22 बच्चों की मौत की बरसी आ गई / अभी तक आरोप तक तय नहीं हो पाए, 14 में से 4 आरोपी जमानत पर छूट गए

Till now the charges have not been settled, 4 out of 14 accused have been released on bail.
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Till now the charges have not been settled, 4 out of 14 accused have been released on bail.

  • तक्षशिला कांड का एक साल, दो आरोपी जमानत पर छूटकर ड्यूटी भी कर रहे
  • एसीबी ने दो आरोपियों के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति का मामला दर्ज किया

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 06:54 AM IST

सूरत. पिछले साल 24 मई 2019 को तक्षशिला आर्केड में आग लगने से 22 बच्चों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद 23 जुलाई तक कुल 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। आरोपियों पर अब चार्ज फ्रेम की प्रक्रिया चल रही है। एक साल से आरोपियों पर केस चल रहा है। इसमें से 4 आरोपियों को जमानत पर छोड़ दिया गया है। शेष लाजपोर जेल में हैं। जमानत पर रिहा हुए चार में से दो आरोपियों ने कोरोना महामारी में इमरजेंसी के चलते फिर से अपनी नौकरी ज्वॉइन कर ली है। एसीबी ने दो आरोपियों के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति का मामला दर्ज किया है। पुलिस थाने में अभी भी सीआरपीसी की धारा 173 (8) के तहत कार्रवाई चल रही है।

एंटी करप्शन ब्यूरो ने दो आरोपियों के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति का मामला भी दर्ज किया है  

1. जिग्नल पाघड़ाल: बिल्डर जिग्नल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ था। जिग्नल तक्षशिला आर्केड में तीसरी और चौथी मंजिल के मालिक हैं। इन्हें 8 जुलाई 2019 को जमानत मिली थी।    
2. सवजी पाघडाल- जिग्नल के पिता हैं और बिल्डर हैं। अभी लाजपोर जेल में बंद हैं। 
3. हरसुख वेकरिया- जिग्नल के पार्टनर हैं और दूसरी, तीसरी, चौथी मंजिल के मालिक हैं। अभी जेल में बंद हैं।    
4. रविंद्र कहार- तीसरी मंजिल के पार्टनर हैं अभी लाजपोर जेल में हैं।  
5. भार्गव बुटानी- क्लासेज संचालक है। अवैध निर्माण भी करवाया था। अभी जेल में है।  
6. दीपक नायक- डीजीवीसीएल अधिकारी है। क्लासेज को गैरकानूनी कनेक्शन दिया था। 
ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो रहा था। इसकी जांच नहीं की थी। हाईकोर्ट से 3 दिसंबर 2019 को जमानत मिली थी।
7. वीनू परमार- मनपा के डिप्टी इंजीनियर वीनू परमार ने साइट विजिट नहीं की थी। अभी जेल में है। इनके खिलाफ एसीबी में आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है।
8. पराग मुंशी- मनपा के कार्यकारी इंजीनियर पराग के पास रेगुलराइजेशन के लिए फाइल गई थी। इम्पेक्ट फीस लेने के बाद अवैध डोम को मंजूरी दी थी। अभी जेल में है। 
9. कीर्ति मोढ़- फायर अधिकारी हैं। इन्होंने फायर सेफ्टी की चेकिंग नहीं की थी। आगम आर्केड में आग लगने के बाद फायर विभाग को निर्देश दिए गए थे कि क्लासेज, मॉल की बाकायदा जांच की जाए। फायर सेफ्टी न होने के बाद भी बिल्डिंग को सील नहीं किया था। इन्हें 3 दिसंबर को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। लिंबायत जोन में ड्यूटी कर रहे हैं। 
10. संजय आचार्य- फायर अधिकारी हैं। इन्हें 3 दिसंबर को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। कोविड-19 के चलते इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे हैं। संजय आचार्य के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने आय से अधिक का मामला दर्ज किया है। इसकी भी जांच हो रही है।  
11. जयेश सोलंकी- सर्टिफिकेट को रेगुलराइजेशन देने के बाद इम्पेक्ट फीस ली थी, पर साइट विजिट नहीं की और सर्टिफिकेट दे दिया था। अभी जेल में है।
12. अतुल गोरसावाला- जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत अतुल ने उस समय पराग मुंशी के साथ साइट विजिट नहीं किया था।
13. हिमांशु गज्जर- मनपा के डिप्टी इंजीनियर हिमांशु गज्जर कॉम्प्लेक्स बनते समय कोई जांच नहीं की थी। अब रिटायर्ड हो गए हैं और लाजपोर जेल में बंद हैं। 
14. दिनेश वेकरिया- हरसुख वेकरिया के भाई हैं। हरसुख ने फाइल दिनेश के नाम से बनाई थी। इसलिए इन्हें भी आरोपी बनाया गया है। दिनेश वेकरिया भी अभी जेल में हैं।

