कोरोना काल में सिविल की लगातार लापरवाही / कोरोना संदिग्ध का शव 8 घंटे पड़ा रहा, अंतिम संस्कार नहीं कर परिजनों को दिया

The corona suspect's body was left for 8 hours, not cremated and given to relatives
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The corona suspect's body was left for 8 hours, not cremated and given to relatives

  • दो दिन पहले ही बॉडी मैनेजमेंट के लिए नियुक्त किए गए अधिकारी मृतक का अंतिम संस्कार तक नहीं करा पाए

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 06:25 AM IST

सूरत. सिविल अस्पताल में मंगलवार को भी एक गंभीर लापरवाही सामने आई। डॉक्टरों के विवाद और अनदेखी के कारण कोरोना संदिग्ध का शव 8 घंटे तक यहां से वहां होता रहा। दो दिन पहले ही डेड बॉडी मैनेजमेंट के लिए दो डॉक्टरों को नियुक्त किया गया था, फिर भी कोई सुधार नहीं हुआ। मंगलवार तड़के कोविड 19 अस्पताल में मरीज आया तो पता चला उसकी मौत हो चुकी है। इसके बाद डेड जाहिर करने के लिए डॉक्टरों में विवाद हो गया। जैसे तैसे शव को ट्रॉमा सेंटर स्थित सीएमओ ऑफिस लाया गया। काफी विवाद के बाद डेथ सर्टिफिकेट देकर शव को पीएम रूम में रखवा दिया गया। 
अमरोली छापरा भाटा गिरनार सोसाईटी निवासी कमलेश शांतिलाल प्रजापति (50) सोमवार सुबह पेट मे दर्द हुआ तो निजी अस्पताल ले गए। जांच में पता चला निमोनिया है। कोरोना के लक्षण भी मिल रहे थे। रात को निजी अस्पताल से सिविल के कोविड 19 अस्पताल रेफर कर दिया गया। सोमवार रात 2:31 बजे सिविल पहुंचने से पहले उसकी मौत हो गई। डेथ जाहिर करने के लिए सिविल में कोरोना के डॉक्टर तैयार नहीं हुए। ट्रॉमा सेंटर सीएमओ को फोन किया गया।

सीएमओ ने डेथ बॉडी मैनेजमेंट अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि यह उनका काम नहीं है। बाद में शव ट्रॉमा सेंटर लाया गया। मेडिकल ऑफिसर ने डेथ जाहिर किया और अंतिम संस्कार के लिए एकता ट्रस्ट को फोन किया, लेकिन वहां से  कहा गया कि आने में समय लगेगा। रात 2:31 बजे की डेड बॉडी सुबह 11:45 बजे परिजन ले गए और अंतिम संस्कार किया।

अधिकारी बोले- ये मेरा काम नहीं है
कोरोना संदिग्ध की मौत को हम कैसे डेथ जाहिर कर सकते हैं। फिर मैनेजमेंट का क्या काम होता है। मैंने डेथ बॉडी मैनेजमेंट के अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा- मुझे क्यों उठा दिया, ये मेरा काम नहीं है। -डॉ. उमेश चौधरी, मेडिकल ऑफिसर सिविल अस्पताल

एकता ट्रस्ट: गाड़ी खराब हो गई थी
एकता ट्रस्ट से दोपहर दो बजे संपर्क हुआ तो उनका कहना था को हमारी चार गाड़ी में दो खराब है। एक रिपेयर में है। हमारे कुछ स्टाफ कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। सिविल के साथ-साथ स्मीमेर और निजी अस्पतालों में भी जाना होता है, इसलिए देरी हो गई।

देर से जानकारी मिली, फिर भी प्रयास किया
मुझे जानकारी देर से मिली। फिर एकता ट्रस्ट को संपर्क करना शुरू किया पर किसी ने फोन नहीं उठाया। बाद में मेरी ट्रस्ट के एक आदमी से बात हुई तो उन्होंने शव का नाम और डिटेल वाट्सप करने के लिए कहा। मैनें कर दिया। सुबह साढ़े 10 बजे डिप्टी कलेक्टर को फोन किया उन्होंने अश्वासन दिया तो मैं अस्वस्थ हो गया। एकता वाले नहीं आए। परिजन फायर की एंबुलेंस ले आए तो शव दे दिया गया। -डॉ. चंद्रेश टेलर, डेथ बॉडी मैनेजमेंट अधिकारी सिविल

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