कोविड हाॅस्पिटल में अव्यवस्था:3 दिन से वार्ड में बिखरा मल-मूत्र मरीज बोले- हम नर्क में जी रहे हैंं

सूरत7 महीने पहले
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वार्ड की समय पर नहीं हो पा रही साफ-सफाई... - Dainik Bhaskar
वार्ड की समय पर नहीं हो पा रही साफ-सफाई...
  • 6वीं मंजिल के कोरोना वार्ड में तीन दिन से पानी नहीं

कोविड डेडिकेटेड अस्पताल में हालात बद से बदतर हो चुके हैं। यहां हर दिन किसी न किसी लापरवाही और अव्यवस्था की खबर अाती है। अब तो हालात एेसे हो गए हैं कि मरीज नर्क जैसी स्थिति में रहने को मजबूर हो गए हैं। सरकार ने जो दावे किए थे वे यहां कहीं दिखाई नहीं देते। कोविड अस्पताल के अंदर का एक वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो को वहां भर्ती एक मरीज ने बनाया है। इससे पता चलता है कि यहां इलाज ले रहे मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं।

पिछले तीन दिन से कोविड अस्पताल की 6वीं मंजिल पर पानी तक नहीं आ रहा है। मरीज खुले में शौच करने पर मजबूर हो गए हैं। पानी नहीं आने से मरीज बाथरूम और वार्ड के आसपास कहीं पर भी शौच कर रहे हैं। करीब 20 से 30 मरीज पिछले तीन दिन से दुर्गंध में जी रहे हैं।

नाम न छापने की शर्त पर 64 वर्षीय एक मरीज ने बताया कि पिछले तीन दिन से 6वीं मंजिल स्थित डी विभाग के बाथरूम में पानी ही नहीं आ रहा है। कमोड चोक हो गया है। इससे मरीज खुले में शौच कर रहे हैं। कोई साफ-सफाई करने वाला नहीं है। पूरा वार्ड दुर्गंध से भर गया है।

मैंने इसका वीडियो बना लिए है। मरीज ने कहा कि सरकार बाहरी दिखावे को छोड़ बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दें तो भी ठीक है। मरीज ऐसी हालत में कैसे ठीक होंगे। मैं यहां किस तरह से रह रहा हूं मैं ही जानता हूं। इस स्थिति से अच्छा है भगवान मुझे मौत दे दे।

सर्वेंट बोला: जो यहां आता है वह जिंदा वापस नहीं जाता

वार्ड में मरीजों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। न स्टाफ देखभाल कर रहा है न समय पर डॉक्टर आ रहे हैं। इससे रोज 70 से 100 मरीजों की मौत हो रही है। मरीज भूख-प्यास से तड़प रहे हैं। परिजन द्वारा लाया गया खाना-पानी भी मरीज तक नहीं पहुंच रहा है।

मरीज को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर देते हैं, लेकिन इसकी जानकारी परिजन को नहीं देते। यहां तक कि ओपीडी में भी मरीज दम तोड़ रहे हैं। मरीज को शिफ्ट कर रहे एक सर्वेंट ने कहा है कि यहां जो मरीज जाता है वह वापस नहीं आता।

वार्ड की समय पर नहीं हो पा रही साफ-सफाई...

मरीजों की संख्या बढ़ने से खाने-पीने की सुविधा न के बराबर हो गई है। कुछ निजी संस्थाएं खाना बांट रही हैं। एक अनुमान के अनुसार सिविल अस्पताल में करीब 800 वर्ग चार के के कर्मचारी हों तब जाकर स्थित सामान्य हो पाएगी। अभी 150 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं।

सर्वेंट बोला: जो यहां आता है वह जिंदा वापस नहीं जाता

वार्ड में मरीजों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। न स्टाफ देखभाल कर रहा है न समय पर डॉक्टर आ रहे हैं। इससे रोज 70 से 100 मरीजों की मौत हो रही है। मरीज भूख-प्यास से तड़प रहे हैं। परिजन द्वारा लाया गया खाना-पानी भी मरीज तक नहीं पहुंच रहा है।

मरीज को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर देते हैं, लेकिन इसकी जानकारी परिजन को नहीं देते। यहां तक कि ओपीडी में भी मरीज दम तोड़ रहे हैं। मरीज को शिफ्ट कर रहे एक सर्वेंट ने कहा है कि यहां जो मरीज जाता है वह वापस नहीं आता।

प्रबंधन: भर्तियां निकाली पर कोई आने को तैयार नहीं

हाल ही में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, स्वास्थ्य राज्यमंत्री और विधायकों ने सिविल अस्पताल का दौरा किया था। उन्होंने अच्छे इलाज का आश्वासन दिया था, लेकिन हालात जस के तस हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि डॉक्टर के साथ नर्स, सफाई कर्मचारियों और वार्ड कर्मियों की भारी कमी है।

हम कई बार भर्तियों के लिए आवेदन निकाल चुके हैं, लेकिन कोई आने को तैयार नहीं है। मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इलाज के लिए नए-नए वार्ड खोलने पड़ रहे हैं। वार्ड बढ़ रहे हैं, लेकिन स्टाफ की संख्या नहीं।

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