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पैसों का दुरूपयोग करने का आरोप:स्थायी समिति ने अधिकारियों से छीना 15 लाख रुपए की सीमा के भीतर खर्च करने का अधिकार

सूरतएक महीने पहले
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स्थाई समिति अध्यक्ष- प्रशासनिक कार्य प्रणाली का पालन नहीं कर रहे अधिकारी। - Dainik Bhaskar
स्थाई समिति अध्यक्ष- प्रशासनिक कार्य प्रणाली का पालन नहीं कर रहे अधिकारी।
  • सेंट्रल विजिलेंस- जोन-विभाग ने कामों को कई टुकड़ों में बांटा, भाव में भी भारी अंतर

मनपा अधिकारियों को बिना टेंडर मंगाए 15 लाख रुपए तक खर्च करने का अधिकार है। स्थाई समिति ने गुरुवार को कहा कि मनपा में इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। 15 लाख के खर्च वाले एक ही काम को जोन-विभाग कई भागों में बांट देते हैं, भावों में भी भारी अंतर मिला है। गुरुवार को स्थायी समिति ने खर्च करने के इस अधिकार को अधिकारियों से छीन लिया।

स्थायी समिति की पिछली बैठक में 73डी के तहत लाखों रुपए खर्च के काम जानकारी के लिए पेश किए गए थे। स्थायी समिति अध्यक्ष ने सारे प्रस्ताव कमिश्नर के पास वापस भेज दिए थे और इसका खुलासा मांगा था, पर कमिश्नर ने कोई रिपोर्ट पेश नहीं की थी। स्थायी समिति अध्यक्ष परेश पटेल ने बताया कि प्रस्ताव 2016(एक्ट की धारा 49(1) के अनुसार सभी डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेेंट कमिश्नर को 15 लाख तक खर्च वाले काम को करने से पहले स्थायी समिति से मंजूरी नहीं ली थी।

22 मार्च को स्थायी समिति ने रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था, पर अभी तक कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई। धारा 73डी के अंतर्गत अधिकारी मनपा को आर्थिक नुकसान न हो इस प्रकार निर्णय लेकर अति महत्वपूर्ण कामों को कर सकते हैं। महत्वपूर्ण काम राशि की सीमा के भीतर बिना रुके पूरे किए जा सकते हैं।

अधिकांश काम धारा-73डी का दुरुपयोग कर हो रहे हैं

अभी तक पेश होने वाले अधिकांश काम धारा- 73डी का दुरुपयोग करके 15 लाख रुपए की सीमा के भीतर किए जा रहे हैं। 15 लाख रुपए की सीमा वाले एक समान कार्य जोन और विभाग द्वारा अलग-अलग टुकड़ों में बांट कर किए जा रहे हैं। इनके भावों में भी भारी अंतर है।

अधिकांश कामों को सौंपते समय सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) की गाइडलाइन और पॉलिसी का पालन भी नहीं होता। स्थायी समिति ने इसे बहुत ही गंभीरता से लिया है और पर्याप्त चर्चा करने के बाद पुराने तीन प्रस्तावों को निरस्त करने का निर्णय लिया है।

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