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जीएसटी की एक समान दर से व्यापारी परेशान:महंगा होगा सूरत का कपड़ा, जो साड़ी पहले जीएसटी के साथ 1025 रु. में मिलती थी, वही अब 1120 में मिलेगी

सूरत10 महीने पहले
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जीएसटी लागू होने के बाद से कपड़ा उद्योग में इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को लेकर चल 
रहा विवाद खत्म नहीं हो पा रहा है। - Dainik Bhaskar
जीएसटी लागू होने के बाद से कपड़ा उद्योग में इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को लेकर चल रहा विवाद खत्म नहीं हो पा रहा है।
  • कपड़ा उद्योग में यार्न से लेकर फिनिश्ड फैब्रिक तक 12 प्रतिशत जीएसटी देनी होगी

सूरत के कपड़ा उद्यमियों को जिस बात की चिंता थी आखिर वही हुआ। जीएसटी लागू होने के बाद से कपड़ा उद्योग में इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को लेकर विवाद चल रहा है। एक साल से कपड़ा व्यवसायी इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के अनुरूप व्यापार को ढालने में सफल हुए थे लेकिन सरकार ने फिर से इसमें परिवर्तन करते हुए इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को हटाकर सभी स्तर पर एक समान ड्यूटी लागू करने का फैसला किया है। 1 जनवरी से यार्न से लेकर फिनिश्ड फैब्रिक्स तक 12 प्रतिशत ड्यूटी लागू होगी।

अब तक यार्न पर 12 और फिनिश्ड फैब्रिक्स पर 5 प्रतिशत जीएसटी ड्यूटी थी। यार्न से लेकर फिनिश्ड फैब्रिक्स तक जीएसटी के अलग-अलग स्तर से कपड़ा व्यवसायी परेशान थे।फोस्टा इस फैसले के खिलाफ प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। इसमें मांग की है कि टैक्स 5% से 12% की अधिसूचना जारी की गई है उसे वापस लिया जाए। सरकार के इस कदम से उत्पादन में वृद्धि होगी।

जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक रहा है विवादों में
जीएसटी लागू होने को लगभग साढ़े चार साल बीत गया है, लेकिन यह विषय पहले दिन से ही विवादित रहा था। जीएसटी लागू हुआ तब से यार्न, ग्रे, प्रोसेसिंग और फिनिश्ड फैब्रिक्स पर जीएसटी का दर अलग था। यार्न पर 12 प्रतिशत, प्रोसेसिंग पर 5, ग्रे पर 5 और फिनिश्ड फैब्रिक्स पर 5 प्रतिशत ड्यूटी थी।
इस ढांचे के खिलाफ वीवर्स ने नाराजगी व्यक्त की थी। उन्हें यार्न खरीदते समय 12 प्रतिशत ड्यूटी चुकानी होती थी, ग्रे पर सिर्फ 5% ड्यूटी होने से उनके पास 7 प्रतिशत क्रेडिट रह जाती थी। इस तरह से उनके पास बड़ी रकम शेष रह जाती थी। सूरत के वीवर्स के लगभग 600 करोड़ रुपए इस तरह से क्रेडिट होने के कारण वीवर्स ने कोर्ट में गुहार लगाई है। हाईकोर्ट में वीवर्स के पक्ष में फैसला आने के बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है।

फिआस्वी ने सरकार से टैक्स स्ट्रक्चर को यथावत रखने की मांग की थी
जीएसटी स्ट्रक्चर के अलग-अलग दर को लेकर कपड़ा संगठनों में भी अलग-अलग विचार हैं। फैडरेशन ऑफ इंडियन आर्ट सिल्क वीविंग इंडस्ट्री ने इस बारे में सरकार से मांग की थी कि वर्तमान कपड़ा उद्योग में टैक्स स्ट्रक्चर को यथावत रखें। फिआस्वी के प्रमुख भरत गांधी ने कहा कि इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के कारण जो रिफंड का उपयोग वीवर नई मशीनें आदि खरीदने के लिए करते थे, लेकिन अब यह रुक जाएगा।

