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ओमिक्रॉन से सावधान:गुजरात के एक्सपर्ट की चेतावनी- कमरे में 50 लोग हों और एक को ओमिक्रॉन हो; तो सभी संक्रमित हो सकते हैं

अहमदाबाद6 महीने पहलेलेखक: तन्हा पाठक पटेल
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देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। देश में 9 महीने में पहली बार कोरोना के मामले 1 लाख के पार पहुंचे हैं। वहीं, गुजरात में भी 6 जनवरी को एक ही दिन में कोरोना के करीब 4000 मामले सामने आए। इसमें दक्षिण अफ्रीका से फैला ओमिक्रॉन वेरिएंट भी शामिल है। ओमिक्रॉन के लक्षण बहुत सामान्य हैं और इसे पिछले वैरिएंट से कम खतरनाक कहा जा रहा है, लेकिन यह बेहद संक्रामक है।

कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए भास्कर डिजिटल ने दिग्गज कार्डियोलॉजिस्ट और गुजरात कोरोना टास्क फोर्स के सदस्य पद्मश्री डॉ. तेजस पटेल से बातचीत की। पहली और दूसरी लहर के दौरान डॉ. तेजस पटेल का आकलन लोगों के लिए बेहद उपयोगी रहा था। अब जब कोरोना की तीसरी लहर शुरू हो चुकी है, तो सभी के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इन सवालों के जवाब डॉ. तेजस पटेल ने दिए हैं। यहां पढ़िए उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...

भास्कर : कोरोना के मामले अचानक बढ़ने की क्या वजह है?
डॉ. तेजस पटेल : कोरोना की हर लहर इसी तरह से आई है। मतलब कोरोना की पहली और दूसरी लहर भी दुनिया के कुछ देशों में पहले आई और फिर भारत में पहुंची। ओमिक्रॉन के बाद देश में कोरोना की तीसरी लहर आ गई है। ओमिक्रॉन बहुत संक्रामक है। अगर एक कमरे में 50 लोग बैठे हैं और उनमें से एक में ओमिक्रॉन है तो वह सभी को संक्रमित कर सकता है।

हालांकि, राहत की बात यह है कोरोना की तीसरी लहर, पहली और दूसरी लहर की तरह घातक नहीं है। इसके अलावा, हमारे यहां बड़े पैमाने पर टीकाकरण हो चुका है। इसलिए जिन लोगों ने वैक्सीन के दो डोज लिए हैं, उन्हें ओमिक्रॉन से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधान रहने की जरूरत तो है। इधर ओमिक्रॉन के बारे में एक बात और महत्वपूर्ण है कि इससे लोगों की इम्यूनिटी काफी बेहतर हो सकती है। इसके बाद वायरस सामान्य सर्दी जैसा वायरस बनकर रह जाएगा।

जनवरी के तीसरे या चौथे सप्ताह में कोरोना की तीसरी लहर अपने चरम पर होगी: डॉ. तेजस पटेल।
जनवरी के तीसरे या चौथे सप्ताह में कोरोना की तीसरी लहर अपने चरम पर होगी: डॉ. तेजस पटेल।

भास्कर : कोरोना की तीसरी लहर किस तरह की होगी?
डॉ. तेजस पटेल : जिस तेजी से मामले बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि तीसरी लहर आ चुकी है। इस लहर का शिखर भी होगा, लेकिन जो भी लहर आई है वह खत्म भी हुई है। दूसरी लहर हमारे लिए बहुत दर्दनाक थी, लेकिन ओमिक्रॉन के अलावा कोई खराब म्यूटेशन नहीं आया तो केस बढ़ने के बावजूद बहुत कम लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ेगी और मृत्यु दर भी कम रहेगी।

भास्कर : तीसरी लहर कब कब चरम पर पहुंचेगी?
डॉ. तेजस पटेल : जैसे-जैसे मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है, ऐसा लग रहा है कि जनवरी के तीसरे या चौथे सप्ताह में कोरोना की तीसरी लहर अपने चरम पर होगी।

भास्कर : क्या दूसरी लहर जैसे हालात पैदा होने की संभावना है? डॉ. तेजस पटेल : वायरस के पैटर्न बदल रहे हैं, वेरिएंट नए हैं और जैसे-जैसे लोग संक्रमित हो रहे हैं, पूरी सोसायटी हर्ड इम्यूनिटी की तरफ बढ़ रही है। इसलिए तीसरी लहर में मरने वालों की संख्या दूसरी लहर की तुलना में बहुत कम होने की संभावना है। मेरे अनुमान से दूसरी लहर जैसे हालात पैदा होने की संभावना नहीं है।