मनपा रेफ्यूज एरिया, बिल्डिंग इंश्योरेंस, फसाड़ का सख्ती से करा रही पालन

तक्षशिला अग्निकांड के दाेषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है। तक्षशिला आर्केड में बहुत कम स्पेस था, प्रवेश और निकास के लिए एक ही रास्ता और सीढ़ी की चौड़ाई डेढ़ मीटर थी। गलत एलिवेशन और अवैध निर्माण की वजह से 22 बच्चों की जान गई । मनपा ने सभी बिल्डिंगों में इन सब बातों पर विशेष ध्यान दे र ही है। रेफ्यूज एरिया, इंश्योरेंस, फसाड का सख्ती से पालन किया जा रहा है। मनपा द्वारा इसके लिए गठित कमेटी मैटेरियल्स की बाकायदा जांच करती है। शहरी विकास अधिकारी धर्मेश मिस्त्री ने बताया कि जीडीसीआर का पूरी तरह से पालन होता है। स्थानीय स्तर पर गहराई से जांच की जाती है।

महानगर पालिका ने किए कई बदलाव

  • पालिका कमिश्नर, जोनल चीफ, शहरी विकास अधिकारी, फायर ऑफिसर और तकनीशियन की कमेटी फसाड़, एलिवेशन की जांच करने के बाद देते हैं मंजूरी।

  • 25 मीटर या इससे अधिक ऊंची बिल्डिंग के लिए फायर कंसल्टेंसी की मंजूरी लेनी जरूरी है।
  • बिल्डिंग में डेढ़ मीटर की सीढ़ी के बदले अब 2 मीटर की सीढ़ी बनाना अनिवार्य है।  
  • इंश्योरेंस के बाद ही बीयूसी मिलेगी। बिल्डिंग का कम से कम 15 साल का इंश्योरेंस होना चाहिए। इसके बाद ही बीयूसी दी जाएगी।

वह मंजर बहुत दर्दनाक था: दुकानदार मयूरभाई
तक्षशिला अग्निकांड में 22 बच्चों की मौत के साथ ही नीचे की दो दुकानें भी जलकर राख हो गई थी। हार्डवेयर की दुकान चला रहे मयूरभाई ने बताया कि उस मंजर को भुलाना बहुत मुश्किल है। मयूरभाई ने बताया कि अचानक दुकान के बगल में आग की लपटें आने लगी। मैं बाहर निकला तो ऊपर से बच्चे कूद रहे थे। आग में मेरा एक कारीगर दुकान में अंदर फंस गया था।

शटर तोड़कर उसे बड़ी मुश्किल से निकाला गया। आग से 23 लाख रुपए का नुकसान हुआ था। घटना के बाद 3 महीने पर पूरी बिल्डिंग सील थी। तीन महीने बाद दुकान खोलने की मंजूरी मिली। मैं दुकान में गया तो सब कुछ खत्म हो गया था। सब कुछ पटरी पर लाते-लाते 6 से 7 महीने लग गए।

फायर विभाग में कई नए उपकरण खरीदे गए, 5 और मशीनें लाने की हो रही तैयारी

तक्षशिला अग्निकांड के बाद फायर विभाग ने सभी जोन से एक-एक थर्मल इमरजेंसी कैमरा नाइट विजन की सुविधा की है। फायर फाइटिंग और रेस्क्यू के लिए 1 टर्न टेबल लेडर, 34 फायर सेफ्टी नेट, 7 वाटर कम फोम टैंकर, 2 टर्न टेबल लेडर, 2 एसीएल लेडर मशीनों को शामिल किया है। इसके अलावा और 5 मशीनें खरीदने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा सभी जोन में एक-एक घंटे की ट्रेनिंग दी जा रही है।

सभी थिएटर में फायर सेफ्टी डॉक्यमेंट्री दिखाई जा रही है। 512 लोगों को एक दिन में ट्रेनिंग दी गई। इन्हे फायर ब्रिगेड का वॉलिएंटर बनाया गया है। 143 लोगों को भी ट्रेनिंग देने की तैयारी है। इसके अलावा ऑनलाइन एनओसी देने की भी योजना बनाई गई है। कॉमर्शियल, शैक्षणिक, हॉस्पिटल, होटल-रेस्टोरेंट, टेक्सटाइल मार्केट, मॉल में नेशनल बिल्डिंग कोड और फायर सर्विस के डायरेक्टर जनरल द्वारा स्टैंडिंग कमेटी इंस्पेक्शन पॉलिसी के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