कपड़ा उद्योग को होगा लाभ, लेकिन सूरत की साड़ियां अब महंगी बिकेंगी
कपड़ा उद्योग में यार्न से लेकर तैयार कपड़े तक एक समान ड्यूटी लगा देने से कपड़ा व्यवसायियाें को लाभ होगा। लेकिन सरकार के इस फैसले से 500 की साड़ी जो कि जीएसटी के 5% के साथ 525 रुपए में मिलती थी, अब वह 560 रुपए में मिलेगी। वहीं 1000 रुपए वाली साड़ी जो 1025 रुपए में मिलती थी, वह 1120 में मिलेगी।
- नारायण अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन, सिंथेटिक रेयाॅन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल

फैसले से कारोबार प्रभावित होगा, प्रधानमंत्री को पत्र भेजा गया है
जीएसटी का दर बढ़ाने से कपड़ा महंगा होने के साथ ही सूरत का व्यापार प्रभावित होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपड़ों की कीमत बढ़ने के कारण निर्यात पर भी असर पड़ने की संभावना है। हम इस बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा गया है।
- चंपालाल बोथरा, महामंत्री, फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन

कैट ने नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग उठाई
यार्न, ग्रे और फैब्रिक पर 1 जनवरी से एक समान 12 फीसदी जीएसटी लागू होने का नोटिफिकेशन जारी करने पर देश भर के कपड़ा व्यापारियों में रोष फैल गया है। नोटिफिकेशन की जानकारी मिलते ही देश भर के कपड़ा संगठनों ने सूरत के कपड़ा व्यापरियों से संपर्क कर व्यापार करने काे लेकर चर्चा की। दिल्ली, आगरा, कानपुर, अमृतसर समेत कई मंडियों से फोस्टा को कॉल आने लगे। व्यापरियों में इसलिए चिंता है कि इस नोटिफिकेशन से सबसे ज्यादा समस्या का सामना ट्रेडर्स को ही करना पड़ेगा। 12 फीसदी में कपड़ा बेचना बड़ी चुनौती रहेगी।

12 फीसदी जीएसटी में कारोबार करना नामुमकिन की तरह है। अगर 12 फीसदी जीएसटी लागू कर दिया गया तो व्यापारियों को अपनी दुकानें बंद कर चाबी सरकार को दे देनी पड़ेगी। देश भर के व्यापारी फाेन कर अपना रोष जता रहे है।
- मनोज अग्रवाल, अध्यक्ष, फोस्टा

कैट ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से टेक्सटाइल पर 12 फीसदी जीएसटी लागू करने का नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग की है। 12% जीएसटी से टेक्सटाइल सेक्टर को फिर से मंदी का सामना करना पड़ेगा। वैसे ही टेक्सटाइल सेक्टर को कोविड महामारी में परेशानी से गुजरना पड़ा है।
- प्रमाेद भगत, गुजरात प्रमुख, कैट

​​​​​​​सरकार के इस फैसले से छोटे व्यापारियों के रोजगार का नुकसान भी होगा और बढ़ती कीमतों के कारण गरीबों द्वारा साड़ियों की खरीद पर भी रोक लगेगी। भारत में कुल बुनाई की ईकाइयों में से 33 प्रतिशत अकेले सूरत में स्थापित हैं। जिला उद्योग केंद्र सूरत के आंकड़ों के अनुसार सूरत में बुनाई ईकाइयों में 7 लाख से अधिक पावरलूम मशीनरी हैं। एमएमएफ कपड़ा उत्पादन का 60% भी अकेले सूरत में होता है। तो कपड़ा पर जीएसटी दर बढ़ाने के केंद्र सरकार के इस फैसले का सूरत सहित पूरे देश की बुनाई उद्योग पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। - आशीष गुजराती, अध्यक्ष, चैंबर

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