मोदी को मिली क्लीन चिट बरकरार:गुजरात दंगों में सुप्रीम कोर्ट ने जकिया की याचिका खारिज की, BJP बोली- लेफ्ट गैंग पीछे पड़ा था

अहमदाबाद3 महीने पहले

2002 गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली SIT रिपोर्ट के खिलाफ याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह याचिका जकिया जाफरी ने दाखिल की थी। जकिया जाफरी के पति एहसान जाफरी की इन दंगों में मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जकिया की याचिका में मेरिट नहीं है।

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि PM मोदी के खिलाफ जो ईकोसिस्टम चल रहा था, उसे झटका लगा है। PM के पीछे लेफ्ट गैंग पड़ा था। कांग्रेस और कुछ पार्टियों की मदद से अपनी दुकान चलाने वालों को आज झटका लगा है, सच देश के सामने है।

जकिया ने मजिस्ट्रेट के आदेश को दी थी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SIT ने गुजरात दंगों की जांच की थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SIT ने गुजरात दंगों की जांच की थी।

72 साल के एहसान जाफरी कांग्रेस नेता और सांसद थे। उन्हें उत्तरी अहमदाबाद में गुलबर्ग सोसाइटी के उनके घर से निकालकर गुस्साई भीड़ ने मार डाला था। जकिया ने दंगे की साजिश के मामले में मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी थी।

मजिस्ट्रेट ने SIT की उस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया था, जिसमें तत्कालीन CM नरेंद्र मोदी समेत 63 लोगों को दंगों की साजिश रचने के आरोप से आजाद किया गया था। हाईकोर्ट भी इस फैसले को सही करार दे चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2021 में फैसला सुरक्षित रखा
यह मामला जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने सुना। सुप्रीम कोर्ट ने जकिया की याचिका पर सिर्फ 14 दिन में सुनवाई पूरी की और 9 दिसंबर 2021 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, SIT की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और गुजरात की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं।

सिब्बल की दलील- अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया
इसे केस में याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि SIT ने मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जांच नहीं की। इससे साबित होता कि पुलिस इस केस में एक्टिव नहीं रही। सिब्बल ने यह भी कहा कि SIT ने जिस तरह जांच की उससे लगता है कि वह कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है।

SIT की दलील- हमने अपना काम किया
SIT के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा- किसी को नहीं बचाया गया और पूरी छानबीन गहराई से हुई है। कुल 275 लोगों से पूछताछ हुई। कोई ऐसा सबूत नहीं मिला जिससे साजिश की बात साबित होती हो।

अपने पति एहसान जाफरी की तस्वीर के साथ जकिया जाफरी।
अपने पति एहसान जाफरी की तस्वीर के साथ जकिया जाफरी।

जकिया ने हत्या का केस दर्ज करने की मांग की थी
गुजरात दंगों के बाद जकिया ने 2006 में राज्य के DGP (पुलिस महानिदेशक) के सामने नरेंद्र मोदी, कई अफसरों और नेताओं के खिलाफ शिकायत की थी। जकिया की मांग थी कि इन लोगों के खिलाफ हत्या समेत कई अन्य धाराओं में FIR दर्ज की जाए। तब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

सुप्रीम कोर्ट ने SIT गठित की थी
2008 में सुप्रीम कोर्ट ने SIT का गठन किया। उसे इस मामले में हुईं तमाम सुनवाइयों पर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। बाद में जकिया की शिकायत की जांच भी SIT को सौंपी गई। SIT ने मोदी को क्लीन चिट दी और 2011 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर SIT ने मजिस्ट्रेट को क्लोजर रिपोर्ट सौंपी।

2013 में जकिया ने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करते हुए मजिस्ट्रेट के सामने याचिका दायर की। मजिस्ट्रेट ने यह याचिका खारिज कर दी। इसके बाद जाकिया ने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने 2017 में मजिस्ट्रेट का फैसला बरकरार रखा। तब जकिया ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

साल 2002 में गुजरात दंगों के दौरान हुआ था गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड।
साल 2002 में गुजरात दंगों के दौरान हुआ था गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड।

क्या है गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड मामला
गोधरा कांड के बाद 2002 में गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। उपद्रवियों ने पूर्वी अहमदाबाद स्थित अल्पसंख्यक समुदाय की बस्ती 'गुलबर्ग सोसाइटी' को निशाना बनाया था। इसमें पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे। इनमें से 38 लोगों के शव बरामद हुए थे, जबकि जाफरी सहित 31 लोगों को लापता बताया गया।

रविशंकर बोले- मोदी विरोध के नाम पर और कितने दिन दुकान चलाएंगे

SC के फैसले के बाद पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ।
SC के फैसले के बाद पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ।

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- SIT ने गुजरात के उस समय के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को 9 घण्टे तक इंटेरोगेट किया, लेकिन एक दिन भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध नहीं किया। आज देश में कांग्रेस के जो भी एक दो मुख्यमंत्री बचे हैं, वो कामधाम छोड़कर दिल्ली में धरना दे रहे हैं।

आज हम कांग्रेस, वामपंथियो और अन्य से पूछना चाहते हैं कि आपकी पूरी दुकान जो पिछले 20 साल से नरेन्द्र मोदी जी के विरोध पर चल रही थी, उसे आप कितने दिन और चलाएंगे।