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कोरोना का पीक खत्म:अधिकारी बोले- 21 मार्च से पूरे अप्रैल तक रहा कोरोना का पीक, अब बेहतर हो रहे हालात

सूरत5 दिन पहले
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कोरोना को हराने वाले मरीजों के घर पहुंचने पर ऐसे हो रहा है स्वागत। - Dainik Bhaskar
कोरोना को हराने वाले मरीजों के घर पहुंचने पर ऐसे हो रहा है स्वागत।
  • अप्रैल में 100 RTPCR में आते थे 80 केस, अब 20-30
  • मौतें भी रोज 400-500 होती थीं, अब 150-200 हो रहीं

सूरत में कोरोना का पीक बीत चुका है। अब हम पीक से नीचे उतरने लगे हैं। यह कहना है माइक्रो बायोलाॅजिस्ट डॉ. फ्रेनिल मुनीम, सूरत के कोरोना नोडल ऑफिसर आईएएस एम थेन्नारसन और सिविल के कोरोना नोडल ऑफिसर आईएएस मिलिंद तोरवडे का। माइक्रो बायोलॉजिस्ट डॉ. फ्रेनिल मुनीम का कहना है कि आरटीपीसीआर टेस्ट में अब मात्र 400 से 500 तक केस ही आ रहे हैं। केस में 50% कमी आई है।

अच्छी बात यह है कि उस समय म्यूट्रेंट जितना फैलना था फैल चुका अब इसकी क्षमता कम हो गई है। इसमें लोगों की सतर्कता काफी अहम है। बड़ी संख्या में लोग जा चुके हैं। अब हर 100 आरटीपीसीआर टेस्ट में 20 से 30 मरीज मिल रहे हैं। इससे पहले अप्रैल में 100 टेस्ट में 80 मरीज मिल रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का पीक 21 मार्च से पूरा अप्रैल तक रहा।

उस दौरान में रोज 500 से 600 नए गंभीर मरीज अस्पताल आ रहे थे। अकेले सिविल अस्पताल में रोज 350 से अधिक मरीज एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचते थे। अब इनकी संख्या 60 से 80 तक हो गई है। अब 150 से 200 गंभीर मरीज रोज अस्पताल पहुंच रहे हैं। अप्रैल में रोज 400 से अधिक मौतें होती थीं जो अब 150 से 200 तक पहुंच गई है। डॉक्टरों का कहना है कि अभी जो मौतें हो रही हैं वह पीक में आए गंभीर मरीजों की हो रही हैं।

इस सात कारणों से कंट्रोल में कोरोना

1 पांच लाख से ज्यादा प्रवासी अपने गांव जा चुके हैं 2 मिनी लॉकडाउन से संक्रमण के फैलाव पर रोक लगी 3 लोगों ने मास्क की अहमियत समझी, और लगाने लगे

4 सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक से संक्रमण रुका 5 वैक्सीनेशन से और कोरोना से काफी लोग ठीक हुए। इनमे हर्ड इम्युनिटी बन गई

6 भयावह स्थिति देख लोग सतर्क हुए और घर से निकलना कम किया 7 वायरस है उसके म्यूटेंट पूरे अप्रैल तक जितना फैल सका उतना फैल चुका।

अस्पतालों में अब ऑक्सीजन वाले बेड खाली पर वेंटिलेटर की समस्या अभी भी

सिविल स्मीमेर और 300 निजी अस्पतालों में अब ऑक्सीजन वाले बेड खाली हो रहे हैं। मरीजों को एडमिशन मिल रहा है लेकिन वेंटिलेटर की समस्या अभी भी बनी हुई है। कोरोना पिक के समय वेंटिलेटर के मरीजों की संख्या बढ़ती गई। वहीँ ऑक्सीजन वाले बहुत मरीज वेंटिलेटर पर चले गए।

