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बीमारी का मुख्य कारण अभी तक स्पष्ट नहीं:उल्टी-दस्त, बुखार से फिर दो मरीजों की मौत, इस महीने 20 की जा चुकी है जान

सूरत2 महीने पहले
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  • उल्टी-दस्त और बुखार की जांच करने में ही काफी समय लग जाता है

उल्टी-दस्त और बुखार से आए दिन मरीजों की मौत हो रही है, जो चिंता का विषय बना हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि काफी कम समय में ही मरीज की हालत गंभीर हो जाती है, इसलिए रिकवर कर पाना काफी मुश्किल हो जाता है। हालांकि उल्टी-दस्त और बुखार होने का मुख्य कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।

फिलहाल इसे सीजनल बीमारी के रूप में देखा जा रहा है। गुरुवार को उल्टी-दस्त और बुखार से फिर 2 मरीजों की मौत हो गई। इस महीने के 14 दिनों में करीब 20 मरीजों की जान जा चुकी है। पांडेसरा शिवम नगर निवासी 17 वर्षीय सुमित्रा देवी चौधरी काे पिछले 3 दिन से उल्टी-दस्त की शिकायत थी। पास के क्लीनिक से इलाज चल रहा था। हालत खराब होने पर उन्हें सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि गुरुवार सुबह 7 बजे के करीब तबीयत अधिक खराब हुई तो लगभग 9 बजे अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक मौत हो चुकी थी। वहीं पूणा गांव के रेशमा रो हाउस के पास शिवम एवेन्यू निवासी 51 वर्षीय कन्हैयालाल तागड़ी कपड़ा व्यापारी थे। दो-तीन दिन से बुखार था, इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल गए। जहां इलाज के दौरान मौत हो गई।

मरीजाें के ऑर्गन फेल हाे रहे या तो ठीक से काम नहीं कर रहे
डॉक्टरों का कहना है कि उल्टी-दस्त और बुखार में कई बार मरीज के इंटरनल ऑर्गन फेल हो जाते हैं या काम करना बंद कर देते हैं। ऐसी हालत में मौत होने की संभावना है। उल्टी-दस्त से ज्यादातर डायरिया की शिकायत होती है, जिससे किडनी और लीवर पर असर पड़ता है। इलाज ना मिले तो मरीज की जान चली जाती है। इससे 2 घंटे में मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। इलाज करने का समय ही नहीं मिल पाता। उल्टी-दस्त और बुखार की जांच करने में ही काफी समय लग जाता है। शुरुआती 1 या 2 दिन में अगर मरीज इलाज के लिए अस्पताल आ जाए तो बहुत ही जल्द इस समस्या से निजात पा लेता है। लेकिन कई मरीज इस मामले को गंभीरता से नहीं समझते और गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं।

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