पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Gujarat
  • The Shortage Of Teachers In The Schools Of The Committee Has Now Stopped Giving Admission.

हिंदी स्कूलों के साथ भेदभाव क्यों:समिति के स्कूलों में शिक्षकों की कमी अब तो प्रवेश देना ही बंद कर दिया

सूरत16 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
कैसे पढ़ाएंगे गुरुजी? - Dainik Bhaskar
कैसे पढ़ाएंगे गुरुजी?
  • 780 छात्रों के बीच केवल 8 शिक्षक हैं

सूरत महानगर पालिका की समिति की स्कूल में शिक्षक नहीं होने का नुकसान छात्रों को उठाना पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि स्कूल में सीटों की कोई कमी है, लेकिन शिक्षकों की कमी को देखते हुए कई स्कूलों ने प्रवेश देना ही बंद कर दिया है।

इधर, परेशानी यह है कि सरकार शिक्षकों की भर्ती के लिए कोई निर्देश नहीं दे रही है, दूसरी तरफ जो गिने-चुने शिक्षक बचे हुए हैं, उनका भी ट्रांसफर का ऑर्डर दे दिया गया है। इसलिए फिलहाल जो शिक्षक पढ़ा रहे हैं, उन्हें भी अब कभी भी जाना पड़ सकता है। इन सबका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

इस मामले में भाजपा के कॉर्पोरेटर भी खुलकर सामने आ गए हैं। उनका कहना है कि हिंदी भाषियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ठीक नहीं। इसलिए तुरंत शिक्षकों की भर्ती की जाए। इधर, अभिभावक संदीप यादव ने कहा कि बच्चे को स्कूल में प्रवेश दिलाने को गए थे। लेकिन कहा गया कि अभी प्रवेश नहीं मिल रहा है। लेकिन बाद में दूसरी स्कूल में पूछने पर पता चला की प्रवेश चालू है।

12 में 4 का ट्रांसफर कर दिया गया

समिति के हिंदी माध्यम की स्कूल क्रमांक 91 और 276 में 1032 छात्र पढ़ाई करते हैं। 91 नंबर स्कूल में 780 छात्रों के बीच केवल 12 िशक्षक ही है। इसमें से 4 शिक्षकों का ट्रांसफर कर दिया गया है। इसलिए अब 8 शिक्षक ही काम करेंगे।

स्कूल नंबर 276 में 252 छात्र हैं। इसमें 11 शिक्षक हैं लेकिन 3 को अहमदाबाद ट्रांसफर कर दिया गया है। इसलिए 8 शिक्षक ही बचेंगे। इससे शिक्षकों पर ज्यादा भार आएगा। यही नहीं, इस सत्र में प्रवेश के बाद शिक्षकों पर बोझ और बढ़ जाएगा।

भर्ती निकालते हैं पर शिक्षक ही नहीं मिलते, क्या करें: शासनाधिकारी

शासनाधिकारी विमल देशाई ने कहा कि सरकार की तरफ से बार-बार शिक्षकों की भर्ती के लिए आवेदन मंगाए जाते हैं। लेकिन ऐसे शिक्षक मिलते ही नहीं। इसलिए यह समस्या है। गुरुवार को भर्ती के लिए कैम्प रखा गया है। अभी तक इसमें हिंदी माध्यम के लिए मात्र 4-5 लोग ही मिले हैं।

और बढ़ सकती है शिक्षकों की परेशानी

शिक्षकों की भर्ती नहीं होने की वजह से स्कूल में अब छात्रों को प्रवेश ही नहीं दिया जा रहा है। शिक्षकों ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को गिने-चुने शिक्षक कैसे पढ़ाएंगे। नया सत्र भी शुरू हो रहा है। इससे परेशानी और बढ़ने वाली है। बच्चों को इतने कम शिक्षक कैसे पढ़ा पाएंगे। इसलिए फिलहाल स्कूलों में प्रवेश बंद कर दिया गया है।

हिंदी माध्यम के 170 शिक्षकों की फिलहाल जरूरत

वर्ष 2018 में शिक्षकों की भर्ती के लिए कैंप का आयोजन किया गया था। इसमें 150 पदों की भर्ती के लिए मात्र 12 शिक्षक आए थे। इसके बाद कोई भर्ती नहीं हुई। इसलिए पद खाली हैं। हिंदी माध्यम में 170 शिक्षकों की आवश्यकता है।

दूसरी संस्थाओं ने भी स्कूलों को शिक्षक देने बंद कर दिए

मनपा को कई अलग अलग संस्थाओं की तरफ से शिक्षक दिए जाते थे। लेकिन कोरोना के बाद संस्थाओं ने समिति को शिक्षक देना बंद कर दिए। इसकी वजह से अब समिति में शिक्षकों की कमी की समस्या खड़ी हुई है।

खबरें और भी हैं...