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मरीज ही नहीं डॉक्टरों को भी सता रही महामारी:कोरोना में मरीजों को मरते देखा, लगातार ड्यूटी व सिलेबस से बाहर की बीमारी का इलाज करना पड़ा, अब डिप्रेशन में 50 रेजिडेंट डॉक्टर

सूरत10 दिन पहलेलेखक: सूर्यकांत तिवारी
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सिविल में लगभग 400 रेजिडेंट डॉक्टर काम कर रहे हैं। इनमें 50 के डिप्रेशन के शिकार होने से प्रबंधन परेशान है। - Dainik Bhaskar
सिविल में लगभग 400 रेजिडेंट डॉक्टर काम कर रहे हैं। इनमें 50 के डिप्रेशन के शिकार होने से प्रबंधन परेशान है।

सिविल अस्पताल के 50 रेजिडेंट डॉक्टर डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। ये डॉक्टर मेडिसिन, सर्जरी, पीडियाट्रिक, गायनिक, टीवी एंड चेस्ट विभाग के हैं। सिविल में लगभग 400 रेजिडेंट डॉक्टर काम कर रहे हैं। इनमें 50 के डिप्रेशन के शिकार होने से प्रबंधन परेशान है। मरीजों का सिविल के ही मानसिक विभाग में इलाज चल रहा है।

लगातार काम का बोझ, पढ़ाई का दबाव के साथ कोरोना के इलाज में ड्यूटी लगना भी इस डिप्रेशन का कारण है। मानसिक विभाग से मिली जानकारी के अनुसार करीब 50 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर दवाई ले रहे हैं। हालांकि दवा से उन्हें राहत है और वे काम कर रहे हैं। डिप्रेशन का इलाज छह माह से दो साल तक चल सकता है।

डिप्रेशन से जूझ रहे डॉक्टरों को ये शिकायतें

  • रात को नींद नहीं आती, नकारात्मक खयाल आते हैं
  • कैरियर को लेकर चिंता रहती है
  • ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है
  • मामूली तकलीफ से भी बड़ी बीमारी होने की चिंता
  • एग्जाम और समय-समय पर प्रेजेंटेशन को लेकर चिंता
  • पढ़ाई और काम में मन नहीं लगना, छोटी-छोटी बात भूल जाना
  • रूखा व्यवहार
  • सहयोगियों और मरीजों से बहस कर लेना
  • कुछ हो गया तो समाज और संबंधी क्या कहेंगे

इन कारणों से डॉक्टरों को हो रहा डिप्रेशन

  • कोरोना काल में लगातार ड्यूटी करना
  • स्टेबल मरीजों को भी मरते देखना
  • महामारी में अपनो को खो देने का भय
  • जो पढ़ा नहीं उस बीमारी का इलाज करना
  • महामारी से छुटकारा मिलेगा या नहीं इसकी चिंता
  • पढ़ाई का बोझ, प्रेजेंटेशन आदि का तनाव
  • 24 घंटे वार्ड में काम करना, हफ्ते तक नहाने का भी समय नहीं मिलना
  • सरकार के नए-नए नियमों से कैरियर की चिंता

इन छह विभागों में तनाव के ज्यादा मरीज

मानसिक विभाग के सूत्रों के अनुसार मानसिक बीमारी के ज्यादा मरीज मेडिसिन, सर्जरी, टीवी एंड चेस्ट विभाग, पीडियाट्रिक, गायनिक और रेडियोलॉजी विभाग में हैं। जिन डॉक्टरों की पहली ही ड्यूटी कोरोना में लग गई थी वही सबसे ज्यादा तनाव में हैं। कोरोना की दूसरी लहर का असर 15 मार्च से 15 मई तक रहा।

इस बीच अस्पताल के सभी विभागों के डॉक्टरों की ड्यूटी कोरोना के मरीजों के इलाज में लगा दी गई थी। ऑर्थो सर्जरी और अन्य विभाग के डॉक्टरों ने इसका विरोध भी किया कि वे पढ़ाई दूसरी कर रहे हैं और प्रैक्टिस भी दूसरी बीमारियों का करते हैं, ऐसे में इलाज कैसे करेंगे। फिर भी रेजिडेंट डॉक्टरों व स्टूडेंट की ड्यूटी लगा दी गई।

6 माह से 2 साल तक चल सकती है दवा

मानसिक बीमारी के मरीज रेजिडेंट डॉक्टरों का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों की जानकारी हम नहीं दे सकते, लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं कि जो भी रेजिडेंट डॉक्टर हमारे पास इलाज के लिए आ रहे हैं उनकी दवा कम से कम 6 माह से लेकर 2 साल तक चल सकती है। तनाव झेल रहे इन रेजिडेंट डॉक्टरों को लगातार काम भी करना है और उसके साथ इलाज भी लेना है। ऐसे में मानसिक बीमारी से रिकवरी आसान नहीं होगी।

डॉक्टरों को भी होता है डिप्रेशन, इसका पूरा इलाज लेना जरूरी

  • रेजिडेंट डॉक्टर भी सामान्य मरीजों की तरह की डिप्रेशन में आते हैं। जैसे आम इंसान किसी घटना से मानसिक तनाव में आ जाता है वैसे ही डॉक्टर भी पढ़ाई, अधिक काम, कैरियर, फैमिली से जुड़ी बातों या घटनाओं को दिमाग मे बैठा लेते हैं। हालांकि समय से और पूरा इलाज लेने के बाद यह बीमारी ठीक हो जाती है। बस इसका पूरा कोर्स करना जरूरी है। - डॉ. कमलेश दवे, प्रोफेसर, मानसिक विभाग, सिविल अस्पताल
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