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लॉकडाउन / रोज कमाकर खाने वाले मजदूरों की स्थिति खराब, काम बंद होने से मजदूरी बंद, अब पेट भरने के लिए करनी पड़ रही है मशक्कत

The condition of the laborers who earn daily wages is bad, the wages are stopped due to the closure of the work, now it is difficult to fill the stomach
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The condition of the laborers who earn daily wages is bad, the wages are stopped due to the closure of the work, now it is difficult to fill the stomach

  • लॉकडाउन ने दिहाड़ी मजदूरों को इतना बेबस कर दिया कि उनके सामने पेट भरने का संकट खड़ा हो गया है

दैनिक भास्कर

Mar 26, 2020, 07:39 PM IST

सूरत.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात 8 बजे 21 दिन के लिए देश मे लॉक डाउन की घोषणा की, जिसमें जनता से पूरा सहयोग मांगा। इसके बाद से आवश्यक वस्तुओं की दुकानों में भीड़ देखने को मिली। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके पास रहने को घर नहीं और जेब में पैसे भी नहीं। रोज कमा कर खाने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई। शहर के चौक बाजार किले के पास आम दिनों में काम करने वाले मजदूरों की सुबह 8 बजे से 11 बजे के दौरान भारी भीड़ रहती है। उसी जगह अब दिन भर कुछ लोग दो वक्त के खाने की चिंता में गुजार रहे हैं। दिन भर किले के पास ऐसे 500 से अधिक लोग हैं, जिनकी जेब और पेट दोनों खाली है। आगामी 21 दिन तक इनके लिए भगवान ही मालिक है।

दैनिक भास्कर के प्रतिनिधि बुधवार दोपहर करीब 1.30 बजे चौक बाजार किले के पास परिसर में गए तो वहां करीब 500 से अधिक लोग ऐसे थे जो परेशान थे। खाने के लिए रुपए नही और रहने के लिए छत नही। 21 दिन क्या करेंगे यही बात वह बार बार करते रहे।

मार्केट दिहाड़ी मजदूरों की संख्या 5 लाख
मार्केट में पार्सल ले जाने वाले, टेम्पो वाले, पोटला उठाने वाले सहित करीब 5 लाख से अधिक लोग कपड़ा कारोबार से जुड़े हैं। फोस्टा, फोगवा और डायमंड एसोसिएशन ने राशन पहुंचाने समेत आवश्यकता अनुसार मदद करने की अपील की है।

लोगों की मदद को सामने आए पार्षद
कांग्रेस के कॉर्पोरेटर असलम साइकिलवाला, विजय पानसेरिया और भावेश रबारी ने मनपा से मिले अनुदान से 7.45 लाख और 10 लाख रुपए देने की घोषणा की है। कार्पोरेटरों ने ग्रांट की रकम से कोरोना के मरीजों के लिए आवश्यक साधन-सामग्री खरीदने के लिए कमिश्नर को पत्र लिखा है।

एसटी: एक दिन का वेतन सीएम राहत कोष में देंगे
सूरत एसटी विभाग के सभी अधिकारी- कर्मचारियों ने अपना एक दिन का वेतन कोरोना वायरस की महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय लिया है। जीएसआरटीसी द्वारा वर्ग- 1 के अधिकारी से लेकर वर्ग-4 तक के सभी कर्मचारियों और निगम में मान्यता प्राप्त तीन यूनियन की संकलन समिति द्वारा यह निर्णय लिया गया।

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