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51 परिवारों पर संकट:19 साल पहले भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की, अब बिना मुआवजा दिए मेट्रो के लिए कब्जा लेने का नोटिस दिया

सूरत19 दिन पहलेलेखक: एजाज शेख
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2002 में डिस्ट्रिक्ट सेंटर बनाने काे मस्कति अस्पताल के पास की जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। - Dainik Bhaskar
2002 में डिस्ट्रिक्ट सेंटर बनाने काे मस्कति अस्पताल के पास की जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

शहर के महिधरपुरा इलाके में 51 परिवारों पर संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि उन्हें पांच दिन के भीतर अपना मकान-दुकान खाली कर दूसरी जगह जाना होगा। इसके लिए उन्हें न तो कोई मुआवजा मिलेगा और न ही वैकल्पिक आवास। प्रभावितों के मकान-दुकान तोड़कर मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाएगा।

जिस जमीन पर 51 परिवार काबिज हैं, उस जमीन पर कब्जा लेने की 19 साल पहले कार्रवाई शुरू की गई थी। अभी तक प्रभावितों को न तो मुआवजा दिया गया है और न ही वैकल्पिक आवास। इसके बावजूद जिला कलक्टर ने नोटिस जारी कर सभी 51 परिवारों को 12 अक्टूबर तक जमीन खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है।

दरअसल मस्कति अस्पताल के पास के डिस्ट्रिक्ट सेंटर बनाने की योजना थी। इसके लिए अस्पताल के पास वाली जमीन का अधिग्रहण करने के लिए 2002 में प्रक्रिया शुरू की गई। इमारत में निवास कर रहे परिवारों और दुकानदारों को नोटिस दे दिए गए। लेकिन बाद में यह प्रोजेक्ट स्थगित हो गया। जिसके बाद जिला कलेक्ट्रेट के भूमि संपादन विभाग ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी स्थगित कर दी।

इस दौरान प्रभावितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया नहीं की गई। अब यहां मेट्रो प्रोजेक्ट की लाइन-1 का काम चल रहा है। मेट्राे लाइन-1 के लिए उक्त इमारत की जमीन चाहिए। इसके लिए मेट्रो प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण के लिए कलेक्टर को प्रस्ताव भेजा था।

कलेक्टर ने 2002 की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के आधार पर 12 सितम्बर को नोटिस जारी कर सभी 51 परिवारों को 12 अक्टूबर तक मकान-दुकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान अगर प्रभावितों ने इमारत खाली नहीं की तो कलेक्ट्रेट ने अपने स्तर पर जमीन खाली कराने की चेतावनी भी दी है।

कलेक्टर ने नोटिस जारी कर सभी 51 परिवारों को 12 अक्टूबर तक मकान-दुकान खाली करने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री-मेयर से लगाई गुहार

कलेक्टर का नोटिस मिलने के बाद मकान एव दुकान मालिकों की नींद उड़ी हुई है। उनके लिए बड़ी समस्या है कि त्यौहार पर वे परिवार को लेकर कहां जाएंगे। अपनी व्यथा सुनाने के लिए प्रभावित को एक गुट सूरत मेयर हेमाली बोघावाला से मिला और कहा कि उनके आवास पर तत्काल कब्जा लेने की बजाय कुछ और समय दिया जाए। मनपा एव कलेक्टर प्रभावितों के लिए वैकल्पिक जगह की व्यवस्था करे। उन्हें मेयर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कुछ प्रभावित गुरुवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से मिलने गांधी नगर भी पहुंचे।

734 वर्ग मीटर जमीन का सम्पादन करना है

मस्कति के पास 734 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। उक्त जमीन पर कुल 51 लोग काबिज हैं। जिसमें 19 मालिक हैं और करीब 32 किराएदार हैं। भूमि संपादन विभाग ने जुलाई 2004 में 145.48 और 153.77 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण करने के लिए 34 लोगों को नोटिस दिया था, लेकिन जमीन का कब्जा नहीं लिया गया था।

प्रभावित बोले- घर के बदले घर, दुकान के बदले दुकान दी जाए

प्रभावितों का कहना है कि हमें मौजूदा जमीन अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा दिया जाएगा। हमें चार गुना मुआवजा या जिस जगह मकान-दुकान है, वहीं मकान-दुकान दी जाए। पार्थ भाई ने बताया कि शहर का विकास हो ये जरूरी है, लेकिन हमें भी न्याय मिलना चाहिए। हम सालों से यहां व्यापार कर गुजारा कर रहे हैं। कुछ लोग 100 साल पुराने भी हैं। 6 तारीख को नोटिस मिला और 12 तारीख को खाली करने को कहा है। 1995 में हमारी दुकान का 16 % हिस्सा रोड जा चुका है।

जरूरत नहीं थी तो कब्जा नही लिया, अब मेट्रो के लिए चाहिए
मनपा के टाउन प्लानर मनीष डॉक्टर ने बताया कि मनपा की ओर से वर्ष 2002 में वहां डिस्ट्रिक्ट सेंटर बनाने की योजना थी। इसलिए वहां के लोगों को जमीन सम्पादन करने को कहा था। उस समय प्रोजेक्ट आगे नही बढ़ पाया, इसलिए आगे की कार्रवाई नहीं की गई। अब जब मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए जमीन की आवश्यकता है, इसलिए फिर से भूमि संपादन प्रक्रिया शुरू की गई है। अभी मामला जमीन सम्पादन विभाग में है।

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