संघ, भाजपा, विहिप, बजरंग दल सहित अन्‍य कई हिंदुवादी संगठनों के नेताओ से मुलाकात करेंगे। इसी दौरान संघ के सर कार्यवाह दत्‍तात्रेय होसबोले सहित संघ के कई और नेता भी गुजरात पहुंच चुके हैं। भागवत की इस यात्रा को गुजरात विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

गुजरात में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा संगठन को भी चुस्‍त दुरुस्‍त कर चुकी है। गुजरात के संगठन महासचिव के पद पर हाल ही रत्‍नाकर की नियुक्ति की गई है, रत्‍नाकर से पहले भिखू भाई दलसाणिया करीब एक दशक से यह पदभार संभाल रहे थे, लेकिन चुनाव से पहले अचानक संगठन महासचिव बदले जाने से कई अटकलें शुरु हो गई है। चुनाव से पहले संघ ने गुजरात में प्रांतीय बैठक बुलाई है, जिसमें भाजपा सरकार व संगठन के कामकाज की भी समीक्षा होगी।

भागवत 28 अगस्‍त को अहमदाबाद आएंगे जहां संघ, भाजपा, विहिप, बजरंग दल सहित अन्‍य कई हिंदुवादी संगठनों के नेता उनसे मुलाकात करेंगे। राष्‍ट्रीय मुस्लिम मंच के नेता भी इस दौरान भागवत से मुलाकात करेंगे। भागवत 29 अगस्‍त को सूरत की यात्रा पर रहेंगे। इसी दौरान संघ के सरकार्यवाह दत्‍तात्रेय हौसबोले सहित संघ परिवार के अन्‍य कई नेता भी गुजरात की यात्रा पर आएंगे। मुख्‍यमंत्री विजय रुपाणी व भाजपा अध्‍यक्ष सी आर पाटिल से संघ प्रमुख अलग अलग मुलाकात करेंगे।

हिंदुत्‍व की प्रयोगशाला माने जाने वाले गुजरात में एक बार फिर आरक्षण की मांग को लेकर हलचल शुरु हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से अन्‍य पिछडा वर्ग की जातियों को आरक्षण का अधिकार राज्‍य सरकारों को दिय जाने के साथ ही आरक्षण से जुडे नेताओं की बांछें खिल गई है, मानो राज्‍य सरकार पर दबाव बनाने का एक और मौका उनहें मिल गया है। गुजरात में 2015 में हुए आरक्षण आंदोलन को लेकर यह भी मान्‍यता है कि संघ उसके पक्ष में था, गाहे बगाहे संघ के नेता आरक्षण पर पुनर्विचार अथवा बदलाव की बात भी करते रहे हैं। ऐसे में गुजरात में एक बार फिर शुरु हुई राजनीतिक हलचल पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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