विरोध:शिक्षक जान खतरे में डालकर प्रश्न पत्र नहीं बांटेंगे

सूरतएक वर्ष पहले
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निजी स्कूल संगठन ने शिक्षा विभाग के आदेश को मानने से इनकार कर दिया है। संगठन ने कहा कि कोरोना के संक्रमण के बीच शिक्षक अपनी जान खतरे में नहीं डालेंगे। शिक्षा विभाग ने पिछले दिनों शिक्षकों को प्राथमिक छात्रों के घर-घर जाकर प्रश्न पत्र बांटने का आदेश दिया था।

शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन एजुकेशन के बीच 29 और 30 जुलाई को प्राथमिक स्कूल के बच्चों की परीक्षा लेने का निर्देश दिया था। शिक्षक पहले छात्रों के घर प्रश्न पत्र देने और उत्तर लिखने के बाद उसे लेने जाएंगे। निजी स्कूल संगठन ने कहा कि कंटेनमेंट जोन में रहने वाले छात्रों के घर जाने से शिक्षक भी संक्रमित हो सकते हैं।

परीक्षा रद्द करने की मांग: इन मुद्दों को रखा सामने 
1. लॉकडाउन में दूसरे राज्यों के 12 लाख से अधिक छात्र अपने गांव चले गए, जो अभी तक लौटकर नहीं आए हैं।
2. रेड जोन में होने की वजह से कपड़ा और हीरा उद्योग से जुड़े व्यापारी-कर्मचारी अभी अपने गांव में ही हैं। 
3. अभिभावक आॅनलाइन एजुकेशन का खुलकर विरोध कर रहे हैं, ऐसे में परीक्षा लेना ठीक नहीं होगा। 
4. लॉकडाउन में फीस न आने की वजह से शिक्षकों को वेतन नहीं मिला, इसलिए काम करने को तैयार नहीं हैं।

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