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अब यादों में दिलीप कुमार:एक ऐसी शख्सियत कि जो उनसे एक बार मिल लेता था तो उनका ही हो जाता था; जो वादा करते थे, उसे पूरा जरूर करते थे

सूरतएक महीने पहले
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सूरत और दिलीप कुमार का यह यादगार मिलन 14 दिसम्बर 1985 को हुआ। - Dainik Bhaskar
सूरत और दिलीप कुमार का यह यादगार मिलन 14 दिसम्बर 1985 को हुआ।
  • एसवाईएमजी स्कूल बिल्डिंग के फंड रेजिंग समारोह के लिए आमंत्रित किया गया तो ट्रेन पकड़कर सूरत पहुंचे थे ट्रेजडी किंग

“दिलीप कुमार एक ऐसी शख्सियत थे, जिनसे कोई एक बार मिल ले तो भूल नहीं सकता। वे जो वादा कर देते थे तो उसे पूरा जरूर करते थे। अपना वादा पूरा करने के लिए दिलीप साहब पत्नी सायरा बानो के साथ पश्चिम एक्सप्रेस पकड़कर सूरत आ गए थे और दो दिन तक रुके।

अपनी पहली सूरत यात्रा में वे ऐसी छाप छोड़ गए कि आज तक उन्हें कोई नहीं भूल सका।” सूरत के पूर्व मेयर कदीर पीरदाजा ने भास्कर से बातचीत में कुछ इस तरह से दिलीप कुमार के साथ अपनी यादों को साझा किया। ट्रेजडी किंग के नाम से महशूर दिलीप कुमार 36 साल पहले सूरत आए थे और ऐसा काम कर गए कि लोग उन्हें कभी नहीं भूल पाएंगे।

उनकी बदौलत शहर में एक ऐसी मजबूत संस्था खड़ी हुई, जो आज हजारों बच्चों का भविष्य संवार रही है। सूरत और दिलीप कुमार का यह यादगार मिलन 14 दिसम्बर 1985 को हुआ। वे सूरत यंग मुस्लिम ग्रेजुएट एसोसिएशन(एसवाईएमजी) स्कूल के फंड रेजिंग फंक्शन में आए थे।

संस्था के संस्थापक एवं तत्कालीन चेयरमैन अब्दुल रहमान उस्मान सैयद और तत्कालीन सूरत मेयर कदीर पीरदाजा की पहल के कारण उनका सूरत आना हुआ। खास बात यह है कि इससे पहले सैयद और पीरदाजा दिलीप साहब मिले नहीं थे। वे सीधे मुंबई पहुंचे और उनसे मिले।

दिलीप साहब ने बड़ी आत्मीयता से मुलाकात की और उनसे वादा किया कि वे संस्था के लिए फंड जुटाने के लिए सूरत जरूर आएंगे। दिलीप कुमार ने अपना वादा निभाया और पत्नी सायरा बानो के साथ पश्चिम एक्सप्रेस से सूरत पहुंचे और उनकी मौजूदगी से अपेक्षा से अधिक फंड मिला।

तुरंत तैयार हो गए, नाम से फंड मिल गया

सैयद ने बताया कि हम 1984 में दिलीप कुमार से मुंबई में उनके निवास पर मिले और कहा फंड के लिए एक समारोह कर रहे हैं और आपको बुलाना चाहते थे। वे तुरंत आने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने पहले एक सोविनियर बनाने के लिए कहा। उनके जुड़ने से ही सोविनियर में 4-5 लाख रुपए एकत्र हो गए।

बेटी की शादी में आए

पूर्व मेयर पीरदाजा ने बताया कि पहली ही मुलाकात में दिलीप साहब से उनका गहरा नाता हो गया। वे हर साल दिलीप साहब को उनके जन्मदिन पर बधाई देते थे। मुंबई जाते थे तो दिलीप साहब के बंगले पर ठहरते थे। दिलीप कुमार बहुत जिंदादिल इंसान थे। मेरी बेटी की शादी में मैने उन्हें इन्वाइट किया। दिलीप साहब ने शादी में आने का वादा किया और यह वादा निभाया भी।

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