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हाईकोर्ट ने कहा:सरकार को गुमराह करने वाले अधिकारी सस्पेंड होने चाहिए, आदेश का पालन न करने वाले अफसरों पर जताई नाराजगी

अहमदाबाद16 दिन पहले
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गुजरात हाईकोर्ट ने कोर्ट के आदेशों का पालन न करने वाले सरकारी अधिकारियों पर नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस ने फटकार लगाते हुए कोर्ट के आदेश के बावजूद भी रकम न भरने के कारण इसके ब्याज का भार सरकार पर पड़ता है। जो केवल करदाताओं की राशि से जाता है। इसलिए ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उन्हें निलंबित किया जाए।

अदालत की अवमानना ​​के आदेश पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मुख्य न्यायाधीश ने लोक अभियोजक से मुख्य सचिव को उपस्थित रहने को कहा है। बाद में महाधिवक्ता को बुलाकर सरकारी अधिकारियों ने रवैये की ओर ध्यान दिलाया और कहा कि आदेश के अनुपालन को लेकर अधिकारी 20-25 पेज का हलफनामा दाखिल कर अदालत को गुमराह कर रहे हैं।

साथ ही हर साल ब्याज भुगतान में करोड़ों रुपये का नुकसान होता है, ऐसा नहीं होना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से सरकार पर आर्थिक बोझ पड़ता है। जिसके लिए अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो अवमानना ​​मामले में सचिव को उपस्थित होना पड़ेगा। महाधिवक्ता ने अदालत से यह भी कहा कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी और इस पर विचार किया जाएगा।

मोरबी के सिंचाई विभाग में कार्यरत कर्मचारियों ने सेवा के 15 वर्ष पूरे कर लेने के बाद उन्हें स्थायी करने और उसी के अनुसार लाभ देने के लिए आवेदन किया था। किस मामले में एकल न्यायाधीश की पीठ ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया और आपको स्थायी करने और दो महीने के भीतर सभी लाभों का भुगतान करने का आदेश दिया है।

साथ ही दो माह के भीतर आदेश का पालन नहीं करने पर राशि ब्याज सहित देने को भी कहा। जिसका पालन न करने पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट के आदेश की अवमानना ​​करने की मांग की। जिसके बाद विभाग ने अन्य लाभ की पेशकश की लेकिन ब्याज का लाभ और छुट्टी को नकद में बदलने का प्रावधान नहीं किया, जिसका अदालत ने विरोध किया।

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