भास्कर : तीसरी लहर में ओमिक्रॉन से युवाओं और बच्चों के अधिक संक्रमित होने की संभावना है?
डॉ. तेजस पटेल : जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है, उनमें संक्रमण होने की संभावना ज्यादा है। बच्चों में भी अब टीकाकरण शुरू हो गया है, तो हालात पेंचीदा नहीं होंगे। इस समय को-मोर्बिड रोगियों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है। हालांकि, ओमिक्रॉन के लक्षण सामान्य हैं। चौथे-पांचवें दिन कई रोगी निगेटिव हो रहे हैं। फिर भी हमें सावधान रहने की जरूरत है कि हम भीड़ न लगाएं और कोरोना गाइडलाइन का पालन करें।

जैसे-जैसे लोग संक्रमित हो रहे हैं, पूरी सोसायटी हर्ड इम्यूनिटी की तरफ बढ़ रही है : डॉ. तेजस पटेल।
जैसे-जैसे लोग संक्रमित हो रहे हैं, पूरी सोसायटी हर्ड इम्यूनिटी की तरफ बढ़ रही है : डॉ. तेजस पटेल।

भास्कर : 2-14 साल के बच्चों के टीकाकरण की क्या योजना है?
डॉ. तेजस पटेल : विदेशों में 15 साल से कम उम्र के बच्चों को टीका लगाया जा रहा है। वैक्सीनेशन के दिशा-निर्देश ICMR निर्धारित करती है। भारत में भी कुछ शर्तों के साथ जल्द ही 15 साल से कम उम्र के बच्चों में टीकाकरण शुरू किया जा सकता है।

भास्कर : डॉक्टर कह रहे हैं कि ओमिक्रॉन से ही महामारी खत्म होगी, यह कहां तक ​​सच है?
डॉ. तेजस पटेल : जैसे-जैसे लोग ओमिक्रॉन से संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन उन्हें अधिक समस्या नहीं हो रही तो इससे एंटीबॉडी उत्पन्न होती है और टी-शेल इम्यूनिटी भी काम करने लगती है। उस स्थिति में, वायरस सामान्य इन्फ्लूएंजा की तरह हो जाता है। अधिकांश वायरस ऐसे होते हैं, जो कभी खत्म नहीं होते। मसलन किसी न किसी रूप में मौजूद रहते हैं। चेचक और पोलियो को ही देख लीजिए, जो आज भी मौजूद हैं। इसलिए हमें इस वायरस के साथ भी जीना सीखना होगा।

भास्कर : क्या यह माना जा सकता है कि अब ज्यादातर मामले ओमिक्रॉन के ही आएंगे?
डॉ. तेजस पटेल : जैसे-जैसे मरीज अब तेजी से ठीक हो रहे हैं, ऐसा लगता है कि अब जो नए मामले सामने आ रहे हैं उनमें से ज्यादातर ओमिक्रॉन के ही हैं और आगे भी होंगे।

भास्कर : ओमिक्रॉन से बचने के लिए क्या करना चाहिए? रोकथाम के लिए कौन सी दवा लेनी चाहिए?
डॉ. तेजस पटेल : अब तक जो हम करते आए हैं, आगे भी हमें वही करना है। ओमिक्रॉन से बचने के लिए मास्क पहनना, हाथों को सैनिटाइज रखना और सामाजिक दूरी बनाए रखना जरूरी है। भीड़ न लगे, छोटी जगहों पर बड़ी संख्या में लोग बिल्कुल भी जमा न हों।

भास्कर : ऐसी खबरें हैं कि ओमिक्रॉन और डेल्टा मिलकर डोमिक्रॉन को फैला सकते हैं?
डॉ. तेजस पटेल : डोमिक्रॉन नाम का कोई वेरिएंट नहीं है। इससे अभी डरने की जरूरत नहीं है।

भास्कर : ओमिक्रॉन के खिलाफ कोवीशील्ड और कोवैक्सिन कितनी प्रभावी हैं?
डॉ. तेजस पटेल : दुनिया भर में सरकार की नीति है कि अगर आप कोवीशील्ड की दो खुराक लेते हैं तो आपको बूस्टर डोज कोवीशील्ड मिलता है और अगर आप कोवैक्सिन की दो खुराक लेते हैं तो आपको बूस्टर डोज भी कोवैक्सिन का ही मिलता है। कुछ विदेशी आंकड़े हैं, जो कहते हैं कि अगर आप टीके की पहली दो खुराक की तुलना में अलग-अलग टीके की तीसरी खुराक लेते हैं, तो प्रतिरक्षा बेहतर होगी। मेरा मानना ​​है कि हर टीका समान रूप से प्रभावी है।

भास्कर : तीसरी लहर कब खत्म होगी?
डॉ. तेजस पटेल : वायरस जितनी तेजी से फैलता है, उसका पीक उतनी ही तेजी से आता है और फिर उतनी ही तेजी से मामले घटने लगते हैं। इसलिए तीसरी लहर के दो महीने में खत्म होने की उम्मीद है।