डॉक्टरों का कहना है कि वेंटिलेटर के मरीजों का इलाज लम्बे समय तक चलता है इसलिए वेंटिलेटर खाली नहीं हो पा रहे हैं। सूरत के अस्पतालों में सबसे ज्यादा मरीज नवसारी, वापी, चिखली, डांग, वांसदा, अमलसड जैसे तालुका और जिले के मरीज ज्यादा भर्ती हैं।

टेस्टिंग में नहीं हुई कोई कमी |सूरत में रोज 30000 टेस्ट हो रहे हैं। इसमें 8 से 9 हजार आरटीपीसीआर जांच हो रही हैं। बाकी अन्य रैपिड टेस्ट हो रही है। मार्च के अंतिम हफ्ते में जब केस बढ़ने लगे थे तो टेस्टिंग की संख्या बढ़ाई गई है थी। 15 हजार से बढ़ा कर अब 30 हजार टेस्टिंग हो रही है। अच्छी बात यह है कि 23 अप्रैल को सबसे ज्यादा 2817 मामले आए उसके बाद से ही मरीज घटने लगे।

अस्पतालों मे मरीज घटने से ऑक्सीजन की खपत में 15 मीट्रिक टन कमी आई
कोरोना के नए मरीज पिछले हफ्ते से घट रहे हैं, जबकि डिस्चार्ज होने मरीज बढ़ रहे हैं। इससे अस्पतालों में बेड खाली हो रहे हैं। अब ऑक्सीजन की खपत 15 मीट्रिक टन खपत कम हुई है। 15 से 20 अप्रैल तक सूरत में रोज 215 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही थी। इसमें से 20 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की कटौती के बाद 195 मीट्रिक टन खपत हो रही थी। इस समय सूरत में रोज 170 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है।

विशेषज्ञों की मानें तो आगामी 15 दिनों में रोज मात्र 100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत होगी। खपत में 70 मीट्रिक टन की कमी अाएगी। सिविल और स्मीमेर अस्पताल में रोज 115 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत होती थी। उसके बाद सरकार ने सिविल अस्पताल को रोज 46 मीट्रिक टन और इसी में स्मीमेर अस्पताल को 25 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देने का आदेश दिया। इससे दोनों अस्पतालों ने मरीज भर्ती करना बंद कर दिया था। अब अाॅक्सीजन की जरूरत वाले मरीज घटने से अस्पतालों में ऑक्सीजन वाले बेड उपलब्ध हैं।

21 मार्च से अप्रैल माह तक कोरोना का पीक था। तब रोज 1000 से अधिक आरटीपीसीआर जांच होती थी। हर 100 टेस्ट में 80 में कोरोना मिलता था अब यह संख्या 20 से 30 हो गई है। यहां कोरोना का पीक खत्म हो गया। अब हम डिक्लाइनिंग ट्रेंड की तरफ जा रहे हैं। -डॉ. फ्रेनिल मुनीम, माइक्रो बायोलॉजिस्ट

कोरोना के केस कम हो रहे हैं। वैक्सीनेशन और सोशल डिस्टेंसिंग को हमें छोड़ना नहीं है। यह वायरस है लापरवाही होने पर फिर से वेग में आ सकता है। अभी हम कोरोना पीक से नीचे की ओर जा रहे हैं। ऐसी ही स्थिति तो जल्द और बेहतर स्थिति में होंगे।
-मिलिंद तोरावडे, आईएएस, कोरोना नोडल ऑफिसर, सिविल

15-20 दिन में हम और भी बेहतर स्थिति में होंगे। कोरोना कंट्रोल में है। ओपीडी और आईपीडी में कमी आई है। पीक से हम नीचे की तरफ जा रहे हैं। केस घट रहे हैं। हमने टेस्टिंग कम नहीं की है। इससे यह साफ है कि सूरत शहर में कोरोना का पीक खत्म हो गया है।
-एम थेन्नारसन, आईएएस, कोरोना नोडल ऑफिसर, सूरत

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