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लापरवाही / सूरत से चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन को भुसावल-इटारसी के रास्ते जाना था सीवान, तीसरे दिन पहुंच गई राउरकेला

Workers special train from Surat had to go via Bhusaval-Itarsi to Siwan, reached Rourkela on the third day
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Workers special train from Surat had to go via Bhusaval-Itarsi to Siwan, reached Rourkela on the third day

  • रेलवे ने इटारसी-जबलपुर-मानिकपुर-पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर रूट पर भारी ट्रैफिक बता रूट बदला
  • मुंबई के वसई स्टेशन से गोरखपुर के लिए चली ट्रेन के साथ भी यही हुआ

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 06:53 AM IST

सूरत. 21 मई को दोपहर ढाई बजे सूरत से रवाना हुई श्रमिक स्पेशल ट्रेन को 23 मई को दोपहर 12 बजे तक बिहार के सीवान पहुंचना था, लेकिन पहुंच गई ओडिशा के राउरकेला। यह देख चौंके कई यात्रियों ने सूरत से ट्रेन को रवाना करने वाले संयोजक प्रभुनाथ यादव को भी फोन किया। शाम तक यह ट्रेन झारखंड के रांची पहुंच चुकी थी। इस ट्रेन को सूरत से जलगांव, भुसावल, इटारसी, जबलपुर, प्रयागराज होते हुए सीवान पहुंचना था। 

ऐसा ही मुंबई के वसई राेड स्टेशन से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के लिए रवाना हुई श्रमिक स्पेशल ट्रेन के साथ भी हो गया। इस पर यात्रियाें काे लगा कि ट्रेन रास्ता भटक गई। यह ट्रेन 21 मई को रवाना हुई थी। इस पर सवाल उठने पर रेलवे अधिकारियाें ने कहा है ट्रेन के मौजूदा रूट में भारी ट्रैफिक के कारण उसके मार्ग में बदलाव किया गया। पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी रविंद्र भाकर ने कहा कि ट्रेन काे बदले रूट बिलासपुर, झारसुगुडा, राउरकेला, अदरा और आसनसाेल के रास्ते रवाना किया गया था। हालांकि जानकाराें का कहना है कि रेलवे अधिकारी अपनी चूक छिपाने के लिए बहाना बना रहे हैं।  

इन स्टेशनाें से चली ट्रेनें बदले रूट पर

रेलवे का कहना है कि इटारसी-जबलपुर-पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर रूट पर बड़ी संख्या में श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के चलने से भारी ट्रैफिक है। रेलवे बोर्ड ने पश्चिम रेलवे के वसई रोड, सूरत, वलसाड, अंकलेश्वर, कोंकण, सेंट्रल रेलवे के स्टेशनों से चलने वाली ट्रेनों को फिलहाल बिलासपुर-झारसुगुडा-राउरकेला के रास्ते चलाने का फैसला किया है। 

आगामी दो दिनोें तक यूपी-बिहार की श्रमिक ट्रेनें छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड होकर जाएंगी, 21 घंटे तक ज्यादा लगेंगे

देशभर से 300 से ज्यादा श्रमिक ट्रेनें यूपी, बिहार और ओडिशा भेजी रही हैं। इन ट्रेनों का टाइम टेबल नहीं होने से एक ही सेक्शन पर अटक रहीं हैं। यह समस्या खंडवा से इटारसी, जबलपुर व प्रयागराज तक बनी हुई है। ट्रेनें सूरत से खंडवा तक ही 20 घंटे से ज्यादा लग रहे। ट्रेनों को 5 से 6 घंटे एक ही जगह रोक दिया जा रहा है। यात्रियों को ट्रेन में न पानी मिल रहा है, न खाना।

इस समस्या को देखते हुए रेलवे ने ट्रेनों को भुसावल से इटारसी की ओर न भेजकर नागपुर, बिलासपुर, झारसुगुड़ा और राऊरकेला रूट से भेज रहा है। यूपी बिहार जाने के लिए श्रमिकों को महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, ओडिशा व झारखंड से होकर जाना पड़ेगा। ट्रेनें समय से भी चलीं तो 40 घंटे और लेट हुई तो 60 घंटे तक लग सकते हैं।

आम दिनों में इटारसी सेक्शन पर ये स्थिति

आम दिनों में इटारसी-प्रयागराज के बीच रोज 250 से ज्यादा शेड्यूल ट्रेनें चलती थीं। ये मुंबई, सूरत, अहमदाबाद से निकलकर जलगांव के रास्ते जाती थीं। अभी यूपी जाने वाली 60% श्रमिक ट्रेनों का गंतव्य जौनपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़ ही है। इसी वजह से 8 से 10 घंटे रुक-रुककर जा रही हैं।
एक के पीछे एक 15 ट्रेनें खड़ी हो गई थीं
21 मई को सूरत से शाम 5.30 बजे गाजीपुर के लिए रवाना हुई श्रमिक स्पेशल ट्रेन 23 मई को दोपहर 3 बजे तक भी सतना नहीं पहुच सकी थी। इसके पीछे 15 और ट्रेनें खडी हुई थीं, जो मुंबई, दक्षिण भारत से निकल कर यूपी जा रही थीं। इनमें से वसई से गोरखपुर वाली ट्रेन 23 मई को ओडिशा पहुंच गई थी।

हालात सुधरने तक अभी यही व्यवस्था रहेगी

वेस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविंद्र भाकर ने बताया कि ये ट्रेनें कंजेशन पूरी तरह से खत्म नहीं होने तक भुसावल के बाद वाया बिलासपुर, झारसुगुड़ा, राउरकेला होकर पूर्वी यूपी और बिहार भेजेंगे।

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