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गरबा पर ग्रहण:इस बार भी गरबा के आयोजन पर मंडरा रहे असमंजस के बादल, कई बड़े आयोजकों ने रासोत्सव न कराने का लिया निर्णय

अहमदाबाद9 महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

कोरोना की तीसरी लहर के संबंध में सरकार की तैयारियों और विशेषज्ञों के संकेतों को ध्यान में रखते हुए इस बार भी नवरात्र के रासोत्सव पर ग्रहण लगता दिखाई देता है। कई बड़े आयोजकों ने इस बार गरबा रासोत्सव नहीं करने का निर्णय किया है तो कुछ अभी सरकार के इस संबंध में निर्देश जारी होने की राह ताक रहे हैं।

गुजरात की विशिष्ठ पहचान बने गरबा रासोत्सव को लेकर इस बार भी असमंजस के बाद मंडरा रहे हैं। अभी तक यह तय नहीं है कि आयोजन होगा या नहीं। हालांकि कुछ आयोजकों ने तो पहले से ही कार्यक्रम को लेकर किनारा कर लिया है, लेकिन कुछ सरकार के निर्देश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

पिछले करीब डेढ वर्ष से कोरोना महामारी के चलते समूचे विश्व की दशा और दिशा बदल चुकी है। राज्य में दूसरी लहर की तीव्रता के बाद अब धीरे-धीरे स्थितियां सामान्य होने लगी है। स्कूल-कॉलेज से लेकर बाजार सामान्य होने लगे हैं। इसके बावजूद अभी तीसरी लहर का खतरा टला नहीं है। प्रशासन इस आशंका को लेकर सावधानी बरतने के अलावा बचाव के उपाय पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

दूसरी ओर राजकोट का करीब दशक पुराना सरगम गोपी रास और कनैयानंद रासोत्सव का आयोजन करने वाले सरगम क्लब के गुणभाई डेलावाला ने बताया कि लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सबसे अधिक महत्व का है। हाल की स्थितियों को देखते हुए गरबा टालना ही उचित रहेगा। इसलिए क्लब इस बार रासोत्सव का आयोजन नहीं करेगा। सहियर ग्रुप के आयोजक सुरेन्द्रसिंह वाला ने कहा कि दूसरी लहर बेहद खतरनाक थी, बड़ी संख्या में लोगों ने अपने परिजनों को खोया है।

विशेषज्ञों की राय के अनुसार तीसरी लहर की आश्ंाका को लेकर कोई बड़ा आयोजन करना उचित नहीं होगा। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा होने का अंदेशा है। इसलिए ग्रुप इस बार रासोत्सव का आयोजन नहीं करेगा। राजकोट में हरेक वर्ष जाति, सामाज और विविध संगठनों की ओर से परंपरागत रासोत्सव का आयोजन किया जाता है।

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