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ऑपरेशन में सफलता:ओलपाड की 85 साल की वृद्ध महिला के कूल्हे का सफल ऑपरेशन स्मीमेर के डॉक्टरों की टीम ने दो दिन में उन्हें चलने लायक बना दिया

सूरत2 महीने पहले
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धनलक्ष्मीबेन- बीपी, हाइपरटेंशन से ऑपरेशन मुश्किल था - Dainik Bhaskar
धनलक्ष्मीबेन- बीपी, हाइपरटेंशन से ऑपरेशन मुश्किल था
  • गिरने से महिला के कूल्हे की हड्‌डी फ्रैक्चर हो गई थी, स्मीमेर के डॉक्टरों ने 40 मिनट के ऑपरेशन में रिप्लेशमेंट कर दिया

कोरोना महामारी के दौरान स्मीमेर अस्पताल में नॉन कोविड मरीजों का इलाज हो रहा है। स्मीमेर के हड्‌डी और एनेस्थेसिया विभाग के डॉक्टरों ने ओलपाड़ की 85 वर्षीय धनलक्ष्मीबेन चौहान के कूल्हे का सफल ऑपरेशन किया। पुलिस चौकी के पास करसनपरा में रहने वाली लक्ष्मीबेन के कूल्हे की हड्‌डी गिरने से फ्रैक्चर हो गई थी। इसका रिप्लेसमेंट जरूरी था। स्मीमेर के ऑर्थोपैडिक विभाग के डॉ. जनक राठौड़ व उनकी टीम ने ऑपरेशन किया।

बीपी, हाइपरटेंशन से ऑपरेशन मुश्किल था

डॉ. पार्थ किनखाबवाला ने बताया कि महिला की उम्र अधिक थी और ब्लड प्रेशर, हाइपरमेंटशन की बीमारी भी थी। ऐसे में सर्जरी करना मुश्किल होता है। एनेस्थेसिया विभाग के डॉक्टरों की टीम ने दो दिन इलाज कर 27 अप्रैल को हिप रिप्लेशमेंट का ऑपरेशन किया।

महिला की उम्र अधिक होने से हडि्डयां खोखली हो गई थी, इसलिए हिप रिप्लेशमेंट सीमेंट भरना पड़ा। स्मीमेर के अॉर्थोपैडिक विभाग की टीम ने 35 से 40 मिनट में ऑपरेशन करके महिला को दूसरे ही दिन चलने-फिरने लायक बना दिया।

दादी फिर से चलने लगी, मुझे बहुत खुशी है

दादी को 16 साल से ब्लड प्रेशर है। पिछले हफ्ते चक्कर आने से दादी गिर गई और उनके कूल्हे में फ्रैक्चर हो गया था। परिवारवालों ने तुरंत स्मीमेर अस्पताल में भर्ती किया। स्मीमेर के ऑर्थोपैडिक विभाग के डॉक्टरों ने दावा किया था कि दादी दो दिन में चलने लगेंगी। दादी अब ठीक हैं मुझे इस बात की बहुत खुशी है।
-विरलभाई, धनलक्ष्मीबेन का पौत्र

82 वर्षीय बुजुर्ग ने कोरोना को दो बार हराया

वराछा की 82 वर्षीय राधाबेन भीकड़िया ने दो माह में कोरोना को दो बार मात दी। पहले मार्च में उन्हें कोरोना हुआ उसके बाद वह ठीक हुईं फिर अप्रैल में कोरोना हुआ और वह दाेबारा ठीक हो गईं। दोनों बार उनका इलाज घर पर ही डॉक्टर की निगरानी में हुआ। मूल पालिताणा तालुका सगापारा गांव निवासी राधाबेन काे 24 मार्च को बुखार सर्दी-खांसी की समस्या शुरू हुई।

सीटी स्कैन में पता चला फेफड़े में 15 परसेंट इन्वॉल्वमेंट है। राधाबेन का हॉस्पिटल से दवा देकर घर पर इलाज शुरू किया गया। ऑक्सीजन सप्लाई और दवा के साथ 18 दिन में वह ठीक हो गईं। 17 अप्रैल को उन्हें फिर कॉम्प्लीकेशंस शुरू हाे गए। जांच में पता चला कि उन्हें दाेबारा कोरोना हो गया। इलाज शुरू हुआ। 7 मई को राधाबेन ने कोरोना को हरा दिया।

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