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कार्य अधूरे:बाढ़ राहत कार्य अब तक अधूरे, अधिकारियों को ऐसी बरसात की आस जो लापरवाही के दाग धुल दे

छछरौली24 दिन पहले
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  • हथनीकुंड बैराज डाउन स्ट्रीम व ताजेवाला एरिया में दो साल बाद भी बाढ़ राहत का कंकरीट वर्क अब तक चल रहा
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हथनीकुंड बैराज की डाउन स्ट्रीम में दो साल से चल रहे बाढ़ राहत कार्य इस साल भी शायद ही पूरे हो पाएं। वहीं बाढ़ बचाओ कार्य में ठेकेदारों के साथ-साथ सुस्त रवैया अपनाने वाले अधिकारी अच्छी बरसात की कामना कर रहे हैं, लेकिन अभी तक मानसून मेहरबान नहीं हुआ है। उन्हें शायद उम्मीद है कि यदि बरसात होगी तो नदी में पानी भी आएगा। पानी के बहाव के साथ ही अधिकारियों की सुस्ती के दाग भी इसमें धुल जाएंगे। फिर अधिकारी कह पाएंगे कि कार्य ताे पूरे हाे चुके थे बाढ़ में बह गए। पिछली बार नदी में रिकाॅर्ड आठ लाख क्यूसिक पानी आने के बाद हालात ज्यादा खराब होने से इस बार समय पर काम कराने का अधिकारियों पर काफी दबाव था, पर वे इसमें पास होते नहीं देख रहे।

बरसात के शुरू होने से पहले हथनी कुंड डाउन स्ट्रीम व ताजेवाला एरिया में बाढ़ राहत कार्य 30 जून तक समाप्त हो जाने थे, लेकिन अभी तक काम कछुआ गति से ही चल रहा है। किसी भी समय भारी बारिश व बाढ़ आ सकती है, ऐसे में बाढ़ से जो नुकसान होगा वह तो होगा ही, बल्कि जिस मकसद को पूरा करने के लिए यह कार्य शुरू किए गए थे उस पर लगाया धन व समय दोनों का कोई लाभ नहीं होगा। लेकिन अभी तक सुस्ती जताने वाले सिंचाई विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि बरसात से पहले काम पूरा हो जाएगा। वहीं उनका कहना है कि अगर कोई नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी संबधित एजेंसी की होगी, जिसने काम पूरा नहीं किया। 

ताजिया वाला में बाढ़ राहत के चार कार्य चल रहे हैं जिनमें से दो कार्य 80% और दो कार्य 90% पूरे कर लिए गए हैं उन्होंने बताया कि यमुना में पानी आने तक यमुना नदी में चल रहे सभी बाढ़ राहत कार्य समय रहते पूरे कर लिए जाएंगे।
धर्मपाल, एसडीओ, सिंचाई विभाग।

सबसे ज्यादा खतरा बैराज की डाउन स्ट्रीम कोः

हथनीकुंड बैराज के समीप बाढ़ राहत बचाव कार्य समय से शुरू होने के बाद भी अभी तक पूरा नहीं हो सका है। बाढ़ राहत बचाव कार्यों को पूरा करने का समय 30 जून को पूरा हो चुका है। स्थानीय लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। यमुना नदी के किनारों पर बसे दर्जनों गांव के लोगों का कहना है कि हर वर्ष उनको बरसात के सीजन में छछरौली मंडी में शरण लेनी पड़ती है।

अधिकारी हर वर्ष इसी तरह आधे अधूरे कार्य कराते हैं, इसका कोई लाभ भी नहीं होता। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारी ही कहते हैं कि डाउन स्ट्रीम में सीसी ब्लॉक की प्लेट सही से सेट नहीं हुईं और पानी पिछले साल की तरह अधिक मात्रा में आया तो भारी कटाव होगा। इससे बैराज के स्ट्रक्चर को भी खतरा हो सकता है। लेकिन अभी तक अधिकारी इस काम पता नहीं क्यों अनदेखा कर रहे हैं।

कंकरीट वर्क को 21 दिन सेट होने को चाहिए

बाढ़ बचाव कार्य दो प्रकार का हो रहा है। एक दो नदी किनारे पत्थर के स्टड लगाए जा रहे हैं तो वहीं हथनीकुंड डाउन स्ट्रीम व ताजेवाला एरिया में कंकरीट के भारी ब्लॉक लगाने का कार्य कराया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नदी क्षेत्र में जो कंकरीट कार्य कराया जाता है वह 8 जून से पहले पूरा हो जाना चाहिए। ताकि 30 जून को मानसून आने तक कंक्रीट वर्क अच्छे से सैट हो जाए। इसे कम से कम 21 दिन का समय सेट होने में लगता है।

ठेकेदार द्वारा अगर अब कंकरीट वर्क कराया जाता है तो उसका कोई फायदा मिलने वाला नहीं है। क्योंकि बरसात का सीजन शुरू हो चुका है। किसी भी समय पहाड़ों से नदी में भारी मात्रा में पानी आ सकता है। जिसके बाद पानी का प्रेशर कंकरीट के कार्य को बहा ले जाएगा। इससे पैसे की बर्बादी ही होगी। इसका फायदा कितना होगा यह कोई नहीं बता पा रहा है।

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