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विजयदशमी, आदर्श रामलीला समेत रावण दहन के 5 कार्यक्रम रद्द:शहर में लगातार दूसरे साल रावण का पुतला नहीं जलेगा

सूरतएक महीने पहले
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  • वीआईपी रोड पर 65 और नीलगिरी ग्राउंड में 51 फीट के रावण का दहन होता था

कोरोना महामारी के कारण पिछले 45 सालों में लगातार दूसरी बाद आदर्श रामलीला ट्रस्ट द्वारा सार्वजनिक रामलीला और रावण दहन का कार्यक्रम रद्द किया गया है। ट्रस्ट ने पिछले साल भी रावण दहन का कार्यक्रम नहीं किया था। शहर में कुल पांच स्थानों पर सार्वजनिक रावण दहन का आयोजन होता था।

वीआईपी रोड, वेसू में आदर्श रामलीला ट्रस्ट द्वारा 65 फीट के रावण का दहन किया जाता था। इसके साथ ही लिंबायत में नीलगिरी ग्राउंड पर 51 फीट का रावण जलाया जाता था। भटार में स्थित राम मंदिर में 25 फीट के रावण दहन का आयोजन होता था। इसके अलावा उमरा में 2 जगह 20 से 25 फीट के रावण को जलाया जाता था। इस साल इन सभी स्थानों पर रावण दहन का आयोजन नहीं होगा। आदर्श रामलीला ट्रस्ट के मंत्री अनिल अग्रवाल ने बताया कि रावण दहन की गाइडलाइन 2 महीना पहले आए तो रावण दहन का आयोजन हो सकता है। शहर में रावण का पुतला बनाने वाले कारीगर नहीं हैं। पुतला बनाने के लिए शहर के बाहर से कारीगर आते हैं। कोरोना की वजह से इस साल बाहर से कारीगर नहीं आए।

मथुरा के रहने वाले मुश्ताकभाई और उनका परिवार सूरत में रावण का पुतला बनाता था। वे एक से डेढ़ महीने पहले 8 से 10 कारीगरों को लेकर आते थे। वर्ष 1976 में सिंगापुरी बाड़ी में आदर्श रामलीला ट्रस्ट द्वारा रावण दहन का आयोजन किया गया था। इसके बाद घोड़ दौड़ रोड पर मोहन पार्क, चौपाटी के पास पुलिस परेड ग्राउंड, यूनिवर्सिटी रोड, पिपलोद, एसडी जैन स्कूल के पास और अब पिछले 2-3 सालों से वीआईपी रोड, वेसू में रावण जलाया जाता था। इसी प्रकार रामलीला का आयोजन भी अलग-अलग स्थानों पर होता रहा है। अब रामलीला का आयोजन वेसू में रामलीला मैदान पर होता है। रामलीला की शुरुआत भटार में राम मंदिर से की गई थी। रावण दहन और आतिशबाजी के लिए वडोदरा और गाजियाबाद से कारीगर आते थे। रामलीला के 30 से 35 कलाकार वृंदावन से आते थे।

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