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आंकड़ों का भ्रष्टाचार:अप्रैल में कोरोना से तीन बच्चों की माैत हुई लेकिन सरकारी आंकड़ों में एक भी दर्ज नहीं

सूरत3 महीने पहले
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5 अप्रैल: 13 साल के बच्चे की मौत, 14 अप्रैल: 14 दिन की नवजात की मौत, 16 अप्रैल: 11 दिन की बच्ची की मौत - Dainik Bhaskar
5 अप्रैल: 13 साल के बच्चे की मौत, 14 अप्रैल: 14 दिन की नवजात की मौत, 16 अप्रैल: 11 दिन की बच्ची की मौत
  • अधिकारी बोले- डेथ ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर तय होते हैं कोरोना से मौत के आंकड़े

कोरोना से हुई माैत के मामले में सरकारी आंकड़ों में खेल किया जा रहा है। कई माैतों को इसमें शामिल ही नहीं किया जा रहा है। अप्रैल में सूरत में 15 साल से कम उम्र के 3 बच्चों की मौत कोरोना से हुई थी, लेकिन सरकारी आंकड़ों में उन्हें कोई स्थान नहीं दिया दिया गया। ये बच्चे 14 दिन, 11 दिन और 13 साल के थे। हालांकि इन बच्चों को और भी कई बीमारियां थीं, लेकिन यह हकीकत है कि ये कोरोना पाॅजिटिव भी थे।

जब इनकी माैत हुई तो उस समय ये कोरोना से जंग लड़ रहे थे। शहर में इसी तरह से अन्य मरीजों की माैतों को भी कोरोना में शामिल नहीं किया जा रहा है, जबकि माैत के समय वे पाॅजिटिव थे। कोविड प्रोटोकॉल से रोज 100 से 150 शवों का अंतिम संस्कार तो किया जा रहा है, लेकिन सरकारी आंकड़ों में कोरोना से रोज सिर्फ 20 से 25 ही माैतें दर्ज की जा रही हैं। कई तो ऐसे मामले भी अाए हैं, जिनमें कोरोना पाॅजिटिव की माैत के बाद उसकी रिपोर्ट निगेटिव बना दी गई। श्मशान में जल रहे शवों की संख्या सरकारी आंकड़ों से अलग है।

मजूरा: 13 साल के ध्रुव की माैत, सांस की समस्या के साथ भर्ती था

मजूरा फायर स्टेशन के पास स्थित साची अस्पताल में एक 13 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। माैत के समय यह बच्चा भी कोरोना पाॅजिटिव था। बच्चे का नाम ध्रुव था। मोटा वराछा में डी-मार्ट के पास भवानी हाइट्स में रहने वाले भावेश भाई कोराट के 13 वर्षीय बेटे ध्रुव को शुरू में कोरोना के लक्षण नजर नहीं आए थे।

उसे सांस लेने में दिक्कत हुई तो अस्पताल ले जाया गया। वहां एंटीजन टेस्ट कराया, तो रिपोर्ट पाॅजिटिव आई। उसकी हालत बिगड़ी तो साची चाइल्ड अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। उसका इलाज पांच घंटे ही चला था कि रात 1 बजे उसकी माैत हो गई। ध्रुव की माैत को भी कोरोना से होने वाली माैतों में जगह दी गई।

कोरोना की दूसरी लहर बच्चों की लील रही
कोरोना की पहली लहर में एक भी पॉजिटिव बच्चे की मौत नहीं हुई थी। दूसरी लहर बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है। इसमें अब तक कई बच्चे पॉजिटिव हो चुके हैं। हालांकि ज्यादातर बच्चे रिकवर हो चुक हैं, लेकिन तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। इस बार बच्चों को लेकर ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। कोरोना की दूसरी लहर में बच्चों के साथ युवाओं की भी मौत हुई है।

नानपुरा: 5 दिन वेंटिलेटर पर रही 11 दिन की बच्ची की मौत

16 अप्रैल को 11 दिन की बच्ची की माैत हो गई थी। माैत के समय वह कोरोना पाॅजिटिव थी। उसका जन्म नाना वराछा स्थित डायमंड हॉस्पिटल में हुअा था। वहीं पर उसका इलाज भी चल रहा था। उसकी कोविड रिपोर्ट पाॅजिटिव आई थी। बच्ची 4-5 दिन तक वेंटिलेटर पर रही। बच्ची की जान बचाने के लिए पूर्व महापौर डॉ. जगदीश पटेल ने प्लाज्मा भी दान दिया था। इस बच्ची के माता-पिता भी कोरोना पाॅजिटिव थे। सूरत डायमंड एसोसिएशन द्वारा संचालित डायमंड अस्पताल के डॉक्टरों ने प्लाज्मा के साथ अन्य इलाज भी दिया, लेकिन बच्ची को नहीं बचा पाए।

कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा बनाने के लिए टीम है, डेथ रिपोर्ट देखकर बना रहे आंकड़ा

  • डेथ ऑडिट की रिपोर्ट के आधार पर कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत के आंकड़े तय किए जाते हैं। इस काम के लिए टीम काम करती है। इसमें देखा जाता है कि मौत किस कारण से हुई। उसी के मुताबिक एंट्री की जाती है। - डॉ. रिकिता पटेल, स्वास्थ्य अधिकारी, मनपा

सिविल: 14 दिन की पॉजिटिव नवजात की 11 दिन इलाज के बाद हुई थी मौत

14 दिन की नवजात का इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा था। वह कोरोना पॉजिटिव थी। 11 दिन के इलाज के बाद 14 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को किडनी और मिर्गी की भी बीमारी थी। इलाज के दौरान बच्ची की सेफ्टीसेमिया से मौत हो गई। सिर्फ 14 दिन के कोरोना पाॅजिटिव मासूम की माैत का यह पहला मामला था।

मृतक नवजात के पिता रोहित वसावा ने बताया कि जन्म के तीसरे दिन ही बेटी को सर्दी-खांसी की शिकायत हुई थी। डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची को किडनी और मिर्गी की शिकायत है। व्यारा के एक अस्पताल में दिखाया तो अलग-अलग जांच कराई गई। कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। डॉक्टरों ने तुरंत सूरत सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। बच्ची का वजन 2 किलो 800 ग्राम था। घर में कोई और पॉजिटिव नहीं था।

अब तक 400 से अधिक बच्चे हो चुके हैं कोरोना पॉजिटिव
कोरोना की दूसरी लहर में अब तक शहर के 400 से अधिक बच्चे कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। इनमें नवजात से लेकर 10 साल से अधिक उम्र के बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों का सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज हुआ। कुछ बच्चों का इलाज अभी चल रहा है। हालांकि अधिकतर बच्चों ने कोरोना को हरा दिया है। पांच साल से कम उम्र के कई बच्चे ठीक होकर अपने घर आ चुके हैं। बच्चों को कोरोना हो रहा है, लेकिन वे हंसते खेलते ठीक हो रहे हैं। उन बच्चों के लिए समस्या है, जिन्हें अन्य बीमारियों के साथ कोरोना हो रहा है।

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