कॉमर्शियल इमारतों के लिए शॉर्ट, मीडियम और लांग टर्म पॉलिसी का भी प्रस्ताव है। अब तक अलग-अलग संस्थानों में 12535 लोगों को फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग दी गई। इसके अलावा तक्षशिला अग्निकांड की तरह ही 43 मॉकड्रिल भी किए गए। महानगर पालिका द्वारा कॉमर्शियल, शैक्षणिक, हॉस्पिटल, होटल-रेस्तोटेंट, टेक्सटाइल मार्केट, गेस्ट हाउस, दुकान समेत 10257 इमारतों का सर्वे किया गया। फायर के संसाधन न होने और नियमों की अनदेखी करने वाले 5142 को नोटिस दिए गए और 1094 इमारतों को सील किया गया।

पांच फायर सेफ्टी सोल्जर 11 महीने से दे रहे ट्रेनिंग

पिछले साल आज ही के दिन सूरत समेत पूरी दुनिया काे झकझाेर देने वाली तक्षशिला अग्निकांड की घटना हुई थी। वराछा में सरथाण प्राणी संग्रहालय के पास स्थित तीन मंजिला बिल्डिंग में शाम 4 बजे शॉट-सर्किट से आग लग गई थी। देखते ही देखते आग पूरी बिल्डिंग में फैल गई। इस दौरान बिल्डिंग में चल रहे क्लासेज में मौजूद 22 छात्रों की जलकर मौत हो गई थी। इस घटना से अहमदाबाद में फायर सेफ्टी की पढ़ाई कर रहे प्रतीक ढोलकिया का मन द्रवित हो उठा था।

उन्होंने निश्चय किया था कि प्रदेशभर में सभी शिक्षा संस्थानों में जाकर छात्रों को फायर सेफ्टी की नि:शुल्क ट्रेनिंग देंगे। प्रतीक ढोलकर भरूच के ग्रीनकस ऑर्गेनिक, पानों में फायर सेफ्टी ऑफिसर हैं। उसके पांच साथी वासुदेव धडुक, नमन जोशी, आदित्य ठाकर और मोक्षा पटेल इस अभियान में मदद करते हैं। ये सभी फायर सेफ्टी में ट्रेंड हैं और प्रदेश की बड़ी इंडस्ट्रियल इंडस्टीज में फायर अधिकारी हैं। प्रतीक ने फायर सेफ्टी सोल्जर टीम बनाई है। 

ये है मिशन: आग लगने पर छात्र खुद को बचा सकें 

भास्कर से बातचीत के दौरान प्रतीक ढोलकिया ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य गुजरात के सभी शिक्षा संस्थानों, स्कूल, कॉलेज , विश्वविद्यालय में मौजूद छात्र अचानक आग लगने के दौरान खुद को सुरक्षित रख सकें। अभियान के तहत हमने नि:शुल्क स्कूल सेफ्टी अवेरनेस प्रोग्राम शुरू किया है। हम स्कूलों में जाकर छात्रों, शिक्षकों को आग से बचने का तरीका सिखाते हैं। उन्हें पूरी ट्रेनिंग देते हैं।

ऐसे देते हैं जानकारी: छात्रों को उपकरणों के बारे में बताते हैं 

प्रतीक ने बताया कि विद्यार्थियों के लिए 45 मिनट का पीपीटी प्रेजेंटेशन का सेशन लिया जाता है। छात्रों को इलेक्ट्रिकल सेफ्टी सेफ एवेक्यूशन प्लान, मॉकड्रिल माईरन टोन जैसी सुरक्षा जानकारियां देते है। शिक्षकों के लिए 25 मिनट का सेशन होता है। स्कूल में मौजूद सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल, देखभाल के बारे में बताया जाता है।

जिला प्रशासन से मंजूरी लेकर देते हैं ट्रेनिंग: प्रतीकभाई  

प्रतीक ने बताया कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रशासन से मंजूरी लेकर अपनी टीम के साथ शिक्षा संस्थानों में ट्रेनिंग देते हैं। इसमें पीपीटी प्रजेंटेशन, मॉकड्रिल करके छात्रों को समझाते हैं। 29 जून 2019 से अब तक सूरत, बारडोली, अंकलेश्वर, अहमदाबाद, भरूच, महेसाणा में 25 हजार छात्रों और 6 हजार शिक्षकों को ट्रेनिंग दे चुके हैं।

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